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मत्तियाह 2

2
तारे द्वारा पंडितों को रास्ता दिखाया जाना
1राजा हेरोदेस के शासन-काल में#2:1 राजा हेरोदेस के शासन-काल में - यह राजा हेरोदेस प्रथम है (सन् 37 बी.सी.ई. से 4 बी.सी.ई. तक)। वह इज़राएल का कठपुतली शासक था जिसे रोम सम्राट ने स्थापित किया था। राजा हेरोदेस अपनी भवन-निर्माण योजनाओं तथा अपने परिवार और प्रजा के प्रति क्रूरता के लिए मशहूर था। जब यहूदिया प्रदेश के बैथलहम गाँव में प्रभु येशु का जन्म हुआ, तब पूर्व के देशों से कुछ पंडित#2:1 पूर्व के देशों से कुछ पंडित - ये पंडित या नक्षत्र ज्ञानी पर्शिया देश से थे जिनको आज ईरान-इराक के देशों के नाम से जाना जाता है। वे तारों का अध्ययन करने के लिए जाने जाते थे। यरूशलम शहर में आए। 2वे लोगों से पूछने लगे, “यहूदियों के राजा जिनका जन्म हो चुका है, कहाँ हैं? हम यह इसलिए पूछ रहे हैं, क्योंकि हमने एक उदय होता तारा देखा है जो उनके जन्म को दर्शाता है, तो हम उनके आगे झुक कर प्रणाम करने आए हैं।”
3यह सुनकर राजा हेरोदेस चिंता में पड़ गया और उसके साथ यरूशलम के बहुत से निवासी भी। 4राजा हेरोदेस ने सब प्रधान पुरोहितों और धर्मगुरुओं को इकट्ठा कर उनसे पूछा, “मुक्‍तिदाता का जन्म कहाँ हुआ होगा?”
5उन्होंने बताया, “मुक्‍तिदाता का जन्म यहूदिया प्रदेश के बैथलहम गाँव में होगा। हम यह जानते हैं क्योंकि बहुत साल पहले परमात्मा के प्रवक्‍ता मिका ने यह अपनी पुस्तक में लिखा है,
6‘ओ बैथलहम, यहूदिया प्रदेश के गाँव,
तू यहूदिया के प्रमुख नगरों में किसी से कम नहीं,
क्योंकि तुझमें एक शासक पैदा होगा
जो मेरी प्रजा इज़राएल की चरवाहे की तरह देखभाल करेगा।’”#मिका 5:2
7तब हेरोदेस ने पंडितों को चुपचाप बुलाकर उनसे पूछताछ की और उनसे यह पता लगा लिया कि तारा उन्हें ठीक किस समय दिखाई दिया था। 8फिर उसने यह कहकर उन्हें बैथलहम गाँव भेजा, “जाओ, और बालक को खोजो और जब वह मिल जाए तो वापस आकर मुझे बताना कि मैं भी जाकर उनके सामने झुक का उन्हें प्रणाम करूँ।”
9राजा का आदेश सुनकर पंडित बालक की खोज में निकल पड़े। और देखो, जो तारा उन्होंने उदय होते देखा था, वह उनके आगे-आगे चला और जहाँ बालक था, ठीक उस घर के ऊपर ठहर गया। 10तारे को देखकर पंडितों की खुशी का ठिकाना न रहा।
11जब वे घर के अंदर गए, उन्होंने बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा। उन्होंने बालक के सामने झुककर उसे प्रणाम किया और अपने खज़ाने के संदूक खोलकर सोना, लोबान के टुकड़े और गंधरस की भेंटें बालक को चढ़ाई।
12तब पंडितों ने सपने में परमात्मा का यह आदेश पाकर कि राजा हेरोदेस के पास न लौटना, वे दूसरे मार्ग से अपने-अपने देश चले गए।
इजिप्ट देश में शरण लेना
13पंडितों के चले जाने के बाद प्रभु परमात्मा के स्वर्गदूत ने सपने में योसफ को दर्शन दिया। उसने योसफ से कहा, “उठो, बालक और उसकी माता को लेकर इजिप्ट देश को भाग जाओ। जब तक मैं लौटने के लिए न कहूँ, वहीं रहना, क्योंकि राजा हेरोदेस इस बालक की हत्या करने के लिए इसकी खोज करने वाला है।”
14तो जोसफ नींद से उठा और रात में ही बालक और उसकी माता को लेकर इजिप्ट देश चला गया 15और वे राजा हेरोदेस की मृत्यु तक वहीं रहे। इसलिए परमात्मा के प्रवक्‍ता द्वारा किया गया यह वादा पूरा हुआ, “मैंने इजिप्ट देश से अपने पुत्र को बुलाया।”#होशे 11:1
बालकों की हत्या
16जब राजा हेरोदेस ने देखा कि पंडितों ने उसे धोखा दिया है तब वह क्रोध से भर गया। उसने सैनिकों को भेजा और बैथलहम तथा उसके आस-पास के गाँवों में उन सब बालकों को, जो पंडितों के बताए समय के अनुसार दो साल के या उससे कम के थे, मरवा डाला। 17इसलिए प्रभु परमात्मा द्वारा किया गया यह वादा पूरा हुआ, जैसा कि उनके प्रवक्‍ता यरमियाह ने कहा था,
18“रमाह नगर में रोना और दर्द से भरी आवाज़ें सुनाई दीं।
कुलमाता राशेल#2:18 कुलमाता राशेल - राशेल याकोब की पत्नी थी। याकोब को इज़राएल के नाम से भी जाना जाता था, इसलिए राशेल को इज़राएल राष्ट्र की आत्मिक माँ माना जाता था। अपने बच्चों के लिए रो रही थी।
वह तसल्ली नहीं चाहती है
क्योंकि उसके पुत्र मर गए थे।”#यरमियाह 31:15
इजिप्ट से लौटना
19राजा हेरोदेस की मृत्यु के बाद प्रभु परमात्मा के स्वर्गदूत ने इजिप्ट देश में योसफ को सपने में दर्शन दिया 20और उससे कहा, “उठो, बालक और उसकी माता को लेकर इज़राएल देश वापस लौट जाओ, क्योंकि जो लोग बालक का जान लेना चाहते थे, वे अब मर चुके हैं।”
21योसफ नींद से उठा और बालक तथा उसकी माता को लेकर इज़राएल देश वापस लौट गया। 22परंतु जब योसफ ने सुना कि राजा अरखेलस अपने पिता राजा हेरोदेस की मृत्यु के बाद यहूदिया प्रदेश में शासन कर रहा है, तब उसे वहाँ जाने से डर लगा। और सपने में चेतावनी पाकर गलील प्रदेश चला गया।
23तब परिवार नासरत नामक नगर में जाकर रहने लगा। इससे परमात्मा के प्रवक्‍ताओं की यह बात पूरी हुई, “उसे नासरी कहा जाएगा।”

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