राजदूतों 7
7
शिष्य स्टैफनस का अपने बचाव में भाषण
1महापुरोहित ने पूछा, “क्या ये आरोप सच हैं?”
2स्टैफनस ने कहा, “गुरुवर और भाइयो, सुनिए! हमारे कुलपिता अब्राहम हारान शहर में निवास करने से पहले मेसोपोतामिया क्षेत्र में थे। तेजस्वी परमात्मा ने उन्हें दर्शन दिया 3और उनसे यह कहा, ‘तुम अपने देश और कुटुम्ब से निकल जाओ और उस देश में चले जाओ जो मैं तुम्हें दिखाऊँगा।’#उत्पत्ति 12:1 4तब अब्राहम खसदी देश से निकलकर हारान में जा बसे।
“उनके पिता की मृत्यु के बाद परमात्मा उन्हें इस भूमि पर ले आए जहाँ तुम अब रहते हो। 5यहाँ परमात्मा ने उनको भूमि पर कोई अधिकार नहीं दिया, यहाँ तक कि पैर रखने को स्थान भी न दिया, यद्यपि उस समय कुलपिता अब्राहम के कोई पुत्र न था तो भी परमात्मा ने उनसे यह प्रतिज्ञा की, ‘मैं यह देश तुम्हें और तुम्हारे वंश को दे दूँगा।’
6“परमात्मा ने उनसे यह भी कहा, ‘तुम्हारे वंशज पराए देश में पदेशी बनकर रहेंगे, जहाँ के लोग उन्हें गुलाम बनाएँगे और चार सौ साल तक उन पर अत्याचार करेंगे।’ 7फिर परमात्मा ने कहा, ‘जो देश उन्हें गुलाम बनाएगा उसे मैं दंड दूँगा। इसके बाद वे उस देश से बाहर निकल आएँगे और इस स्थान पर मेरी भक्ति करेंगे।’#उत्पत्ति 15:13-15
8“परमात्मा ने अब्राहम से कहा, ‘हर एक परिवार में सब बेटों का यह दिखाने के लिए चीरा-संस्कार किया जाना चाहिए कि तुमने मेरे साथ एक अनुबंध किया है।’ इसलिए जब इसहाक आठ का दिन हुआ, तो अब्राहम ने उसका चीरा-संस्कार किया। बाद में, इसहाक ने अपने बेटे याकोब का चीरा-संस्कार किया और याकोब ने अपने बारह बेटों के साथ भी ऐसा ही किया। ये बारह पुरुष हमारे पूर्वज थे।
9“तुम जानते हो कि याकोब के बड़े बेटे अपने छोटे भाई योसफ से जलन रखने लगे और उसे इजिप्ट ले जाने के लिए एक गुलाम के रूप में बेच दिया। किंतु परमात्मा उसके साथ था 10और वह सब दुख-तकलीफों से उसको बचाते रहे। परमात्मा ने इजिप्ट के राजा फेरो के मन में योसफ के प्रति कृपा भर दी और उसको बुद्धि प्रदान की। फेरो ने योसफ को इजिप्ट का शासक और अपने पूरे राजभवन का अधिकारी नियुक्त किया।
11“जब सारे इजिप्ट और कनान देशों में अकाल के कारण भयंकर संकट पड़ा, हमारे पूर्वजों को अन्न की कमी हो गयी। 12जब याकोब ने यह सुना कि इजिप्ट में अन्न की कमी नहीं है, उसने हमारे पूर्वजों को पहली बार वहाँ भेजा। 13इजिप्ट देश की अपनी दूसरी यात्रा में योसफ ने अपने भाइयों को बता दिया कि वह कौन है। फेरो को भी योसफ के कुल का पता चल गया।
14“तब योसफ ने अपने पिता याकोब और अपने सारे परिवार अर्थात् पचहत्तर लोगों को बुलवाया। 15याकोब इजिप्ट को गए। वहीं उनकी मृत्यु हुई और हमारे पूर्वजों की भी। 16उनकी अस्थियाँ शकेम नगर में लाई गईं और उस शव रखने वाली गुफा में रखीं गईं जिसे कुलपिता अब्राहम ने पैसे देकर शकेम निवासी हमोर के वंशजों से खरीद लिया था।
17“जैसे-जैसे परमात्मा ने अब्राहम से की गई अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने का समय निकट आता गया, इजिप्ट में हमारे लोगों की संख्या बहुत बढ़ गई। 18उस समय इजिप्ट में एक और राजा आया जो योसफ के बारे में कुछ नहीं जानता था। 19उसने हमारे लोगों के साथ चालाकी की और हमारे पूर्वजों पर अत्याचार कर उन्हें मजबूर किया कि वे जन्म होते ही अपने बच्चों को घर के बाहर छोड़ दिया करें, जिससे वे ज़िन्दा न बचें।
20“ऐसे कठिन समय में मोशे का जन्म हुआ परंतु परमात्मा उसका जीवन सुंदर बनाएँगे। तीन महीने तक उनका पालन-पोषण अपने पिता के घर में हुआ। 21जब उनको छुपाए रखना असंभव हो गया तो उनकी माँ ने उन्हें नदी के किनारे छोड़ दिया था, फेरो की बेटी ने उन्हें उठा लिया और अपने बेटे की तरह उनका पालन-पोषण करने लगी। 22मोशे को इजिप्ट देश की सारी शिक्षाओं को सिखाया गया, और वह अपने शब्दों और कार्यों में शक्तिशाली था।
23“जब मोशे चालीस साल के हुए तब उनके मन में आया कि वह अपने भाइयों, अर्थात् इज़राएल के लोगों को मिलें और उनका हाल चाल जाने। 24एक दिन मोशे ने देखा कि एक इजिप्ट निवासी उनके अपने इज़राएल देश के व्यक्ति के साथ बुरा व्यवहार कर रहा है। तो मोशे ने इजिप्ट निवासी की हत्या कर दी और उस व्यक्ति की रक्षा की, और इस प्रकार अपने इज़राएल देश के भाई का बदला लिया। 25मोशे का विचार था, ‘मेरे भाई, अर्थात् इज़राएल के लोग समझ जाएँगे कि परमात्मा मेरे हाथों उनको मुक्ति कराएँगे।’ परंतु इज़राएल के लोग यह बात न समझे।
26“अगले दिन इज़राएल के दो लोग आपस में लड़ रहे थे। मोशे ने उन्हें देखा और उनके पास जाकर मेल-मिलाप करने के लिए समझाया। उन्होंने कहा, ‘सज्जनो, तुम भाई-भाई हो। तो लड़ाई क्यों करते हो?’
27“इस पर, जिस व्यक्ति ने लड़ाई की शुरुआत की थी, मोशे को धक्का देते हुए कहा, ‘तुम्हें किसने हमारे ऊपर शासक और जज नियुक्त किया है? 28जिस तरह कल तुमने उस इजिप्ट देश के आदमी को मार डाला, क्या उसी तरह मुझे भी मार डालना चाहते हो?’#निर्गमन 2:14 29यह बात सुनकर मोशे वहाँ से भाग खड़े हुए और मिद्यान देश में परदेशी के रूप में बस गए। वहाँ उनके दो पुत्र हुए।
30“जब चालीस साल बीत गए तब सीनय पहाड़ के सुनसान बंजर जगह में, जलती हुई झाड़ी की ज्वाला में, परमात्मा के एक स्वर्गदूत ने मोशे को दर्शन दिया। 31यह दर्शन पाकर मोशे हैरान हो गए। जब वह देखने के लिए जलती झाड़ी के नज़दीक गए तब उन्हें प्रभु परमात्मा की आवाज़ सुनाई दी, 32‘मैं वह परमात्मा हूँ जिसकी भक्ति तुम्हारे पूर्वजों अब्राहम, इसहाक और याकोब ने की थी।’#निर्गमन 3:6,15 यह सुनकर मोशे काँप उठे और वह उस ओर देखने की हिम्मत न कर सके।
33“प्रभु ने उनसे कहा, ‘अपने पैरों से जूतियाँ उतार दो, क्योंकि जिस जगह पर तुम खड़े हो, वह पवित्र है। 34मैंने इजिप्ट देश में अपनी प्रजा पर अन्याय होते देखा है। मैंने उनकी दुहाई सुनी है और मैं उन्हें गुलामी से मुक्त करने के लिए उतरा हूँ। अब तुम तैयार हो जाओ, मैं तुम्हें इजिप्ट देश भेजूँगा।’#निर्गमन 3:5; 7; 8; 10
35“परमात्मा ने उसी मोशे को दुबारा भेजा जिसे लोगों ने पहले यह कहते हुए ठुकरा दिया था, ‘किसने तुम्हें हम पर शासक और जज नियुक्त किया है?’ परमात्मा के स्वर्गदूत ने जलती हुई झाड़ी से मोशे से बातचीत की थी। परमात्मा ने अपने उसी स्वर्गदूत द्वारा मोशे की मदद की कि वह लोगों को छुड़ाएँ और शासन करें।
36“वह इजिप्ट देश में, लाल सागर के तट पर और चालीस साल तक सुनसान बंजर जगह में अद्भुत काम और परमात्मा की शक्ति के चिन्ह दिखाते हुए इज़राएल के लोगों को निकाल लाए।
37“यह वही मोशे हैं जिन्होंने इज़राएल के लोगों से कहा था, ‘परमात्मा तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिए एक परमात्मा के प्रवक्ता नियुक्त करेंगे जैसे उन्होंने मुझे नियुक्त किया है।’#उपदेश 18:15 38यह वही परमात्मा के प्रवक्ता मोशे हैं जो सुनसान बंजर जगह में हमारे पूर्वजों के समूह के साथ थे जब स्वर्गदूत ने सीनय पहाड़ पर उनसे बात की थी। उसी स्थान पर मोशे को परमात्मा के जीवन-दायक संदेश प्राप्त हुए थे कि वह उन संदेशों को हमें प्रदान करें।
39“परंतु हमारे पूर्वज परमात्मा के प्रवक्ता मोशे की बात नहीं सुनना चाहते थे, इसलिए उनको अस्वीकार कर दिया और अपना मन फिर से इजिप्ट की ओर लगाया।
40“वे मोशे के भाई हारोन से बोले, ‘हमारे लिए ऐसे देवता की मूर्ति बनाओ जो हमारा मार्गदर्शन करे, क्योंकि उन मोशे का जो हमें इजिप्ट देश से निकाल कर लाए थे, न जाने क्या हुआ।’#निर्गमन 32:1,23 41तब इज़राएल के लोगों ने बछड़े की एक मूर्ति बनाई और उसके आगे बलि चढ़ाई। वे अपने हाथों से बनाई गई मूर्ति के लिए खुशियाँ मनाने लगे।
42“इस पर परमात्मा ने उनसे अपना मुँह मोड़ लिया और उन्हें आकाश के सूरज, चाँद और सितारों को पूजने को छोड़ दिया, जैसा कि परमात्मा के प्रवक्ताओं की पुस्तक में लिखा है,
‘हे इज़राएल वंश,
क्या तुमने सुनसान बंजर जगह में
चालीस साल तक मुझे पशु-बलि चढ़ाई?
43नहीं! तुम लोग तो मोलोख देवता#7:43 मोलोख देवता - यह शुक्र ग्रह था, एक कनानी देवता जिसे लोग आकाश और सूर्य देवता के रूप में पूजते थे। की वेदी को
और रेफान देवता#7:43 रेफान देवता - शनि ग्रह को संदर्भित करता है जिसे इजिप्त के लोगों द्वारा देवता के रूप में पूजा जाता था। के तारे को
अर्थात् उन मूर्तियों को जो तुमने पूजने के लिए बनाई थीं,
अपने साथ लेकर फिरते रहे।
मैं तुमको बाबीलोन देश के उस पार बसाऊँगा।’#आमोस 5:25-27
44“वह तंबू-मंदिर#7:44 वह तंबू-मंदिर - या “गवाह का तंबू” जो दर्शाता है कि परमात्मा उनके साथ है। जो परमात्मा की उपस्थिति को दर्शाता था सुनसान बंजर जगह में हमारे पूर्वजों के साथ था। यह तंबू-मंदिर उस आदेश के अनुसार बना था जो परमात्मा ने मोशे को दिया था, और जिसका नमूना स्वयं मोशे देख चुके थे। 45हमारे पूर्वज इस तंबू-मंदिर को यहोशु के नेतृत्व में अपने साथ उस भूमि पर ले आए, जिसे उन्होंने अपने अधिकार में ले लिया था और जहाँ से परमात्मा ने हमारे पूर्वजों के सामने से देशों को निकाल दिया था और यह तंबू-मंदिर वहाँ राजा दाविद के समय तक रहा।
46“राजा दाविद ने परमात्मा को प्रसन्न किया और परमात्मा से पूछा कि क्या वह इज़राएल के लोगों के लिए उनका एक मंदिर बना सकता है। 47पर राजा शलोमो द्वारा ही परमात्मा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया गया।
48“सच तो यह है कि परमेश्वर मनुष्य के हाथों बनाए गए मंदिरों में नहीं रहते, जैसा कि उनके प्रवक्ता यशायाह ने लिखा है कि परमात्मा कहते हैं,#7:48 यशायाह ने लिखा है कि परमात्मा कहते हैं - या, “यशायाह कहते हैं” लेकिन पूर्ण अर्थ वास्तव में है, “यशायाह ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि परमात्मा कहते हैं”
49‘परमस्वर्ग मेरा सिंहासन है
और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी।
तुम मेरे लिए कैसा मंदिर बनाओगे?
क्या मुझे आराम करने की जगह की ज़रूरत है?
50क्या यह सब मैंने अपने हाथ से नहीं बनाया है?’#यशायाह 66:1-2
51“कठोर मनवालो,#7:51कठोर मनवालो - या “मन और कान के चीरा-संस्कार रहित लोग” जिसका अर्थ “कठोर मनवाले वे लोग जो यहूदी समाज से नहीं हैं।” कान से बहरे और ढीठ लोगो! तुम हमेशा पवित्र आत्मा का विरोध करते हो जैसे तुम्हारे पूर्वज करते थे। 52क्या तुम्हारे पूर्वजों ने किसी परमात्मा के प्रवक्ता को नहीं सताया? उन्होंने धर्मी मुक्तिदाता येशु के आने का संदेश बताने वालों की हत्या की थी, और अब तुमने उन ही से धोखा किया और उनकी हत्या के भागी बने। 53तुम्हें स्वर्गदूतों द्वारा मोशे के नियम और शिक्षा प्राप्त हुए, पर उनका तुमने पालन नहीं किया।”
शिष्य स्टैफनस की हत्या
54यह बात सुनकर यहूदी अगुवे भड़क उठे और स्टैफनस पर दाँत पीसने लगे। 55स्टैफनस पवित्र आत्मा से भरकर परमस्वर्ग की ओर देखने लगे और उन्होंने परमात्मा का तेज, तथा प्रभु येशु को परमात्मा की दाईं ओर खड़े हुए देखा। 56वह बोल उठा, “देखो, मैं परमस्वर्ग को खुला हुआ और तेजस्वी मानव-पुत्र को परमात्मा की दाईं ओर खड़े देख रहा हूँ।”
57यह सुनकर लोग ऊँची आवाज़ में चिल्लाए और अपने कानों पर हाथ रख एक साथ स्टैफनस पर टूट पड़े। 58तब वे उसको शहर के बाहर निकालकर जान से मारने के लिए उस पर पथराव करने लगे। गवाहों ने अपने कुर्ते उतारकर#7:58कुर्ते उतारकर - उन्होंने कुर्ते उतार दिए ताकि पत्थर फेंकने में कुर्ते की आस्तीनें रूकावट न बनें शाऊल नामक युवक के पैरों के पास रख दिए थे।
59जब लोग स्टैफनस पर पथराव कर रहे थे, स्टैफनस ने इस प्रकार प्रार्थना की, “प्रभु येशु, मेरी आत्मा स्वीकार कीजिए।” 60तब स्टैफनस ने घुटने टेककर ऊँची आवाज़ से कहा, “प्रभु, इनसे इस पाप का हिसाब न लेना।” और यह कहने के बाद वह मृत्यु की नींद में सो गया।
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शिष्य स्टैफनस का अपने बचाव में भाषण
1महापुरोहित ने पूछा, “क्या ये आरोप सच हैं?”
2स्टैफनस ने कहा, “गुरुवर और भाइयो, सुनिए! हमारे कुलपिता अब्राहम हारान शहर में निवास करने से पहले मेसोपोतामिया क्षेत्र में थे। तेजस्वी परमात्मा ने उन्हें दर्शन दिया 3और उनसे यह कहा, ‘तुम अपने देश और कुटुम्ब से निकल जाओ और उस देश में चले जाओ जो मैं तुम्हें दिखाऊँगा।’#उत्पत्ति 12:1 4तब अब्राहम खसदी देश से निकलकर हारान में जा बसे।
“उनके पिता की मृत्यु के बाद परमात्मा उन्हें इस भूमि पर ले आए जहाँ तुम अब रहते हो। 5यहाँ परमात्मा ने उनको भूमि पर कोई अधिकार नहीं दिया, यहाँ तक कि पैर रखने को स्थान भी न दिया, यद्यपि उस समय कुलपिता अब्राहम के कोई पुत्र न था तो भी परमात्मा ने उनसे यह प्रतिज्ञा की, ‘मैं यह देश तुम्हें और तुम्हारे वंश को दे दूँगा।’
6“परमात्मा ने उनसे यह भी कहा, ‘तुम्हारे वंशज पराए देश में पदेशी बनकर रहेंगे, जहाँ के लोग उन्हें गुलाम बनाएँगे और चार सौ साल तक उन पर अत्याचार करेंगे।’ 7फिर परमात्मा ने कहा, ‘जो देश उन्हें गुलाम बनाएगा उसे मैं दंड दूँगा। इसके बाद वे उस देश से बाहर निकल आएँगे और इस स्थान पर मेरी भक्ति करेंगे।’#उत्पत्ति 15:13-15
8“परमात्मा ने अब्राहम से कहा, ‘हर एक परिवार में सब बेटों का यह दिखाने के लिए चीरा-संस्कार किया जाना चाहिए कि तुमने मेरे साथ एक अनुबंध किया है।’ इसलिए जब इसहाक आठ का दिन हुआ, तो अब्राहम ने उसका चीरा-संस्कार किया। बाद में, इसहाक ने अपने बेटे याकोब का चीरा-संस्कार किया और याकोब ने अपने बारह बेटों के साथ भी ऐसा ही किया। ये बारह पुरुष हमारे पूर्वज थे।
9“तुम जानते हो कि याकोब के बड़े बेटे अपने छोटे भाई योसफ से जलन रखने लगे और उसे इजिप्ट ले जाने के लिए एक गुलाम के रूप में बेच दिया। किंतु परमात्मा उसके साथ था 10और वह सब दुख-तकलीफों से उसको बचाते रहे। परमात्मा ने इजिप्ट के राजा फेरो के मन में योसफ के प्रति कृपा भर दी और उसको बुद्धि प्रदान की। फेरो ने योसफ को इजिप्ट का शासक और अपने पूरे राजभवन का अधिकारी नियुक्त किया।
11“जब सारे इजिप्ट और कनान देशों में अकाल के कारण भयंकर संकट पड़ा, हमारे पूर्वजों को अन्न की कमी हो गयी। 12जब याकोब ने यह सुना कि इजिप्ट में अन्न की कमी नहीं है, उसने हमारे पूर्वजों को पहली बार वहाँ भेजा। 13इजिप्ट देश की अपनी दूसरी यात्रा में योसफ ने अपने भाइयों को बता दिया कि वह कौन है। फेरो को भी योसफ के कुल का पता चल गया।
14“तब योसफ ने अपने पिता याकोब और अपने सारे परिवार अर्थात् पचहत्तर लोगों को बुलवाया। 15याकोब इजिप्ट को गए। वहीं उनकी मृत्यु हुई और हमारे पूर्वजों की भी। 16उनकी अस्थियाँ शकेम नगर में लाई गईं और उस शव रखने वाली गुफा में रखीं गईं जिसे कुलपिता अब्राहम ने पैसे देकर शकेम निवासी हमोर के वंशजों से खरीद लिया था।
17“जैसे-जैसे परमात्मा ने अब्राहम से की गई अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने का समय निकट आता गया, इजिप्ट में हमारे लोगों की संख्या बहुत बढ़ गई। 18उस समय इजिप्ट में एक और राजा आया जो योसफ के बारे में कुछ नहीं जानता था। 19उसने हमारे लोगों के साथ चालाकी की और हमारे पूर्वजों पर अत्याचार कर उन्हें मजबूर किया कि वे जन्म होते ही अपने बच्चों को घर के बाहर छोड़ दिया करें, जिससे वे ज़िन्दा न बचें।
20“ऐसे कठिन समय में मोशे का जन्म हुआ परंतु परमात्मा उसका जीवन सुंदर बनाएँगे। तीन महीने तक उनका पालन-पोषण अपने पिता के घर में हुआ। 21जब उनको छुपाए रखना असंभव हो गया तो उनकी माँ ने उन्हें नदी के किनारे छोड़ दिया था, फेरो की बेटी ने उन्हें उठा लिया और अपने बेटे की तरह उनका पालन-पोषण करने लगी। 22मोशे को इजिप्ट देश की सारी शिक्षाओं को सिखाया गया, और वह अपने शब्दों और कार्यों में शक्तिशाली था।
23“जब मोशे चालीस साल के हुए तब उनके मन में आया कि वह अपने भाइयों, अर्थात् इज़राएल के लोगों को मिलें और उनका हाल चाल जाने। 24एक दिन मोशे ने देखा कि एक इजिप्ट निवासी उनके अपने इज़राएल देश के व्यक्ति के साथ बुरा व्यवहार कर रहा है। तो मोशे ने इजिप्ट निवासी की हत्या कर दी और उस व्यक्ति की रक्षा की, और इस प्रकार अपने इज़राएल देश के भाई का बदला लिया। 25मोशे का विचार था, ‘मेरे भाई, अर्थात् इज़राएल के लोग समझ जाएँगे कि परमात्मा मेरे हाथों उनको मुक्ति कराएँगे।’ परंतु इज़राएल के लोग यह बात न समझे।
26“अगले दिन इज़राएल के दो लोग आपस में लड़ रहे थे। मोशे ने उन्हें देखा और उनके पास जाकर मेल-मिलाप करने के लिए समझाया। उन्होंने कहा, ‘सज्जनो, तुम भाई-भाई हो। तो लड़ाई क्यों करते हो?’
27“इस पर, जिस व्यक्ति ने लड़ाई की शुरुआत की थी, मोशे को धक्का देते हुए कहा, ‘तुम्हें किसने हमारे ऊपर शासक और जज नियुक्त किया है? 28जिस तरह कल तुमने उस इजिप्ट देश के आदमी को मार डाला, क्या उसी तरह मुझे भी मार डालना चाहते हो?’#निर्गमन 2:14 29यह बात सुनकर मोशे वहाँ से भाग खड़े हुए और मिद्यान देश में परदेशी के रूप में बस गए। वहाँ उनके दो पुत्र हुए।
30“जब चालीस साल बीत गए तब सीनय पहाड़ के सुनसान बंजर जगह में, जलती हुई झाड़ी की ज्वाला में, परमात्मा के एक स्वर्गदूत ने मोशे को दर्शन दिया। 31यह दर्शन पाकर मोशे हैरान हो गए। जब वह देखने के लिए जलती झाड़ी के नज़दीक गए तब उन्हें प्रभु परमात्मा की आवाज़ सुनाई दी, 32‘मैं वह परमात्मा हूँ जिसकी भक्ति तुम्हारे पूर्वजों अब्राहम, इसहाक और याकोब ने की थी।’#निर्गमन 3:6,15 यह सुनकर मोशे काँप उठे और वह उस ओर देखने की हिम्मत न कर सके।
33“प्रभु ने उनसे कहा, ‘अपने पैरों से जूतियाँ उतार दो, क्योंकि जिस जगह पर तुम खड़े हो, वह पवित्र है। 34मैंने इजिप्ट देश में अपनी प्रजा पर अन्याय होते देखा है। मैंने उनकी दुहाई सुनी है और मैं उन्हें गुलामी से मुक्त करने के लिए उतरा हूँ। अब तुम तैयार हो जाओ, मैं तुम्हें इजिप्ट देश भेजूँगा।’#निर्गमन 3:5; 7; 8; 10
35“परमात्मा ने उसी मोशे को दुबारा भेजा जिसे लोगों ने पहले यह कहते हुए ठुकरा दिया था, ‘किसने तुम्हें हम पर शासक और जज नियुक्त किया है?’ परमात्मा के स्वर्गदूत ने जलती हुई झाड़ी से मोशे से बातचीत की थी। परमात्मा ने अपने उसी स्वर्गदूत द्वारा मोशे की मदद की कि वह लोगों को छुड़ाएँ और शासन करें।
36“वह इजिप्ट देश में, लाल सागर के तट पर और चालीस साल तक सुनसान बंजर जगह में अद्भुत काम और परमात्मा की शक्ति के चिन्ह दिखाते हुए इज़राएल के लोगों को निकाल लाए।
37“यह वही मोशे हैं जिन्होंने इज़राएल के लोगों से कहा था, ‘परमात्मा तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिए एक परमात्मा के प्रवक्ता नियुक्त करेंगे जैसे उन्होंने मुझे नियुक्त किया है।’#उपदेश 18:15 38यह वही परमात्मा के प्रवक्ता मोशे हैं जो सुनसान बंजर जगह में हमारे पूर्वजों के समूह के साथ थे जब स्वर्गदूत ने सीनय पहाड़ पर उनसे बात की थी। उसी स्थान पर मोशे को परमात्मा के जीवन-दायक संदेश प्राप्त हुए थे कि वह उन संदेशों को हमें प्रदान करें।
39“परंतु हमारे पूर्वज परमात्मा के प्रवक्ता मोशे की बात नहीं सुनना चाहते थे, इसलिए उनको अस्वीकार कर दिया और अपना मन फिर से इजिप्ट की ओर लगाया।
40“वे मोशे के भाई हारोन से बोले, ‘हमारे लिए ऐसे देवता की मूर्ति बनाओ जो हमारा मार्गदर्शन करे, क्योंकि उन मोशे का जो हमें इजिप्ट देश से निकाल कर लाए थे, न जाने क्या हुआ।’#निर्गमन 32:1,23 41तब इज़राएल के लोगों ने बछड़े की एक मूर्ति बनाई और उसके आगे बलि चढ़ाई। वे अपने हाथों से बनाई गई मूर्ति के लिए खुशियाँ मनाने लगे।
42“इस पर परमात्मा ने उनसे अपना मुँह मोड़ लिया और उन्हें आकाश के सूरज, चाँद और सितारों को पूजने को छोड़ दिया, जैसा कि परमात्मा के प्रवक्ताओं की पुस्तक में लिखा है,
‘हे इज़राएल वंश,
क्या तुमने सुनसान बंजर जगह में
चालीस साल तक मुझे पशु-बलि चढ़ाई?
43नहीं! तुम लोग तो मोलोख देवता#7:43 मोलोख देवता - यह शुक्र ग्रह था, एक कनानी देवता जिसे लोग आकाश और सूर्य देवता के रूप में पूजते थे। की वेदी को
और रेफान देवता#7:43 रेफान देवता - शनि ग्रह को संदर्भित करता है जिसे इजिप्त के लोगों द्वारा देवता के रूप में पूजा जाता था। के तारे को
अर्थात् उन मूर्तियों को जो तुमने पूजने के लिए बनाई थीं,
अपने साथ लेकर फिरते रहे।
मैं तुमको बाबीलोन देश के उस पार बसाऊँगा।’#आमोस 5:25-27
44“वह तंबू-मंदिर#7:44 वह तंबू-मंदिर - या “गवाह का तंबू” जो दर्शाता है कि परमात्मा उनके साथ है। जो परमात्मा की उपस्थिति को दर्शाता था सुनसान बंजर जगह में हमारे पूर्वजों के साथ था। यह तंबू-मंदिर उस आदेश के अनुसार बना था जो परमात्मा ने मोशे को दिया था, और जिसका नमूना स्वयं मोशे देख चुके थे। 45हमारे पूर्वज इस तंबू-मंदिर को यहोशु के नेतृत्व में अपने साथ उस भूमि पर ले आए, जिसे उन्होंने अपने अधिकार में ले लिया था और जहाँ से परमात्मा ने हमारे पूर्वजों के सामने से देशों को निकाल दिया था और यह तंबू-मंदिर वहाँ राजा दाविद के समय तक रहा।
46“राजा दाविद ने परमात्मा को प्रसन्न किया और परमात्मा से पूछा कि क्या वह इज़राएल के लोगों के लिए उनका एक मंदिर बना सकता है। 47पर राजा शलोमो द्वारा ही परमात्मा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया गया।
48“सच तो यह है कि परमेश्वर मनुष्य के हाथों बनाए गए मंदिरों में नहीं रहते, जैसा कि उनके प्रवक्ता यशायाह ने लिखा है कि परमात्मा कहते हैं,#7:48 यशायाह ने लिखा है कि परमात्मा कहते हैं - या, “यशायाह कहते हैं” लेकिन पूर्ण अर्थ वास्तव में है, “यशायाह ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि परमात्मा कहते हैं”
49‘परमस्वर्ग मेरा सिंहासन है
और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी।
तुम मेरे लिए कैसा मंदिर बनाओगे?
क्या मुझे आराम करने की जगह की ज़रूरत है?
50क्या यह सब मैंने अपने हाथ से नहीं बनाया है?’#यशायाह 66:1-2
51“कठोर मनवालो,#7:51कठोर मनवालो - या “मन और कान के चीरा-संस्कार रहित लोग” जिसका अर्थ “कठोर मनवाले वे लोग जो यहूदी समाज से नहीं हैं।” कान से बहरे और ढीठ लोगो! तुम हमेशा पवित्र आत्मा का विरोध करते हो जैसे तुम्हारे पूर्वज करते थे। 52क्या तुम्हारे पूर्वजों ने किसी परमात्मा के प्रवक्ता को नहीं सताया? उन्होंने धर्मी मुक्तिदाता येशु के आने का संदेश बताने वालों की हत्या की थी, और अब तुमने उन ही से धोखा किया और उनकी हत्या के भागी बने। 53तुम्हें स्वर्गदूतों द्वारा मोशे के नियम और शिक्षा प्राप्त हुए, पर उनका तुमने पालन नहीं किया।”
शिष्य स्टैफनस की हत्या
54यह बात सुनकर यहूदी अगुवे भड़क उठे और स्टैफनस पर दाँत पीसने लगे। 55स्टैफनस पवित्र आत्मा से भरकर परमस्वर्ग की ओर देखने लगे और उन्होंने परमात्मा का तेज, तथा प्रभु येशु को परमात्मा की दाईं ओर खड़े हुए देखा। 56वह बोल उठा, “देखो, मैं परमस्वर्ग को खुला हुआ और तेजस्वी मानव-पुत्र को परमात्मा की दाईं ओर खड़े देख रहा हूँ।”
57यह सुनकर लोग ऊँची आवाज़ में चिल्लाए और अपने कानों पर हाथ रख एक साथ स्टैफनस पर टूट पड़े। 58तब वे उसको शहर के बाहर निकालकर जान से मारने के लिए उस पर पथराव करने लगे। गवाहों ने अपने कुर्ते उतारकर#7:58कुर्ते उतारकर - उन्होंने कुर्ते उतार दिए ताकि पत्थर फेंकने में कुर्ते की आस्तीनें रूकावट न बनें शाऊल नामक युवक के पैरों के पास रख दिए थे।
59जब लोग स्टैफनस पर पथराव कर रहे थे, स्टैफनस ने इस प्रकार प्रार्थना की, “प्रभु येशु, मेरी आत्मा स्वीकार कीजिए।” 60तब स्टैफनस ने घुटने टेककर ऊँची आवाज़ से कहा, “प्रभु, इनसे इस पाप का हिसाब न लेना।” और यह कहने के बाद वह मृत्यु की नींद में सो गया।
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