YouVersion Logo
Search Icon

लामण 1

1
एरुशलेम नगरी उपद्रभ
1एरुशलेम नगरी भाल़ केही शुन्‍नीं आसा पल़ी दी
ज़ुंण कोई धैल़ै मणछा करै भरी हआ ती!
कोई धैल़ै ती सह संसारै महान, पर ऐबै आसा सह बिधबा ज़ेही,
एकी ज़मानै ती सह सोभी नगरी मांझ़ै राज़े देई ज़ेही,
पर ऐबै आसा सह गलामी दी पल़ी दी।
2सह हआ सारी-सारी राची लेरा लांदी लागी दी,
तेसे थोथरा बाती हआ आशूए ट्रिहुंणीं लागी दी।
तेसे तै खास्सै लोभी, पर तिन्‍नां मांझ़ै निं एक बी तैहा झेठू आअ!
तेसे साथी-संघी दैनअ तैहा लै धोखअ अर हुऐ सोभ तेसे दुशमण।
3यहूदा मुल्खे परज़ा निंईं दुशमणै गलाम बणाईं दूर।
गलामा लागा बेठ खटणी अर आफ़त ज़िरनी,
ऐबै आसा तिंयां पाखलै देशा जैंदरी रहंदै लागै दै।
तिन्‍नां निं बशैघ ई आथी अर तिंयां आसा आपणैं घअरा का दूर।
तिंयां आसा नर्दैई दुशमणै गोटै दै अर
तिन्‍नां का निं तिंयां छ़ुटी सकदै!
4सियोन भबना डेऊणे बाता आसा ऐबै शोग पल़अ द,
ऐबै निं तेथ तिह-थैरा मनाऊंदअ बिधाते भबनै कोह एछदअ!
शोहरी ज़ुंण तेथ गिहा बोल्दी हआ ती, तिन्‍नां लै आसा घोर दुख पल़अ द,
अर प्रोहत आसा धकदै लागै दै!
नगरीए प्रऊल़ी आसा शुन्‍नीं पल़ी दी!
एरुशलेम नगरीए लोग आसा खास्सै दुख ज़िरदै लागै दै।
5एरुशलेम नगरीए दुशमण हुऐ सफल अर
तिंयां लागै एरुशलेम नगरी प्रैंदै राज़ करदै।
बिधाता डाही सह दुख भुगतदी लाई
किल्हैकि तैहा किऐ घोर पाप।
तेसे दुशमणै निंयैं तेसे शोहरू-शोहरी गलामी लै दूर।
6एरुशलेम नगरीए शोभा हुई ऐबै खतम,
ज़ुंण एरुशलेम नगरी राज़ करा तै, तिंयां हुऐ भुखी हरनी ज़िहै दुबल़ै
ज़हा च़रना लै किछ़ घाह निं भेटदअ!
तिंयां आसा तिन्‍नां दरल़ाऊंणै आल़ै दुशमणा आजू
मस्सा ठुर्हदै लागै दै।
7एरुशलेम नगरीए मणछ आसा इना खरी अर बरैबादीए धैल़ै
आपणीं शोभा अर धन-दौलती आद करदै लागै दै ज़ुंण तिन्‍नां का थिई।
ऐबै पल़ै तिंयां दुशमणे हाथै अर तिन्‍नें मज़त करदअ निं कोह निखल़अ,
तिन्‍नें बरैबादी भाल़ी लागै दुशमण तिन्‍नां लै हास्सदै।
8एरुशलेम नगरी घोर पाप करनैओ दोश,
तैही लागी सोभी तैहा का च़िल़्ह।
ज़ुंण तेसो अदर करा तै, तिंयां करा ऐबै तेसे बेइज़ती।
किल्हैकि तिन्‍नैं भाल़ी सह नांगी।
ऐबै आसा सह धकदी लागी दी अर
सह आसा शरमैं आपणअ मुंह च़ोरदी लागी दी।
9छ़ोता करै आसा तेसे सारै झिकल़ै छ़िटुऐ दै,
पर तैहा निं धख बी सोठअ कि तेसे हणीं एही दशा।
तेसे हुई घोर बरैबादी, तेसे निं कोह झेठ करदअ।
तेसे दुशमण ज़ितै तैहा का अर सह आसा बिधाता सेटा
लेरा लाई अरज़ करदी लागी दी कि सह तैहा लै झींण करे।
10दुशमणै लुटै तेसे खज़ानै पठी,
तैहा भाल़ै तिंयां लोग भबनै डेऊंदै आपणीं आछी,
ज़िधी बिधाता पराई ज़ातीए लोगा डेऊंणा लै नांह आसा किअ द।
11एरुशलेम नगरीए लोग आसा धकदै
अर खाणां लै रोटी लोल़ै लागै दै,
तिंयां आसा आपणीं किम्मती च़िज़ा दैई रोटी मोल लंदै लागै दै
ताकि तिंयां ज़िऊंदै बच़े!
एरुशलेम नगरी बोला, “बिधाता, मुंह बाखा भाल़!
मेरै भाल़ किहै हाल हुऐ! हुंह हुई बृथा!”
12तेस्सी बाती एछदै-डेऊंदै लै बोला सह इहअ,
तम्हैं भाल़दै निं आथी कि मुंह संघै किज़ै हुअ?
भाल़णीं दैआ कि मेरै किहै हाल हुऐ!
ज़ेही आफ़त मुल्है पल़ी, तेही निं कोही लै पल़ी!
अह खरी पाई मुल्है बिधाता अर तेऊ डाही हुंह दाह ज़िरदी लाई।
तेऊओ रोश्श आसा मुल्है आगी ज़िहअ भकअ द।
13तेऊ शोटी मुल्है उझै का बीज अर
तेता करै दझ़ै भितरा का मेरै हाडकै बी।
तेऊ डाहअ मुंह ढाकणा लै ज़ज़ाल़ छ़ैई।
तेखअ डाही तेऊ हुंह तिधी शोटी अर
हुंह आसा कबल्‍ली दाह ज़िरदी अर दुबल़ी लागी दी हंदी।
14मेरै पाप बणाऐं परमेशरै मुल्है गर्कै जूँआं ज़िहै!
तिंयां डाहै मालकै आपणैं हाथै ज़ोल़ी करै मेरै कैल़ै जोची।
मेरै मालक बिधाता मुंह दी ज़ोर-ज़ाहण ई डाहै।
तेऊ दैनी हुंह मेरै दुशमणा का सभाल़ी!
हुंह निं तिन्‍नां का जुध ज़िती सकदी।
15मेरअ मालक बिधाता लागा मेरै सोभी का बडै शूरबीरा लै बी हास्सदअ,
तेऊ छ़ाडी मेरै सोभी ज़ुआन मणछा मारदी सैना।
तेऊ पिल्‍लै यहूदा मुल्खे मेरै लोग ज़ेही कोफरी दाख पिल्‍ला।#प्रका. 14:20; 19:15
16तैही आसा हुंह लेरा लांदी लागी दी,
मेरी आछी का आसा आशूए छ़ो-छ़ंद लागै दै।
मुंह निं कुंण झेठू बी एछदअ अर नां कुंण मुल्है हैअ दैणैं आल़अ आथी!
दुशमण गऐ मुखा ज़िती अर मेरै लोगा का निं ऐबै किछ़ै बच़अ।
17मंऐं डाही आपणीं बाहा फुआरी
पर मेरी मज़त निं कोही किई!
बिधाता किअ इहअ हुकम कि याकबे आद-लुआदा
फेर बस्सै दै लोग लोल़ी तिन्‍नें दुशमण हुऐ!
एरुशलेम नगरी हुई तिन्‍नां जैंदरी छ़ोतली बेटल़ी ज़ेही।
18पर बिधाता आसा धर्मीं, मंऐं किअ तेऊ लै द्रोह!
सोभै लोग शूणां, अर मेरी दाह भाल़ा!
मेरै ज़ुआन शोहरू-शोहरी निंयैं गलामी लै।
19मंऐं लाई आपणैं सोभी साथी लै हाक्‍का,
पर तिन्‍नैं दैनअ मुल्है धोखअ!
प्रोहत अर सैणैं तै रोटी लोल़ै लागै दै कि तिंयां ज़िऊंदै बच़े,
रोटी लोल़दी रहै तिंयां नगरी दी बाता मरी।
20बिधाता, मेरी खरी भाल़! मेरी शुक्‍की आंजा बी पठी!
हुंह चुटी भितरा का पठी, किल्हैकि मंऐं किअ ताल्है द्रोह!
घअरा बागै लाऐ मेरै लोग तलबारा करै काटी-मारी
अर भितरी आसा मौत!
21लोगै शूणीं हुंह दाहै धकदी, पर झेठू निं कोह आऐ!
मेरै दुशमण आसा खुश हुऐ दै कि तंऐं पाई मुल्है आफ़त।
ऐबै कर तूह नसाफ ज़िहअ तंऐं बोलअ द आसा,
ज़ेही आफ़त तंऐं मुल्है पाई, तेही पा तिन्‍नां लै बी।
22बिधाता, ज़ीबाण, म्हारै दुशमणे पापा बी भाल़,
ज़ेही सज़ा तंऐं मुल्है दैनी, तेही दै तिन्‍नां लै बी।
मंऐं किऐ खास्सै पाप अर तेते दैनी तंऐं मुल्है सज़ा,
हुंह हआ कबल्‍ली धकदी लागी दी अर हुंह हुई भितरा का बाख दुबल़ी।

Currently Selected:

लामण 1: OSJ

Highlight

Copy

Compare

Share

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in