रोमी 9
9
इजरायलके लग पावलके भित्री दुःख
1-3आब हम्रिहिन्हे कुछु चिज फेन परमेश्वरके प्रेमसे अल्गे कराई नै सेकी कलेसे, हे इजरायल देशके मनै, मोरिक यहूदी भैयन परमेश्वरसे अलग काकरे बताँ? महिन्हे ओइन्के लग बहुत दुःख लागता, और हरदम मोरिक मनमे ओइन्के लग दुःख महसुस हुइत। वास्तवमे मै अपन उप्पर अप्निहीँ आरोप लगाई सेक्थुँ, और अपन मनैनके मुक्तिक लग मै ख्रीष्टसे अलग हुई सेक्थुँ, और यकर लग मै तयार बतुँ। मै ख्रीष्टहे साँखी मानके जात्तिक कहतुँ। पवित्र आत्मा और मोरिक सोँच फेन गवाही देहतताँ कि यी सक्कु बात सच्चा हो। 4ओइने फेन मोरिक हस इजरायल देशके मनै हुइँत, और ओइन्हे फेन अपने लरका बनाइक लग परमेश्वर रोजल बतिन। और ओइन्हे लर्कनके भेटाई परना अधिकार मिलल बतिन। ओइन्हे मोशक नियम कानुन देगिल बतिन। ओइने सच्चा तरिकासे परमेश्वरके आराधना करथाँ, और महिमा और वाचा फेन ओइनेहेन्के हुइतिन। 5जेने येशू ख्रीष्टके पुर्खा रहिँत, ओइने यनके फेन पुर्खा हुइँत। सक्कु चिजमे राज करुइया परमेश्वरहे हरदम प्रशंसा हुइती रहे। आमेन! (यकर मतलब हुइत, अस्तेहेँ होए।)
इजरायलके मनै परमेश्वरहे अस्वीकार कर्लक और हुँकार उद्देश्य
6पर मै असिके नै कहथुइतुँ कि परमेश्वर अपन वाचा पूरा करनामे असफल हुइल बताँ। काकरेकी इजरायलके सक्कु वंश जात्तिकमे परमेश्वरके मनै नै हुइँत। 7अब्राहामके सक्कु वंशहे परमेश्वरके लरका नै कहे सेकजाइत। काकरेकी परमेश्वर अब्राहामहे कले बताँ, “जेने इसहाकके वंशमे जलम लेथाँ, ओइने किल तोरिक वंश मानजिहीँ।”
8जोन वंश प्रकृतिक अनुसार जलम लेथाँ, ओइने परमेश्वरके सन्तान नै हुइँत। पर वाचक सन्तान किल अब्राहामके सन्तान मानजिथाँ। 9काकरेकी वाचक वचन यी हो, “अइना साल मै यहे समयमे दोबारा अइम, और तब सारा एकथो छावा लरका पाई।”
10और यहे किल नै हो, पर रिबेकक जुइकाहा लर्कनके एक्केथो बाबा रहिन, जे हमार पुर्खा इसहाक हो। 11-12और जुइकाहा लरका जल्मनासे आघे, और ओइने कौनो मजा या खराब काम करनासे पैलेहेँ परमेश्वर रिबेकाहे कहिदेले रहिँत कि ओकर बरका छावा अपन छोट्का भैयक सेवा करी। तबेकमारे परमेश्वरके रोजाई हुँकार बोलावतमे आधारित रहिन, ना कि ओइन्के करल कुछु काममे। 13यी ठिक ओस्तेहेँके हो जसिके पवित्र शास्त्रमे लिखल बा, “मै याकूबहे प्रेम कर्नु, पर एसावहे अस्वीकार कर्नु।”
इजरायलके मनै परमेश्वरहे अस्वीकार कर्लक और हुँकार न्याय
14आब हम्रे का कहि ते? का परमेश्वर जिही चहथाँ उहिहे चुन्थाँ ते अन्याय हुइत? नै हुइत! बिरकुल नै हुइत! 15काकरेकी परमेश्वर मोशाहे कथाँ, “जिहिहे मै दया करना चाहम, उहिहे मै दया करम, और जिहिहे मै सोगाई चाहम, उहिएहे मै सोगैम।” 16परमेश्वरके रोजाई यी बातमे निर्भर नै रथिन कि मनै का चहथाँ या का करना कोशिस करथाँ। तबेकमारे परमेश्वर वहे मनैयाहे चुन्थाँ, जेकरमे ऊ दया देखाई चहथाँ।
17काकरेकी पवित्र शास्त्रमे परमेश्वर फारोहे#9:17 फारो फारो कना कौनो नाउँ नै हो पर मिश्र देशके रज्वक उपाधी हो, जसिके महाराजा रोमीनके रज्वक उपाधी रहे। कलाँ, “मै तुहिहे रज्वा बनैले बतुँ, ताकि मै तोरिकमे अपन शक्ति देखाई सेकुँ, और मोरिक नाउँ संसारके सक्कु मनैनमे प्रचार हुई सेके।” 18असिके परमेश्वर जिहिहे चहथाँ उहिहे दया करथाँ; और जिहिहे चहथाँ उहिहे जिद्दिह्या बनादेथाँ।
19तब् कौनो मनै महिन्हे कहे सेक्थाँ: यदि असिन हो कलेसे ते परमेश्वर कसिके कहे सेक्हीँ कि हम्रे गलत बती? काकरेकी ऊ ज्या करे चहथाँ, उ चिज करक लग हुँकिन्हे केऊ फेन रोके नै सेकत। 20अरे भैयो! तुहुरे के हुइतो जे परमेश्वरसे बहस करतो? का बनागिलक चिज अपनहे बनुइयाहे कहत, “तैँ महिन्हे असिन काकरे बनैले?” 21का कुम्हारहे माटिमे कौनो अधिकार नै हुइतिस, कि माटिक एक्केथो धेल्किमेसे ऊ एकथो भाँरा महत्त्वपूर्ण उद्देश्यक लग और औरे भाँरा सामान्य उद्देश्यक लग बनाए?
22परमेश्वरहे यी अधिकार बतिन कि जोन मनैनहे ऊ बनैले बताँ, ओइन्हे ऊ अपन इच्छा अनुसार ज्या चहथाँ उ करे सेक्थाँ। परमेश्वर ओइन्केमे अपन रिस देखाई चाहतिहिँत, और हरेक जहनके विरोधमे अपन शक्ति देखाई चाहतिहिँत, जेने नाश हुइना हकदार रहिँत। पर यकर बद्ला ऊ ओइन्के करल कामहे धैर्यतासे सहलाँ। 23ऊ असिके यहे कारणसे करलाँ, काकरेकी परमेश्वर ख्रीष्टके मुलक बलिदानसे देखाई चाहतिहिँत कि ऊ कतरा महान बताँ। जब परमेश्वर उ मनैनहे दया देखैलाँ, जेनहे ऊ अपन महिमामे भागीदार हुइक लग रोजल बताँ। 24यकर मतलब यहे हो कि चाहे यहूदी रहिँत या गैर-यहूदी, हम्रे वहे मनै हुइती जेनहे परमेश्वर रोजल बताँ।
25गैर-यहूदिनके बारेमे होशे अगमवक्तक किताबमे परमेश्वर असिके कले बताँ,
“जेने मोरिक जनता नै रहिँत, ओइन्हे मै अपन जनता बनैबुँ,
और जिहिहे मै प्रेम नै कर्नु, उहिहे मै अपन प्रेमी कहम।
26और जोन ठाउँमे परमेश्वर कलाँ कि तुहुरे मोरिक मनै नै हुइतो, वहे ठाउँमे जित्ती परमेश्वर ओइन्हे अपन सन्तान कहिहीँ।”
27इजरायलके मनैनके बारेमे यशैया अगमवक्ता असिके घोषणा करत, “इजरायलके मनैनके संख्या समुन्दरके आँरितिर रहल बालुक वत्रा रलेसे फेन ओइन्मेसे थोरचे जहनहे किल मुक्ति मिल्हिन। 28काकरेकी प्रभु झत्तेहेँ एक्केचोमे सदादिनके लग पृथ्वीमे रहल सक्कु मनैनके न्याय करहीँ।” 29जसिके यशैया अगमवक्ता पहिले फेन कहल रहे,
“यदि सर्वशक्तिमान प्रभु हमार सन्तानमेसे गोड्गात मनैनहे किल बँचैताँ,
कलेसे हम्रे सदोम और गमोरा शहरके मनैनके हस बनजैती,
जेनहे परमेश्वर पूरा रुपमे नाश करदेलिन।”
इजरायलके अविश्वास
30हमार कहे खोज्लक यहे हो कि गैर-यहूदिनके अपनहे परमेश्वरके संग धर्मी बनैना कोशिस नै करतिहिँत। पर ओइन्के विश्वासके कारण ओइन्हे परमेश्वर धर्मी बनैलिन। 31पर इजरायल देशके मनै मोशक नियम कानुन पालन करके परमेश्वरके संग धर्मी हुइना कोशिस करथाँ। पर ओइने धर्मी बने नै सेक्लाँ।
32असिके काकरे हुइल? काकरेकी ओइने परमेश्वरहे विश्वास बिना कर्ले मजा काम करके किल परमेश्वरके संग धर्मी हुई खोजतिहिँत: ओइने ख्रीष्टके कारण ठेस लागके गिरहीँ। 33जसिके पवित्र शास्त्रमे परमेश्वर कले बताँ,
“हेरो, यरुशलेम शहरमे मै एकथो असिन पठरा धारतुँ,
जोन यात्रामे मनैनहे ठेस लग्हिन।
और असिन चट्टान धारतुँ, जेकर कारण मनै गिरहीँ।
और जे ओम्ने विश्वास करी, ओकर लाज नै हुइहिस।”
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Deukhuri (देउखरिया थारु) Bible by The Love Fellowship is licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 License.
रोमी 9
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इजरायलके लग पावलके भित्री दुःख
1-3आब हम्रिहिन्हे कुछु चिज फेन परमेश्वरके प्रेमसे अल्गे कराई नै सेकी कलेसे, हे इजरायल देशके मनै, मोरिक यहूदी भैयन परमेश्वरसे अलग काकरे बताँ? महिन्हे ओइन्के लग बहुत दुःख लागता, और हरदम मोरिक मनमे ओइन्के लग दुःख महसुस हुइत। वास्तवमे मै अपन उप्पर अप्निहीँ आरोप लगाई सेक्थुँ, और अपन मनैनके मुक्तिक लग मै ख्रीष्टसे अलग हुई सेक्थुँ, और यकर लग मै तयार बतुँ। मै ख्रीष्टहे साँखी मानके जात्तिक कहतुँ। पवित्र आत्मा और मोरिक सोँच फेन गवाही देहतताँ कि यी सक्कु बात सच्चा हो। 4ओइने फेन मोरिक हस इजरायल देशके मनै हुइँत, और ओइन्हे फेन अपने लरका बनाइक लग परमेश्वर रोजल बतिन। और ओइन्हे लर्कनके भेटाई परना अधिकार मिलल बतिन। ओइन्हे मोशक नियम कानुन देगिल बतिन। ओइने सच्चा तरिकासे परमेश्वरके आराधना करथाँ, और महिमा और वाचा फेन ओइनेहेन्के हुइतिन। 5जेने येशू ख्रीष्टके पुर्खा रहिँत, ओइने यनके फेन पुर्खा हुइँत। सक्कु चिजमे राज करुइया परमेश्वरहे हरदम प्रशंसा हुइती रहे। आमेन! (यकर मतलब हुइत, अस्तेहेँ होए।)
इजरायलके मनै परमेश्वरहे अस्वीकार कर्लक और हुँकार उद्देश्य
6पर मै असिके नै कहथुइतुँ कि परमेश्वर अपन वाचा पूरा करनामे असफल हुइल बताँ। काकरेकी इजरायलके सक्कु वंश जात्तिकमे परमेश्वरके मनै नै हुइँत। 7अब्राहामके सक्कु वंशहे परमेश्वरके लरका नै कहे सेकजाइत। काकरेकी परमेश्वर अब्राहामहे कले बताँ, “जेने इसहाकके वंशमे जलम लेथाँ, ओइने किल तोरिक वंश मानजिहीँ।”
8जोन वंश प्रकृतिक अनुसार जलम लेथाँ, ओइने परमेश्वरके सन्तान नै हुइँत। पर वाचक सन्तान किल अब्राहामके सन्तान मानजिथाँ। 9काकरेकी वाचक वचन यी हो, “अइना साल मै यहे समयमे दोबारा अइम, और तब सारा एकथो छावा लरका पाई।”
10और यहे किल नै हो, पर रिबेकक जुइकाहा लर्कनके एक्केथो बाबा रहिन, जे हमार पुर्खा इसहाक हो। 11-12और जुइकाहा लरका जल्मनासे आघे, और ओइने कौनो मजा या खराब काम करनासे पैलेहेँ परमेश्वर रिबेकाहे कहिदेले रहिँत कि ओकर बरका छावा अपन छोट्का भैयक सेवा करी। तबेकमारे परमेश्वरके रोजाई हुँकार बोलावतमे आधारित रहिन, ना कि ओइन्के करल कुछु काममे। 13यी ठिक ओस्तेहेँके हो जसिके पवित्र शास्त्रमे लिखल बा, “मै याकूबहे प्रेम कर्नु, पर एसावहे अस्वीकार कर्नु।”
इजरायलके मनै परमेश्वरहे अस्वीकार कर्लक और हुँकार न्याय
14आब हम्रे का कहि ते? का परमेश्वर जिही चहथाँ उहिहे चुन्थाँ ते अन्याय हुइत? नै हुइत! बिरकुल नै हुइत! 15काकरेकी परमेश्वर मोशाहे कथाँ, “जिहिहे मै दया करना चाहम, उहिहे मै दया करम, और जिहिहे मै सोगाई चाहम, उहिएहे मै सोगैम।” 16परमेश्वरके रोजाई यी बातमे निर्भर नै रथिन कि मनै का चहथाँ या का करना कोशिस करथाँ। तबेकमारे परमेश्वर वहे मनैयाहे चुन्थाँ, जेकरमे ऊ दया देखाई चहथाँ।
17काकरेकी पवित्र शास्त्रमे परमेश्वर फारोहे#9:17 फारो फारो कना कौनो नाउँ नै हो पर मिश्र देशके रज्वक उपाधी हो, जसिके महाराजा रोमीनके रज्वक उपाधी रहे। कलाँ, “मै तुहिहे रज्वा बनैले बतुँ, ताकि मै तोरिकमे अपन शक्ति देखाई सेकुँ, और मोरिक नाउँ संसारके सक्कु मनैनमे प्रचार हुई सेके।” 18असिके परमेश्वर जिहिहे चहथाँ उहिहे दया करथाँ; और जिहिहे चहथाँ उहिहे जिद्दिह्या बनादेथाँ।
19तब् कौनो मनै महिन्हे कहे सेक्थाँ: यदि असिन हो कलेसे ते परमेश्वर कसिके कहे सेक्हीँ कि हम्रे गलत बती? काकरेकी ऊ ज्या करे चहथाँ, उ चिज करक लग हुँकिन्हे केऊ फेन रोके नै सेकत। 20अरे भैयो! तुहुरे के हुइतो जे परमेश्वरसे बहस करतो? का बनागिलक चिज अपनहे बनुइयाहे कहत, “तैँ महिन्हे असिन काकरे बनैले?” 21का कुम्हारहे माटिमे कौनो अधिकार नै हुइतिस, कि माटिक एक्केथो धेल्किमेसे ऊ एकथो भाँरा महत्त्वपूर्ण उद्देश्यक लग और औरे भाँरा सामान्य उद्देश्यक लग बनाए?
22परमेश्वरहे यी अधिकार बतिन कि जोन मनैनहे ऊ बनैले बताँ, ओइन्हे ऊ अपन इच्छा अनुसार ज्या चहथाँ उ करे सेक्थाँ। परमेश्वर ओइन्केमे अपन रिस देखाई चाहतिहिँत, और हरेक जहनके विरोधमे अपन शक्ति देखाई चाहतिहिँत, जेने नाश हुइना हकदार रहिँत। पर यकर बद्ला ऊ ओइन्के करल कामहे धैर्यतासे सहलाँ। 23ऊ असिके यहे कारणसे करलाँ, काकरेकी परमेश्वर ख्रीष्टके मुलक बलिदानसे देखाई चाहतिहिँत कि ऊ कतरा महान बताँ। जब परमेश्वर उ मनैनहे दया देखैलाँ, जेनहे ऊ अपन महिमामे भागीदार हुइक लग रोजल बताँ। 24यकर मतलब यहे हो कि चाहे यहूदी रहिँत या गैर-यहूदी, हम्रे वहे मनै हुइती जेनहे परमेश्वर रोजल बताँ।
25गैर-यहूदिनके बारेमे होशे अगमवक्तक किताबमे परमेश्वर असिके कले बताँ,
“जेने मोरिक जनता नै रहिँत, ओइन्हे मै अपन जनता बनैबुँ,
और जिहिहे मै प्रेम नै कर्नु, उहिहे मै अपन प्रेमी कहम।
26और जोन ठाउँमे परमेश्वर कलाँ कि तुहुरे मोरिक मनै नै हुइतो, वहे ठाउँमे जित्ती परमेश्वर ओइन्हे अपन सन्तान कहिहीँ।”
27इजरायलके मनैनके बारेमे यशैया अगमवक्ता असिके घोषणा करत, “इजरायलके मनैनके संख्या समुन्दरके आँरितिर रहल बालुक वत्रा रलेसे फेन ओइन्मेसे थोरचे जहनहे किल मुक्ति मिल्हिन। 28काकरेकी प्रभु झत्तेहेँ एक्केचोमे सदादिनके लग पृथ्वीमे रहल सक्कु मनैनके न्याय करहीँ।” 29जसिके यशैया अगमवक्ता पहिले फेन कहल रहे,
“यदि सर्वशक्तिमान प्रभु हमार सन्तानमेसे गोड्गात मनैनहे किल बँचैताँ,
कलेसे हम्रे सदोम और गमोरा शहरके मनैनके हस बनजैती,
जेनहे परमेश्वर पूरा रुपमे नाश करदेलिन।”
इजरायलके अविश्वास
30हमार कहे खोज्लक यहे हो कि गैर-यहूदिनके अपनहे परमेश्वरके संग धर्मी बनैना कोशिस नै करतिहिँत। पर ओइन्के विश्वासके कारण ओइन्हे परमेश्वर धर्मी बनैलिन। 31पर इजरायल देशके मनै मोशक नियम कानुन पालन करके परमेश्वरके संग धर्मी हुइना कोशिस करथाँ। पर ओइने धर्मी बने नै सेक्लाँ।
32असिके काकरे हुइल? काकरेकी ओइने परमेश्वरहे विश्वास बिना कर्ले मजा काम करके किल परमेश्वरके संग धर्मी हुई खोजतिहिँत: ओइने ख्रीष्टके कारण ठेस लागके गिरहीँ। 33जसिके पवित्र शास्त्रमे परमेश्वर कले बताँ,
“हेरो, यरुशलेम शहरमे मै एकथो असिन पठरा धारतुँ,
जोन यात्रामे मनैनहे ठेस लग्हिन।
और असिन चट्टान धारतुँ, जेकर कारण मनै गिरहीँ।
और जे ओम्ने विश्वास करी, ओकर लाज नै हुइहिस।”
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