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मूल़ 40

40
सुपनैओ फल खोज़णअ
1-3युसुफ त कैदखाने दी, एकी धैल़ै हुअ इहअ कि मिसर देशे माहा राज़ेए पणैऊंए दरोगै अर मल़ेगे दरोगै किअ किज़ै कशूर। राज़ै पाऐ रोश्शै तिंयां कैदखानै दी ज़िधी युसुफ त।
4सपाहीए दरोगै सभाल़ी तिन्‍नें हेर-भाल़ करने ज़िम्मैंबारी युसुफा लै। तेखअ रहै तिंयां खास्सै धैल़ै तैणीं कैदखाने दी।
5एकी राची हुऐ तिन्‍नां दुही ज़ुदै-ज़ुदै सुपनै।
6दुजै धैल़ै दोत्ती ज़ांऊं युसुफ कैदी भाल़अ डेऊअ, तिन्‍नें मुंहां भाल़ी गअ तेऊ का ज़ाण्हुंई कि इने मन्‍नैं आसा झाख पल़अ द।
7युसुफै बोलअ मिसर देशे माहा राज़ेए पणैऊं अर मल़ेगे दरोगै दुही लै, “तम्हैं किल्है आसा आपणैं मुंह शेऊई डाहै दै?”
8तिन्‍नैं बोलअ युसुफा का, “हिझ़ बैल़ी हुऐ हाम्हां दुही सुपनै, पर एतो फल खोज़णैं आल़अ निं हाम्हां का कोहै आथी।”
युसुफै बोलअ तिन्‍नां का, “सुपनैओ किज़ै फल हणअ तेतो थोघ हआ बिधाता का। मुखा खोज़ा हैनूं तम्हैं किहै सुपनै भाल़ै।”
9राज़े पणैऊं दरोगै बोलअ युसुफा का, “मुंह हुअ इहअ सुपनअ कि मुखा शुझुई दाखे बेल, 10तेथ आसा चअन शाण्हटी लागी दी, ज़ेतरी तेथ डोडी लागी, तेतरी गऐ तिंयां फूली संघा गऐ तेतरी तेते लुम्बरू दी दाखे दाणैं पाक्‍की।
11“संघा शुझुअ मुखा इहअ कि मिसर देशे माहा राज़ैओ प्रिहअ थिअ मेरै हाथै, तेथ मठिल्‍लअ मंऐं दाखो रस संघा दैनअ राज़े हाथै।”
12युसुफै बोलअ, “आपणैं सुपनैओ फल शुण, तिंयां चअन शाण्हटी आसा चअन धैल़ी, 13इना चिई धैल़ै करनी राज़ै तेरी बड़ैई अर तूह शादणअ तेऊ आपणैं कामां लै बापस अर तूह हणअ पैहलै ज़िहअ मिसर देशे माहा राज़ै का दाखे रसा पणैंऊंदअ।
14“पर ज़ेभै तूह मिसर देशे माहा राज़ै सेटा बापस आपणैं कामां दी लागे, तेभै निं तूह मुंह बिस्सरुई, मेरै बारै करै राज़ै का गल्‍ला अर मुंह काढै एऊ कैदखाने का बागै।
15“हुंह आसा इब्रानी लोगे देशा का च़की आणअ द अर इधी मिसर देशै बी निं मंऐं इहअ किछ़ गलत काम आथी किअ द ज़ेता लै हुंह कैदखाने आसा बंद किअ द।”
16तेखअ ज़ांऊं तेऊ राज़े मल़ेगे दरोगै भाल़अ कि युसुफै खोज़अ सुपनैओ बधिया फल, तेऊ बोलअ, “मुंह बी हुअ सुपनअ, इहअ कि मेरै मुंडा प्रैंदै आसा चअन शेती रोटीए छ़ल़्हटी।
17“तेखअ शुझुअ मुखा इहअ कि सोभी का प्रैंदे छ़ल़्हटी दी आसा मिसर देशे माहा राज़ै लै कई भांतीए सटेऊई दी च़िज़ा। पर च़ेल्‍लू-पखीरू आसा तेता का च़ुंघदै लागै दै।”
18युसुफै बोलअ, “तेरै सुपनैओ फल शुण, तिंयां चअन छ़ल़्हटी आसा चअन धैल़ै।
19“एभा पोर्ही चिई धैल़ै भितरी पाणअ मिसर देशे माहा राज़ै तेरअ कैल़अ काटी अर तेरी ल्हास डाहणीं राज़ै उछ़टै बूटा दी छ़ड़ाऊई, अर तूह खाणअ शकारी च़ेल्‍लू-पखीरू च़ोच़ल़ी-च़ोच़ल़ी करै।”
20चिऐ धैल़ै थिअ मिसर देशे माहा राज़ैओ ज़ल्म धैल़अ, तेऊ दैनी सोभी कार-करिंदै लै धाम। राज़ै किऐ तैहा धैल़ी पणैऊं अर मल़ेगे दुहै दरोगै कैदखाने का आज़ाद। 21पणैऊं दरोगअ ता डाहअ मिसर देशे माहा राज़ै भिई तेऊए कामां दी। 22पर सह मल़ेगैओ दरोगअ पाअ तेऊ मारी संघा डाहअ उछ़टै बूटा दी छ़ड़ाऊई।
ज़िहअ युसुफै बोलअ त तिन्‍नां दुही संघै हुअ तिहअ ई, 23पर ज़ांऊं तेऊ पणैऊंए दरोगै राज़ै सेटा आपणअ काम भिई भेटअ, तेऊ निं तेखअ युसुफे आद बी रही।

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