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रोमियन 8:38-39

रोमियन 8:38-39 BAG

काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।

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रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।रोमियन 8:38-39-38-39 - काहेकि हम पंचे इआ निकहा से जान लिहेन हय, कि परमातिमा के प्रेम से हमहीं पंचन काहीं कोऊ अलग नहीं कइ सकय, जउन हमरे प्रभू मसीह यीसु के ऊपर बिसुआस किहे से हमहीं पंचन काहीं मिला हय। एसे, चाह हम पंचे जिअत रही, चाह मर जई, अउर एखे अलाबव हमहीं पंचन काहीं उनखे प्रेम से कोऊ अलग नहीं कइ सकय। चाह ऊँ स्वरगदूत होंय, चाह ऊँ सासन करँइ बाले प्रधान होंय, अउर चाह इआ समय के कउनव चीजँय होंय, चाह भबिस्य के कउनव चीजँय होंय, चाह उआ कउनव आत्मिक सक्ती होय, अउर चाह इआ धरती के ऊपर के कउनव चीज होय, चाह धरती के नीचे के कउनव चीज होय, अउर चाह परमातिमा के बनाई कउनव चीज काहे न होय।

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