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पांच़ 16

16
शिमशोन पांच़ डेऊअ गाज़ा लै
1एकी धैल़ै डेऊअ शिमशोन फलिप्पी मुल्खे गाज़ा नगरी लै, तिधी भेटी तेऊ एक कंज़री संघा डेऊअ सह तैहा संघै सुत्तदअ तेसे घअरा लै।
2ज़ांऊं गाज़ा नगरीए लोगा का थोघ लागअ कि शिमशोन आसा तिधी, तिन्‍नैं गोटअ सह घअर फेर-फिरदअ। तिंयां रहै सारी राची नगरीए प्रऊल़ी सेटा इहअ सोठी तेऊ लै लुक्‍की करै ताखुई, “हाम्हां न्हैल़णअ सह दोत्ती तैणीं तेखअ पाणअ सह मारी।”
3पर शिमशोन डेऊअ तैहा सेटा का आधा राची नगरीए प्रऊल़ी सेटा, अर प्रऊल़ीए दुहै पाल्‍लै पाऐ तेऊ तेते शाणै, आगल़ी अर द्रींडा संघी पेच़ी! अर सह सारी प्रऊल़ निंईं तेऊ आपणीं कान्हा च़की उझै हेब्रोन नगरी सम्हनै धारा प्रैंदा लै।
शिमशोन अर दलीला
4तेखअ लोभणूंअ शिमशोन एकी दलीला नाओंए बेटल़ी लै ज़ुंण सोरक नाओंए खागै रहा ती। 5पलिश्तीए पांज़ राज़ै डेऊऐ तैहा बेटल़ी सेटा संघा बोलअ तैहा लै इहअ, “तूह मोह शिमशोना इहअ कि सह ताखा खोज़े कि तेऊ एतरअ ज़ोर किधा का आसा, हाम्हैं किहअ करै सका तेऊ काबू करी कि हाम्हैं तेऊ बान्हें अर सह तेता का नां छ़ुटे। ज़ै तूह एतो भेद तेऊ का पुछ़ी बोल़े, तै दैंऊं हाम्हां मांझ़ै हरेक ज़ण्हैं ताल्है गैरा-गैरा शौ च़ंदीए सिक्‍कै।”
6तेखअ बोलअ दलीला शिमशोना लै इहअ, “मुखा खोज़ कि ताखा एतरअ ज़ोर किधा का आसा? ताह किहअ करै सका बान्हीं डाही?”
7शिमशोनै दैनअ तैहा लै ज़बाब, “सात च़ाम्भल़े आल्‍लै बाध#16:7 बाध च़ाम्भल़ै का काढै दै धल़ै/तांद/बाधर, ज़ेता करै नगारै बी हआ कशै दै ज़ुंण शकेऊए दै नांईं होए, ज़ै कुंण मुंह तेता करै बान्हें, तै घटणअ मेरअ ज़ोर अर हुंह हणअ आम मणछा ज़िहअ।”
8तेखअ दैनी तिन्‍नैं पलिश्ती दलीला लै तिहै ई च़ाम्भल़े सात आल्‍लै बाध ज़ुंण शकेऊऐ दै नांईं आथी तै। दलीला बान्हअ शिमशोन तेता करै। 9तेऊ ढाकणा लै तै कई पलिश्ती मणछ पांडा ताखुई रहै दै। तैहा बोलअ ज़ोरै, “शिमशोन! पलिश्ती मणछ आऐ!” पर शिमशोनै चोल़ै तिंयां बाध इहै ज़िहअ सूत आगी छुंहंदी चुटा। पर तिन्‍नां का निं तज़ी तेऊए ज़ोरो भेद थोघ लागअ। इहअ करै निं तिन्‍नां का भेख ई लागअ कि तेऊ एतरअ ज़ोर किधा का आसा।
10तेखअ बोलअ दलीला शिमशोना लै इहअ, “भाल़, तंऐं बणाईं हुंह भिई ऐडी! तंऐं बोलअ मुखा झ़ुठअ। ओर्ही खोज़ मुखा कि ताह किहअ करै सका बान्हीं।”
11शिमशोनै बोलअ तैहा लै, “ज़ै मुंह कोरी राश्शी करै बान्हें ज़ेता करै किछ़ काम निं होए किअ द, तै घटणअ मेरअ ज़ोर अर तै हणअ हुंह आम मणछा ज़िहअ।”
12दलीला आणी कोरी राश्शी संघा बान्हअ तेता करै। तेखअ बोलअ तैहा ज़ोरै, “शिमशोन! पलिश्ती लोग आऐ!” तेऊ ढाकणा लै तै कई पलिश्ती मणछ पांडा ताखुई रहै दै। पर शिमशोनै चोल़ी तिंयां राश्शी आपणीं बाहा का धाग्गै ज़ेही!
13तेखअ बोलअ दलीला शिमशोना लै इहअ, “तंऐं बणाईं हुंह भिई ऐडी अर तंऐं निं मुखा शुचअ खोज़अ। तूह खोज़ मुखा ताह किहअ करै सका अर बान्हीं।”
शिमशोनै खोज़अ तैहा का, “ज़ै तूह मेरै मुंडै सात ज़टा राछ़े साता कांघी दी बुणें अर खुंढी दी बान्हें, तै घटणअ मेरअ ज़ोर अर तेखअ सका मुंह बान्हीं।”
14ज़ांऊं शिमशोन सुत्तअ द थिअ, तैहा बूणी तेऊए मुंडे सात ज़टा राछ़े कांघा दी संघा डाही तिंयां ज़टा खूंढी दी पिड्डी बान्हीं। तेखअ पाई तैहा ज़ोरै हाक्‍का, “शिमशोन! पलिश्ती आऐ!” पर शिमशोन उझ़ुअ खल़अ अर खुंढी पेछ़ुई धरना का उझै अर तेऊ पाई राछ़े कांघ बी आप्पू संघा।
15तेखअ बोलअ दलीला तेऊ लै इहअ, “ज़ै तूह मुल्है झ़ूरदअ ई निं आथी, तै किज़ू बोला तूह हुंह झ़ूरा ताल्है? तंऐं बणाईं हुंह चिई बारी ऐडी अर तज़ी बी निं तंऐं मुखा खोज़अ कि ताखा एतरअ ज़ोर किधा का आसा?” 16तैहा डाही तेऊ लै धैल़ एही ई कांग लाई। सह किअ तैहा एतरअ तंग अर तैहा किई एतरी हठ कि शिमशोन हिछ़ुअ अर 17खिरी पाअ तेऊ तैहा का शुचअ खोज़ी। शिमशोनै खोज़अ इहअ, “मेरै मुंडे ज़टा निं कधि आथी काटी दी, हुंह आसा हुऐ ज़ल्मां ओर्ही बिधाता लै अर्पण किअ द नज़ीर#16:17 नज़ीर बांधअ, बिधाता लै अर्पण/ज़ुदअ डाहअ द, ज़सरै ज़ल़ू कधि निं हंदै काटै दै। ज़ै मेरी ज़टा काटे, तेखअ घटणअ मेरअ ज़ोर संघा हणअ हुंह आम मणछा ज़िहअ।”
18ज़ांऊं दलीला ज़ाणअ कि शिमशोनै खोज़ी शुची गल्‍ला, तैहा दैनअ तिन्‍नां पांज़ा पलिश्ती राज़ै लै समाद, “तम्हैं लोल़ी ऐबै भिई आऐ, तेऊ हेरअ मुखा सह भेद खोज़ी।” तिंयां पलिश्ती आऐ अर तैहा लै मनै दै ढब्बै बी आणै तिन्‍नैं संघा।
19दलीला डाहअ सह आपणीं ज़ांघा प्रैंदै सताऊई अर तेखअ शादअ एक मणछ अर तेऊ काटी शिमशोने मुंडे तिंयां लाम्मी-लाम्मी सात ज़टा, तेखअ ज़ाण्हुंअ कि शिमशोनो ज़ोर घटअ। 20संघा पाई ज़ोरै हाक्‍का, “शिमशोन! पलिश्ती आऐ!” सह उझ़ुअ निंजा का खल़अ अर तेऊ सोठअ इहअ, “मुंह उझ़णअ पैहलै ज़िहअ झ़ट च़ारै ज़िहअ सदा हआ त।” पर तेऊ का निं थोघै थिअ कि परमेशरो बल गअ तेऊ का दूर डेऊई।
21पलिश्ती ढाकअ सह, संघा पाऐ तेऊए आछिए छैरै फाल़ी। तिन्‍नैं निंयं सह गाज़ा नगरी लै अर तिधी डाहअ सह तिन्‍नैं पितल़े शांघल़ी करै बान्हीं कैद खानै पाई थरेटा दी नाज़ा पिशदअ लाई। 22तेऊए मुंडे शराल़ लागै भिई बझ़दै।
शिमशोने मौत
23पलिश्ती राज़ै अर सैणैं हुऐ कठा, संघा दैनी तिन्‍नैं आपणैं दगोन नाओंए देअआ लै बल़ीदान करी बडी धाम। तिन्‍नैं बोली एही गिह, “म्हारै देअऐ दैनी म्हारै दुशमण शिमशोना प्रैंदै हाम्हां लै ज़ीत।” 24-25तिंयां थिऐ आप्पू मांझ़ै खुशी मनाऊंदै लागै दै अर तेखअ बोलअ तिन्‍नैं इहअ, “शिमशोना आणा ओर्ही, तेऊओ करनअ हाम्हां इधी तमास्सअ!” ज़ांऊं तिन्‍नैं शिमशोन कैद खानै का तिधा लै आणअ तेखअ लागै तिंयां तेऊए तमास्सै करदै। सह डाहअ तिन्‍नैं दूई बडै थाम्हा मांझ़ै खल़अ करी। तेऊ भाल़ी लागै लोग आपणैं देअए एही गिहा बोल्दै, “म्हारै देअऐ दैनी म्हारै दुशमणा का हाम्हां लै ज़ीत ज़ुंणीं म्हारी साल-फसल बरैबाद किई अर म्हारै लोग मारै।”
26शिमशोनै बोलअ तेऊ दासा का ज़ुंण तेऊ हाथा ढाकी नढैऊंदअ त लागअ द, मुंह दै तेऊ थाम्हा छ़ुंहंणै ज़ेथ दी अह बडअ च़ऊंरअ आसा टेक्‍कअ द, मुंह खहल़्णअ तेथ दी नील़ लाई। 27तेऊ च़ऊंरै दी थिऐ मर्ध-बेटल़ी संघी खास्सै मणछ आऐ दै। तिंयां पांज़ पलिश्ती राज़ै बी थिऐ तिधी आऐ दै। 28तेखअ किई शिमशोनै इहअ बोली बिधाता सेटा अरज़, “हे मेरै मालक महान बिधाता, मुंह निं बिस्सरी आथी, हे परमेशर ज़ीबाण, सिधअ एकी बारी दै मुल्है तूह भिई तिहअ ई ज़ोर ताकि हुंह पलिश्ती का आपणीं दुही आछिए कांणै हणैंओ एक बदल़अ लई सकूं।” 29मांझ़लै तिंयां दूई थाम्ह ज़ेथ प्रैंदै सह बडअ च़ऊंरअ थिअ टेक्‍कअ द, शिमशोनै लाअ खाणैं-खिंज़ै दोहरै हाथा करै सारअ ज़ोर। 30तेखअ पाई ज़ोरै लैल़, “पलिश्ती संघै लोल़ी हुंह बी मूंअ!” तेऊ ढोल़ै आपणअ सारअ ज़ोर लाई तिंयां थाम्ह अर सह बडअ च़ऊंरअ ढूल़अ तिन्‍नां पांज़ राज़ै अर सोभी लोगा प्रैंदै। इहअ करै ज़ेतरै लोग शिमशोनै तिधी आप्पू मरदी बारी मारै, तिंयां थिऐ तेता का बी कई गुणा खास्सै ज़ुंण तेऊ आपणीं सारी अमरा मारै तै।
31शिमशोने भाई अर तेऊए टबर आऐ उंधै तेऊए ल्हासा निंदै। तिन्‍नैं डाहअ सह तिधा का निंईं करै सोरा अर अशतोल नगरी मांझ़ै तिधी दाबी ज़िधी तेऊओ बाब मनोह दाबअ त। शिमशोन रहअ इज़राईली प्रैंदै बिहा साला तैणीं पांच़।

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पांच़ 16: OSJ

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