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1 पतरस 1:24-25

1 पतरस 1:24-25 DGV

यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, “तमाम इनसान घास ही हैं, उनकी तमाम शानो-शौकत जंगली फूल की मानिंद है। घास तो मुरझा जाती और फूल गिर जाता है, लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।” मज़कूरा कलाम अल्लाह की ख़ुशख़बरी है जो आपको सुनाई गई है।

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1 पतरस 1:24-25 - यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, “तमाम इनसान घास ही हैं, उनकी तमाम शानो-शौकत जंगली फूल की मानिंद है। घास तो मुरझा जाती और फूल गिर जाता है, लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।” मज़कूरा कलाम अल्लाह की ख़ुशख़बरी है जो आपको सुनाई गई है।1 पतरस 1:24-25 - यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, “तमाम इनसान घास ही हैं, उनकी तमाम शानो-शौकत जंगली फूल की मानिंद है। घास तो मुरझा जाती और फूल गिर जाता है, लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।” मज़कूरा कलाम अल्लाह की ख़ुशख़बरी है जो आपको सुनाई गई है।1 पतरस 1:24-25 - यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, “तमाम इनसान घास ही हैं, उनकी तमाम शानो-शौकत जंगली फूल की मानिंद है। घास तो मुरझा जाती और फूल गिर जाता है, लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।” मज़कूरा कलाम अल्लाह की ख़ुशख़बरी है जो आपको सुनाई गई है।1 पतरस 1:24-25 - यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, “तमाम इनसान घास ही हैं, उनकी तमाम शानो-शौकत जंगली फूल की मानिंद है। घास तो मुरझा जाती और फूल गिर जाता है, लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।” मज़कूरा कलाम अल्लाह की ख़ुशख़बरी है जो आपको सुनाई गई है।1 पतरस 1:24-25 - यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है, “तमाम इनसान घास ही हैं, उनकी तमाम शानो-शौकत जंगली फूल की मानिंद है। घास तो मुरझा जाती और फूल गिर जाता है, लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।” मज़कूरा कलाम अल्लाह की ख़ुशख़बरी है जो आपको सुनाई गई है।

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