खास चेलन 28:26-27
खास चेलन 28:26-27 BAG
‘कि सुनत त रइहा, पय समझे न पइहा’, अउर ‘देखत त रइहा, पय जाने न पइहा।’ काहेकि ईं मनइन के मन मोट, अउर उनखर कान बहिर होइगे हँय, अउर ऊँ पंचे अपने आँखिन काहीं मूँद लिहिन हीं, अइसा न होय, कि ऊँ पंचे कबहूँ आँखिन से देखँय, अउर कानन से सुनँय, अउर मन से समझँय, अउर हमरे कइती फिरँय, अउर हम उनहीं पंचन काहीं चंगा करी।





