क़ुज़ात 11:30-31
क़ुज़ात 11:30-31 DGV
पहले उसने रब के सामने क़सम खाई, “अगर तू मुझे अम्मोनियों पर फ़तह दे और मैं सहीह-सलामत लौटूँ तो जो कुछ भी पहले मेरे घर के दरवाज़े से निकलकर मुझसे मिले वह तेरे लिए मख़सूस किया जाएगा। मैं उसे भस्म होनेवाली क़ुरबानी के तौर पर पेश करूँगा।”





