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हगाई 2

2
परमेशरे भबनै आजू प्रतप्प
1तैहा ई साला इक्‍की शऊजै किई बिधाता आपणैं गूर हगाई संघै भिई गल्‍ला। बिधाता बोलअ इहअ, 2“शालतीएले शोहरू राज़पाल जरूबाबेल, जेहोसादके शोहरू माहा प्रोहत ज़ैहसू संघी बच़ै दै सोभी यहूदी ज़ुंण बाबेल देशे गलामी का फिरी एरुशलेम नगरी आसा दै तूह खोज़ तिन्‍नां का इहअ, 3‘तम्हां मांझ़ै कुंण इहअ बी आसा ज़ुंणीं अह भबन भाल़अ द होए अर आद होए रही दी कि एते शोभा अर प्रतप्प किहअ थिअ? अर तम्हां का अह आझ़ किहअ शुझिआ? अह निं तिहअ धख बी ज़ाण्हदअ!’ 4पर ऐबै बोला हुंह बिधाता, ‘जरूबाबेल, तूह कर हिम्मत! जेहोसादक प्रोहते शोहरू ज़ैहसूआ, तूह कर हिम्मत! यहूदा मुल्खे परज़ा, तम्हैं करा हिम्मत! तम्हैं करा काम शुरू, किल्हैकि हुंह स्वर्गे सारी सैनो मालक बिधाता हणअ थारी मज़त करदअ तम्हां संघै आप्पै। 5तम्हैं करा तैहा गल्‍ला आद कि ज़धू तम्हैं मिसर देशा का निखल़ै तै, तधू किई ती मंऐं थारै दादा-बाबा संघै करार कि हुंह रहणअ सदा तम्हां संघै, अर हुंह आसा तिहअ ई आझ़ बी तम्हां संघै। तैही निं तम्हैं डरदै लागा।’
6“हुंह स्वर्गे सारी सैनो मालक बोला तम्हां लै इहअ बी, ‘सह बगत निं दूर आथी ज़ेभै मुंह सरग, धरती अर समुंदर झ़ुंझ़ल़णै। 7मुंह झ़ुंझ़ल़णै सोभ देश, तिन्‍नां करनै आपणीं किम्मती च़िज़ा इधी मेरै भबनै भैंट। एऊ भबने शोभा अर प्रतप्प बढेरनअ मुंह खास्सअ। अह डाहअ मंऐं बिधाता बोली ज़ुंण स्वर्गे सारी सैनो मालक आसा।’ 8हुंह स्वर्गे सारी सैनो मालक बिधाता बोला, ‘संसारो सारअ सुन्‍नअ अर च़ंदी आसा मेरअ।’ 9एऊ नऊंऐं भबने शोभा अर प्रतप्प हणअ पराणैं भबना का होर बी खास्सअ। ऐहा ज़ैगा दैणीं मुंह आपणीं परज़ा लै शांती अर बर्गत। इहअ बोला हुंह बिधाता ज़ुंण स्वर्गे सारी सैनो मालक आसा।”
पिछ़लअ ज़मानअ अर आगलअ ज़मानअ
10फारस देशै माहा राज़ै दारे राज़ा दी दुजी साला च़ौबी मकशीरै किई बिधाता आपणैं गूर हगाई संघै गल्‍ला। 11स्वर्गे सारी सैने मालक बिधाता बोलअ इहअ कि तूह एछ प्रोहता का बधाने इना गल्‍ले बारै पुछ़ी कि थारअ एता लै किज़ै बच़ार आसा, 12“ज़ै कुंण मणछ आपणैं पाल्‍लै दी मुंह बिधाता लै किऐ दै बल़ीदानो पबित्र शकन गांठल़ी बान्हें, अर तेऊए तेऊ तिन्‍नां झिकल़ै करै होर नाज़ कि सटेऊई दी रोटी, दाखो रस, जैतूनो तेल अर होर खाणैं पिणें च़िज़ा छ़ुंहींए, तेता करै कै तिंयां खाणैं पिणें च़िज़ा बी पबित्र हणीं?”
सोभी प्रोहतै दैनअ ज़बाब, “नांईं हंदी।”
13तेखअ पुछ़अ हगाई सुआल, “ज़ै कुंण मुल्दै छ़ुंहीं छ़ोतलअ होए अर सह छ़ोतलअ मणछ इना खाणैं-पिणें च़िज़ा छ़ुंए, तेता करै इना च़िज़ा दी छ़ोत लागणीं कि नांईं?”
सोभी प्रोहतै दैनअ ज़बाब, “हाँ, इहअ करै लागणीं छ़ोत।”
14तेखअ बोलअ हगाई तिन्‍नां लै, “बिधाता बोला इहअ, ‘अह देश अर एते मेरी परज़ा आसा एही ई। तिंयां आसा छ़ोतलै। ज़ुंण बी तिंयां खटा, तिंयां काम बी आसा छ़ोतलै। ज़ेही बी च़िज़ा ज़ुंण तिंयां मुल्है भैंट करा, तेथ बी आसा तिन्‍नें पापा करै छ़ोत लागी दी। 15ऐबै करा ऐहा गल्‍ला दी राम्बल़ै करै बच़ार कि आझ़ा का पैहलै तम्हां लै केही-केही हुई-बिति! ज़ेभै तैणीं तम्हैं मेरै भबना भिई च़िणनेओ का शुरू निं किअ त। 16तिन्‍नां धैल़ै हआ ती तम्हां एही आशा कि थारै खेचा का जाणअ बिह मण नाज़ निखल़ी पर तेथ निखल़ा त दस ई मण। तम्हैं सोठा तै इहअ कि थारै जाणीं कोफरी मांडी पज़ाह डिब्बी दाखे रसा करै भर्हुई पर खिरी निखल़ा त बिह डिब्बी दाखो रस। 17तम्हैं ज़हा साल-फसला काढणा लै खास्सी मैन्थ किई तेता लै छ़ाडी मंऐं थारै खेचा शकेऊंणै आल़ी बागरी अर शरू ताकि सह बरैबाद होए। पर तज़ी बी निं तम्हैं मुंह थारै बिधाता बाखा फिरै।
18“‘ऐबै डाहा तम्हैं ऐहा च़ौबी मकशीरे धैल़ी आद। आझ़ छ़ेक्‍की तम्हैं मेरै भबना भिई बणाणां लै आथरी च़िणीं। ऐबै सोठा तम्हैं कि आजू किज़ै हणअ। 19ज़ुंण साल फसल तम्हैं झाल़ी ती डाही दी, सह हेरी तम्हैं खाई छ़ेक्‍की! आजू निं दाख, फेडू, नारदाणैं अर जैतूने फसल अज़ी पाक्‍की आथी। पर आझ़ा बाद दैणीं मुंह तम्हां लै खास्सी बर्गत।’”
जरूबाबेला लै बाहिदअ
20तैहा ई धैल़ी किई बिधाता भिई हगाई संघै गल्‍ला। बिधाता बोलअ इहअ, 21“यहूदा मुल्खे राज़पाल जरूबाबेला संघै कर गल्‍ला। तेऊ का खोज़ कि मुंह झ़ुंझ़ल़णै सरग अर सारी धरती। 22मुंह होरी देशा-देशे राज़ै करनै मुंह तिन्‍नें सैना संघी खतम। तिन्‍नें रथ अर घोल़ै बधल़णैं धरनीं। तिन्‍नें सैना च़िखणीं आपण अर तिन्‍नां पाणै एक-दुजै आपणीं तलबारा करै मारी।
23“पर हुंह स्वर्गे सारी सैनो मालक बिधाता बोला इहअ, ‘जरूबाबेल, शालतीएले शोहरूआ, तूह आसा मेरअ दास अर मंऐं छ़ांटअ द। तैहा धैल़ी दैणअ मुंह ताल्है हक कि तूह मुंह बाखा राज़ करे। अह डाहअ मंऐं बिधाता बोली।’”

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