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आयूब 3

3
आयूब लागअ फिटक दैंदअ कि सह पैईदा ई किल्है हुअ
1खिरी लागअ आयूब तैहा धैल़ी लै फिटक दैंदअ ज़धू सह पैईदा हुअ। 2आयूबै बोलअ इहअ,
3“हे बिधाता, तैहा धैल़ी लोल़ी फिटक लागअ
ज़हा धैल़ी हुंह पैईदा हुअ,
ज़हा राची हुंह मेरी माए ओदरै आअ
तैहा राची बी लोल़ी फिटक लागअ!
4हे परमेशर, ज़धू हुंह हुअ सह धैल़ी लोल़ी ती न्हैरी हुई!
सह धैल़ी निं लोल़ी ती कधि आद डाही!
तेथ निं लोल़ी कधि प्रैश्शअ हुअ।
5तैहा धैल़ी लै लोल़ी ती छ़ैल्‍ली अर नटिप्प न्हैरअ हुअ,
तेथ लोल़ी तै इहै घणैं काल़ै बादल़ आऐ कि सह काल़ी राची ज़ेही डरैऊंणी होए।
6सह राच बी लोल़ी ती जंतरी-पत्री का सदा लै दूर हुई,
ज़हा राची मेरी ईजा का थोघ लागअ कि हुंह आअ तेसे ओदरै।
7तैहा राची निं लोल़ी कोहै माए ओदरै आऐ,
नां तैहा राची खुशीओ नाच़-खेल्ह लोल़ी हुअ।
8तैहा धैल़ी लै लोल़ी डांऊं-च़ेल्‍लै फिटक दैनअ,
लिबतान नाओं समुंदरो बडअ ज़ीब लोल़ी मेरी परज़ा झ़ैऊअ अर तेऊ लै फिटक दैनअ।
9तैहा धैल़ी निं भैणूं तारअ लोल़ी शुझुअ,
तैहा राची भैणे लोल़ी आशा ई खतम हुई।
10तैहा राची आअ हुंह माए ओदरै अर आझ़ पल़ी मुंह एऊ संसारे आफ़ता ज़िरनी,
एता पिछ़ू लोल़ी तैहा राची फिटक लागअ।
हुंह पेटा हंदी ई किल्है निं मूंअ
11एता का हणअ त भलअ ज़ै हुंह मेरी माए ओदरै जांदअ मरी,
हुंह पेटा हंदी ई किल्है निं मूंअ आथी?
12मेरी माऐ किल्है ढाकअ हुंह आपणीं बाह दी?
तैहा किल्है पणैऊंईं मुल्है आपणीं च़ूई?
13ज़ै हुंह तधू ई मूंअ हंदअ,
तै हणअ हुंह त हुंह सुत्तअ द अर रामा करदअ लागअ द।
14तै हणअ त हुंह पृथूईए तिन्‍नां राज़ै बज़ीरा ज़िहअ,
ज़ुंणी आपणैं मैहलै कांगनरांगै आसा बणाऐं दै।
15तै रहणअ त हुंह टिक्‍कै ज़िहअ मौज़ी ज़ुंण सुन्‍नेंओ सेठ हआ अर
ज़सरै मैहलै च़ंदी ई च़ंदी हआ।
16भलअ हणअ त मुल्है इहअ ज़ै हुंह मेरी ईजो मेरी बारी लै पैहलै ई जांदअ पेट डेऊई,
तै निं मुंह धुप्पअ भाल़णअ भेटणअ त।
17सुरगै डेऊई निं तेखअ मुल्है
कोही कदुष्ट मणछा दुखा दैणअ त,
तिधी हणअ त मुंह नकैंस्सै रहणा लै पल़ी।
18-19तिधी रहा कैदी बी राज्ज़ी-मौज़ी,
नां तिधी कुंण कामां लै झांशा-त्रुंगा काढी ढेअ करदअ।
तिधी हआ सोभ मशूर अर पाखलै अर सोभै गलामी का आज़ाद।
बिधाता किल्है डाहअ हुंह ज़िऊंदअ
20ज़ै ज़िन्दगी दी एतरअ दाह-दुख आसा,
तै किल्है डाहअ हुंह बिधाता ज़िऊंदअ?
21हुंह थक्‍कअ न्हैल़ी-न्हैल़ी पर मौत बी निस्सी मुल्है एछी,
दाबी डाही दी धन-माया का खास्सअ आसा हुंह मौता लोल़अ लागअ द।
22मेरी सोभी का खास्सी खुशी आसा मेरी एही कि
हुंह लोल़ी त मूंअ।
23मुंह किज़ू लै रहणअ ज़िऊंदै?
फेरा-फेर आसा बिधाता मुल्है आफ़त पाई दी अर
आजू निं मुखा थोघै कि मुंह संघै काल्‍ला धैल़ी किहअ हणअ होए!
24मेरै निस्सी रोटी बी खाहुई, मुंह आसा सुआसी लागी दी,
धअक आसा मुंह कबल्‍ली एही लागी दी ज़िहअ पाणीं रहा पोछदअ लागी।
25ज़हा डरैऊंणी गल्‍ला का हुंह डरा,
मुल्है लागी सह ई गल्‍ल हंदी।
26मुंह नां सुख-शांती आथी नां राम आथी,
अर मुल्है पल़ा कबल्‍ली आफ़ता प्रैंदै आफ़त!”

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आयूब 3: OSJ

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