सैणीं गल्ला 20
20
अक्लीए बोल हआ सुन्नैं का बी भलै
1नशिल्लै दाखे रसा झुटी हआ झ़गल़ै ई,
एता झुटा ज़ुंण भूल करा सह मणछ हआ कबुधी ई।
2राज़े रोश्शे डअर हआ सिहे क्रुंगा ज़ेही,
ज़ुंण तेऊ लै रोश्शै ठैऊआ, सह शादा आप्पू लै मौत।
3ऐडअ मणछ ई निखल़ा झ़गल़ै लै आजू,
समझ़कार मणछ रहा एही गल्ला का दूर।
4ज़ैऊंकर मणछा हआ बऊंणे ऋता हल़ा लाणें ज़ैंईं लागी दी, तेता लै काढा सह ठांढै-शेल़ैओ भान्नअ,
लऊंणींए बगती निं तेखअ घअरै-घअरै टुकरै मांगी बी किछ़ै भेटदअ।
5मणछे सोठ हआ डुघै कुहै ज़ेही,
पर ज़हा सोर समझ़ हुई, सह काढा तिन्नां गल्ला बागै।
6कई मणछ फिरा आपणैं बारै इहअ खोज़दै कि तिंयां आसा शुचै-पाक्कै,
पर इहअ थोघ कुंण सका लाई कि कुंण आसा शुचअ-पाक्कअ?
7तिंयां लान्हैं आसा भागा आल़ै,
ज़सरै ईज-बाब मानदार आसा अर ज़ुंण भलअ करा।
8राज़अ ज़ेभै नसाफ करदअ राज़गाद्दी दी बेठा,
सह हेरा भाल़ी अर तेऊ का जाआ बूराईओ थोघ लागी।
9इहअ निं कोहै बोली सकदअ,
“हुंह सोठा भलअ ई अर हुंह आसा शुचअ अर पापा का छ़ुटी गअ द!”
10बाट अर तराकल़ी करै हेर-फेर करनी,
इना दूई गल्ला का करा बिधाता नफरत।
11लान्हैं भलै आसा कि बूरै,
भलै-बूरै बछ़ैणियां तिन्नें कामां का।
12बिधाता आसा हाम्हां शुणना लै कान अर
भाल़णा लै आछी दैनी दी।
13ज़ुंण निंजा लै खास्सअ झ़ूरा, तेऊ पल़ा दाल़ज,
ज़ुंण कामां दी रहा लागी, तेऊ निं खाणां लै निऊल़ हंदी।
14मोलै लंदी बारी बोला गाहक सदा कि एतो मोल गअ धख खास्सअ,
पर ज़ांऊं च़ीज़ लई डेऊई गअ, तेखअ करा तेते बड़ैई।
15अक्ली आल़ै बोल हआ किम्मती रत्न,
सुन्नैं-च़ंदी का बी खास्सै किम्मती।
16ज़ुंण मणछ पाखलै मणछे ज़मानती लआ,
तेऊ लागा किज़ै नां किज़ै च़ीज़ बांधै ज़रूर लणी।
17छ़ल़-कपट करी खटी दी रोटी ज़ाण्हिंआं मिठी,
पर बादा हआ तिंयां खाखा भर्हुई दी शाकरी ज़ेही।
18ज़ै तम्हैं राम्बल़ी सलाह लए, तै हणैं तम्हैं सफल,
जोग करी अर बच़ार किऐ बाझ़ी निं जुधा लै डेऊणअ।
19फुआह निं गुप्त रही सकदी,
तैही रहणअ गप्पा मारनै आल़ै मणछा का दूर ई।
20ज़ुंण आपणैं ईजा-बाबा लै फिटक दैआ,
तिन्नों लाटू जाआ छ़ेक्कै हिठी, संघा हआ तिन्नां लै बी न्हैरअ।
21ज़ुंण ज़ैदात छ़ेक्कै जाआ भेटी,
तेथ निं खिरी किछ़ै बर्गत हंदी।
22बूराईओ बदल़अ निं आप्पै लणअ,
बिधाता दी लागा भरोस्सअ डाहणअ, भाल़ा आप्पै।
23बाट अर तराकल़ी करै हेर-फेर करनी,
इना दूई गल्ला का करा बिधाता नफरत।
24बिधाता खोज़ा हाम्हां का आप्पै बात,
तै किहअ करै सका मणछा का थोघ लागी कि केस्सी डेऊणअ?
25बिधाता लै मानत मनी निं तम्हैं मणछ आप्पू लै फाही पाई,
तेता का आजी लणअ राम्बल़ै करै बच़ार करी।
26ज़हा राज़ै अक्ल हुई, सह भाल़ा राम्बल़ै करै कि कुंण आसा बूरअ,
तेखअ निं सह सज़ा दैणा लै झींण करदअ।
27बिधाता आसा हाम्हां मणछा लै मन्न अर सोर दैनी दी,
तेता करै जाआ म्हारी गुप्त गल्लो थोघ लागी।
28ज़ुंण राज़अ मानदारी अर सत्ता दी रही राज़ करा,
तेऊओ राज़ रहा सदा बणी।
29खारकै मणछे बड़ैई हआ तेऊए बला का,
पर प्रोढै मणछे शोभा हआ तेऊए पल़ू करै।
30ज़खम पल़ी हआ बूराई दूर
अर मार खाई हआ दिल साफ।
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1नशिल्लै दाखे रसा झुटी हआ झ़गल़ै ई,
एता झुटा ज़ुंण भूल करा सह मणछ हआ कबुधी ई।
2राज़े रोश्शे डअर हआ सिहे क्रुंगा ज़ेही,
ज़ुंण तेऊ लै रोश्शै ठैऊआ, सह शादा आप्पू लै मौत।
3ऐडअ मणछ ई निखल़ा झ़गल़ै लै आजू,
समझ़कार मणछ रहा एही गल्ला का दूर।
4ज़ैऊंकर मणछा हआ बऊंणे ऋता हल़ा लाणें ज़ैंईं लागी दी, तेता लै काढा सह ठांढै-शेल़ैओ भान्नअ,
लऊंणींए बगती निं तेखअ घअरै-घअरै टुकरै मांगी बी किछ़ै भेटदअ।
5मणछे सोठ हआ डुघै कुहै ज़ेही,
पर ज़हा सोर समझ़ हुई, सह काढा तिन्नां गल्ला बागै।
6कई मणछ फिरा आपणैं बारै इहअ खोज़दै कि तिंयां आसा शुचै-पाक्कै,
पर इहअ थोघ कुंण सका लाई कि कुंण आसा शुचअ-पाक्कअ?
7तिंयां लान्हैं आसा भागा आल़ै,
ज़सरै ईज-बाब मानदार आसा अर ज़ुंण भलअ करा।
8राज़अ ज़ेभै नसाफ करदअ राज़गाद्दी दी बेठा,
सह हेरा भाल़ी अर तेऊ का जाआ बूराईओ थोघ लागी।
9इहअ निं कोहै बोली सकदअ,
“हुंह सोठा भलअ ई अर हुंह आसा शुचअ अर पापा का छ़ुटी गअ द!”
10बाट अर तराकल़ी करै हेर-फेर करनी,
इना दूई गल्ला का करा बिधाता नफरत।
11लान्हैं भलै आसा कि बूरै,
भलै-बूरै बछ़ैणियां तिन्नें कामां का।
12बिधाता आसा हाम्हां शुणना लै कान अर
भाल़णा लै आछी दैनी दी।
13ज़ुंण निंजा लै खास्सअ झ़ूरा, तेऊ पल़ा दाल़ज,
ज़ुंण कामां दी रहा लागी, तेऊ निं खाणां लै निऊल़ हंदी।
14मोलै लंदी बारी बोला गाहक सदा कि एतो मोल गअ धख खास्सअ,
पर ज़ांऊं च़ीज़ लई डेऊई गअ, तेखअ करा तेते बड़ैई।
15अक्ली आल़ै बोल हआ किम्मती रत्न,
सुन्नैं-च़ंदी का बी खास्सै किम्मती।
16ज़ुंण मणछ पाखलै मणछे ज़मानती लआ,
तेऊ लागा किज़ै नां किज़ै च़ीज़ बांधै ज़रूर लणी।
17छ़ल़-कपट करी खटी दी रोटी ज़ाण्हिंआं मिठी,
पर बादा हआ तिंयां खाखा भर्हुई दी शाकरी ज़ेही।
18ज़ै तम्हैं राम्बल़ी सलाह लए, तै हणैं तम्हैं सफल,
जोग करी अर बच़ार किऐ बाझ़ी निं जुधा लै डेऊणअ।
19फुआह निं गुप्त रही सकदी,
तैही रहणअ गप्पा मारनै आल़ै मणछा का दूर ई।
20ज़ुंण आपणैं ईजा-बाबा लै फिटक दैआ,
तिन्नों लाटू जाआ छ़ेक्कै हिठी, संघा हआ तिन्नां लै बी न्हैरअ।
21ज़ुंण ज़ैदात छ़ेक्कै जाआ भेटी,
तेथ निं खिरी किछ़ै बर्गत हंदी।
22बूराईओ बदल़अ निं आप्पै लणअ,
बिधाता दी लागा भरोस्सअ डाहणअ, भाल़ा आप्पै।
23बाट अर तराकल़ी करै हेर-फेर करनी,
इना दूई गल्ला का करा बिधाता नफरत।
24बिधाता खोज़ा हाम्हां का आप्पै बात,
तै किहअ करै सका मणछा का थोघ लागी कि केस्सी डेऊणअ?
25बिधाता लै मानत मनी निं तम्हैं मणछ आप्पू लै फाही पाई,
तेता का आजी लणअ राम्बल़ै करै बच़ार करी।
26ज़हा राज़ै अक्ल हुई, सह भाल़ा राम्बल़ै करै कि कुंण आसा बूरअ,
तेखअ निं सह सज़ा दैणा लै झींण करदअ।
27बिधाता आसा हाम्हां मणछा लै मन्न अर सोर दैनी दी,
तेता करै जाआ म्हारी गुप्त गल्लो थोघ लागी।
28ज़ुंण राज़अ मानदारी अर सत्ता दी रही राज़ करा,
तेऊओ राज़ रहा सदा बणी।
29खारकै मणछे बड़ैई हआ तेऊए बला का,
पर प्रोढै मणछे शोभा हआ तेऊए पल़ू करै।
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