ईशायाह 55
55
परमेशर करा झींण
1बिधाता बोला आपणीं परज़ा इहअ,
“ज़ेतरै बी नचिशै आसा तिंयां एछा सोभ,
इधी पाणीं सेटा!
ज़हा का किछ़ ढब्बै निं आथी तिंयां बी एछा
संघा निंयां खाणां लै नाज़!
झुटणा लै निंयां दाखो रस अर दुध,
एतो निं तम्हां किछ़ ढब्बै अर मोल लागणअ दैणअ!#प्रका. 21:6
2ज़ेता करै तम्हैं रज़दै निं आथी, तेता लै किल्है करा तम्हैं आपणैं ढब्बै बरैबाद?
ज़ेता करै पेट निं रज़दअ, तेता लै किल्है करा मैन्थ?
मेरी गल्ल शूणां संघा करा ज़िहअ हुंह बोला तिहअ,
तम्हां भेटणअ बधिया का बधिया खाण-पींण।
3ओ मेरी परज़ा! ओर्ही एछा मुंह सेटा लै, धैन दैआ,
मुंह सेटा एछा, तै रहणैं तम्हैं ज़िऊंदै!
मुंह करनी तम्हां संघै सदा लै करार अर
तम्हां लै दैणीं मुंह बर्गत ज़ुंण मंऐं राज़ै दाबेदा लै ज़बान दैनी ती।#भज. 89:28; शधा. 13:34
4मंऐं बणाअं सह#55:4 सह दाबेद राज़अ अर देशा-देशा लै हुकम करनै आल़अ प्रधान,
तेऊ बाती रहैऊअ मंऐं तिन्नां का महान बल।#इब्रा. 2:10; 5:9; प्रका. 1:5
5ताह करनअ तिन्नां देशा लै बी हुकम
ज़हा संघै तेरी भेत-बछ़ैण बी निं आथी ती,
ऐबै एछणैं तिंयां ताह सेटा लै ठुर्हदा कि ताह संघै ज़ुल़े!
हुंह आसा तेरअ परमेशर बिधाता इज़राईलो पबित्र परमेशर,
मुंह करनअ आजू इहअ ई अर
मुंह बढेरनीं तेरी शोभा शान।”
6बिधाता बाखा फिरा संघा करा तेऊ सेटा अरज़
सह सका अज़ी बी तम्हां भेटी।#शधा. 17:27
7कदुष्ट काम करनै का हटा पिछ़ू,
बूरी सोठ छ़ाडा पोर्ही,
म्हारै परमेशर बिधाता बाखा फिरा,
सह आसा झणैल़ू अर तेऊ हेरनै थारै पाप माफ करी।
8किल्हैकि बिधाता बोला इहअ, “मेरी सोठ निं तम्हां ज़ेही आथी,
मेरी बात बी आसा तम्हां का ज़ुदी।#रोम. 11:33
9किल्हैकि ज़िहअ सरग धरती का खास्सअ उछ़टअ आसा,
तेही आसा मेरी सोठ अर बात बी तम्हां का उछ़टी।
10मेरै बैण आसा बरसात अर हिंऊंआं ज़िहै
ज़ुंण सरगा का धरती भेऊंणा लै पल़ा।
तेता करै पज़ा धरना का साल-फसल,
तेता करै निखल़ा बऊंणा लै बेज़अ अर खाणां लै नाज़।
11ज़ुंण बैण मुंह बोल़णअ, सह हणअ इहअ कि
सह निं तेता हुऐ बाझ़ी टल़दअ ज़ुंण मंऐं करनअ सोठअ,
तेता करै हणअ सह पूरअ ज़िहअ करना लै मंऐं सह बैण बोलअ।
12तम्हैं निखल़णैं बाबेल देशा का खुशी-खुशी,
तम्हैं दैणैं मेल़-ज़ोल़ करी नगरी बागै छ़ाडी।
पर्बत अर बडी-बडी धारा बोल़णीं शांघअ नघोल़ी गिहा,
डाल़ा-बूटा करनी ज़ोरै-ज़ोरै ज़ै-ज़ैकार।
13ज़ेथ एभै झ़ंहर-झ़ाकल़ आसा, तेथ पज़णै कैलीए बूट अर कुंगशीए ज़ैगा पज़णी मैहंदी।
अह हणअ सदा लै नछ़ैण अर आदगारी
कि मंऐं बिधाता किज़ै आसा किअ द।”
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“ज़ेतरै बी नचिशै आसा तिंयां एछा सोभ,
इधी पाणीं सेटा!
ज़हा का किछ़ ढब्बै निं आथी तिंयां बी एछा
संघा निंयां खाणां लै नाज़!
झुटणा लै निंयां दाखो रस अर दुध,
एतो निं तम्हां किछ़ ढब्बै अर मोल लागणअ दैणअ!#प्रका. 21:6
2ज़ेता करै तम्हैं रज़दै निं आथी, तेता लै किल्है करा तम्हैं आपणैं ढब्बै बरैबाद?
ज़ेता करै पेट निं रज़दअ, तेता लै किल्है करा मैन्थ?
मेरी गल्ल शूणां संघा करा ज़िहअ हुंह बोला तिहअ,
तम्हां भेटणअ बधिया का बधिया खाण-पींण।
3ओ मेरी परज़ा! ओर्ही एछा मुंह सेटा लै, धैन दैआ,
मुंह सेटा एछा, तै रहणैं तम्हैं ज़िऊंदै!
मुंह करनी तम्हां संघै सदा लै करार अर
तम्हां लै दैणीं मुंह बर्गत ज़ुंण मंऐं राज़ै दाबेदा लै ज़बान दैनी ती।#भज. 89:28; शधा. 13:34
4मंऐं बणाअं सह#55:4 सह दाबेद राज़अ अर देशा-देशा लै हुकम करनै आल़अ प्रधान,
तेऊ बाती रहैऊअ मंऐं तिन्नां का महान बल।#इब्रा. 2:10; 5:9; प्रका. 1:5
5ताह करनअ तिन्नां देशा लै बी हुकम
ज़हा संघै तेरी भेत-बछ़ैण बी निं आथी ती,
ऐबै एछणैं तिंयां ताह सेटा लै ठुर्हदा कि ताह संघै ज़ुल़े!
हुंह आसा तेरअ परमेशर बिधाता इज़राईलो पबित्र परमेशर,
मुंह करनअ आजू इहअ ई अर
मुंह बढेरनीं तेरी शोभा शान।”
6बिधाता बाखा फिरा संघा करा तेऊ सेटा अरज़
सह सका अज़ी बी तम्हां भेटी।#शधा. 17:27
7कदुष्ट काम करनै का हटा पिछ़ू,
बूरी सोठ छ़ाडा पोर्ही,
म्हारै परमेशर बिधाता बाखा फिरा,
सह आसा झणैल़ू अर तेऊ हेरनै थारै पाप माफ करी।
8किल्हैकि बिधाता बोला इहअ, “मेरी सोठ निं तम्हां ज़ेही आथी,
मेरी बात बी आसा तम्हां का ज़ुदी।#रोम. 11:33
9किल्हैकि ज़िहअ सरग धरती का खास्सअ उछ़टअ आसा,
तेही आसा मेरी सोठ अर बात बी तम्हां का उछ़टी।
10मेरै बैण आसा बरसात अर हिंऊंआं ज़िहै
ज़ुंण सरगा का धरती भेऊंणा लै पल़ा।
तेता करै पज़ा धरना का साल-फसल,
तेता करै निखल़ा बऊंणा लै बेज़अ अर खाणां लै नाज़।
11ज़ुंण बैण मुंह बोल़णअ, सह हणअ इहअ कि
सह निं तेता हुऐ बाझ़ी टल़दअ ज़ुंण मंऐं करनअ सोठअ,
तेता करै हणअ सह पूरअ ज़िहअ करना लै मंऐं सह बैण बोलअ।
12तम्हैं निखल़णैं बाबेल देशा का खुशी-खुशी,
तम्हैं दैणैं मेल़-ज़ोल़ करी नगरी बागै छ़ाडी।
पर्बत अर बडी-बडी धारा बोल़णीं शांघअ नघोल़ी गिहा,
डाल़ा-बूटा करनी ज़ोरै-ज़ोरै ज़ै-ज़ैकार।
13ज़ेथ एभै झ़ंहर-झ़ाकल़ आसा, तेथ पज़णै कैलीए बूट अर कुंगशीए ज़ैगा पज़णी मैहंदी।
अह हणअ सदा लै नछ़ैण अर आदगारी
कि मंऐं बिधाता किज़ै आसा किअ द।”
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