ज़बूर 121:1-2
ज़बूर 121:1-2 DGV
ज़ियारत का गीत। मैं अपनी आँखों को पहाड़ों की तरफ़ उठाता हूँ। मेरी मदद कहाँ से आती है? मेरी मदद रब से आती है, जो आसमानो-ज़मीन का ख़ालिक़ है।
ज़ियारत का गीत। मैं अपनी आँखों को पहाड़ों की तरफ़ उठाता हूँ। मेरी मदद कहाँ से आती है? मेरी मदद रब से आती है, जो आसमानो-ज़मीन का ख़ालिक़ है।