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यसायाह 55:10-11

यसायाह 55:10-11 DGV

बारिश और बर्फ़ पर ग़ौर करो! ज़मीन पर पड़ने के बाद यह ख़ाली हाथ वापस नहीं आती बल्कि ज़मीन को यों सेराब करती है कि पौदे फूटने और फलने फूलने लगते हैं बल्कि पकते पकते बीज बोनेवाले को बीज और भूके को रोटी मुहैया करते हैं। मेरे मुँह से निकला हुआ कलाम भी ऐसा ही है। वह ख़ाली हाथ वापस नहीं आएगा बल्कि मेरी मरज़ी पूरी करेगा और उसमें कामयाब होगा जिसके लिए मैंने उसे भेजा था।

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यसायाह 55:10-11 - बारिश और बर्फ़ पर ग़ौर करो! ज़मीन पर पड़ने के बाद यह ख़ाली हाथ वापस नहीं आती बल्कि ज़मीन को यों सेराब करती है कि पौदे फूटने और फलने फूलने लगते हैं बल्कि पकते पकते बीज बोनेवाले को बीज और भूके को रोटी मुहैया करते हैं। मेरे मुँह से निकला हुआ कलाम भी ऐसा ही है। वह ख़ाली हाथ वापस नहीं आएगा बल्कि मेरी मरज़ी पूरी करेगा और उसमें कामयाब होगा जिसके लिए मैंने उसे भेजा था।यसायाह 55:10-11 - बारिश और बर्फ़ पर ग़ौर करो! ज़मीन पर पड़ने के बाद यह ख़ाली हाथ वापस नहीं आती बल्कि ज़मीन को यों सेराब करती है कि पौदे फूटने और फलने फूलने लगते हैं बल्कि पकते पकते बीज बोनेवाले को बीज और भूके को रोटी मुहैया करते हैं। मेरे मुँह से निकला हुआ कलाम भी ऐसा ही है। वह ख़ाली हाथ वापस नहीं आएगा बल्कि मेरी मरज़ी पूरी करेगा और उसमें कामयाब होगा जिसके लिए मैंने उसे भेजा था।यसायाह 55:10-11 - बारिश और बर्फ़ पर ग़ौर करो! ज़मीन पर पड़ने के बाद यह ख़ाली हाथ वापस नहीं आती बल्कि ज़मीन को यों सेराब करती है कि पौदे फूटने और फलने फूलने लगते हैं बल्कि पकते पकते बीज बोनेवाले को बीज और भूके को रोटी मुहैया करते हैं। मेरे मुँह से निकला हुआ कलाम भी ऐसा ही है। वह ख़ाली हाथ वापस नहीं आएगा बल्कि मेरी मरज़ी पूरी करेगा और उसमें कामयाब होगा जिसके लिए मैंने उसे भेजा था।यसायाह 55:10-11 - बारिश और बर्फ़ पर ग़ौर करो! ज़मीन पर पड़ने के बाद यह ख़ाली हाथ वापस नहीं आती बल्कि ज़मीन को यों सेराब करती है कि पौदे फूटने और फलने फूलने लगते हैं बल्कि पकते पकते बीज बोनेवाले को बीज और भूके को रोटी मुहैया करते हैं। मेरे मुँह से निकला हुआ कलाम भी ऐसा ही है। वह ख़ाली हाथ वापस नहीं आएगा बल्कि मेरी मरज़ी पूरी करेगा और उसमें कामयाब होगा जिसके लिए मैंने उसे भेजा था।यसायाह 55:10-11 - बारिश और बर्फ़ पर ग़ौर करो! ज़मीन पर पड़ने के बाद यह ख़ाली हाथ वापस नहीं आती बल्कि ज़मीन को यों सेराब करती है कि पौदे फूटने और फलने फूलने लगते हैं बल्कि पकते पकते बीज बोनेवाले को बीज और भूके को रोटी मुहैया करते हैं। मेरे मुँह से निकला हुआ कलाम भी ऐसा ही है। वह ख़ाली हाथ वापस नहीं आएगा बल्कि मेरी मरज़ी पूरी करेगा और उसमें कामयाब होगा जिसके लिए मैंने उसे भेजा था।