एजकेल 23
23
दूई कंज़री बैहणी
1बिधाता बोलअ मुल्है इहअ, 2“मणछा, एकी ज़मानै थिई दूई शोहरी, तिंयां ती सक्की बैहणी। 3ज़ेतरी तिन्नां धख ज़ुआनी आई, तिंयां मुक्की कई मर्धा संघै सुत्ती-बेशी भ्रष्ट हई! संघा लागी मिसर देशै कंज़रैई करदी। 4ज़ेठी नाअं त ओहोला सामरी नगरी, अर कान्हीं नाअं त ओहोलीबा मतलब एरुशलेम नगरी। मंऐं किअ तिन्नां दुही संघै बैह अर तिन्नां का हुऐ मेरै खास्सै-शोहरू-शोहरी। 5ओहोला ती मेरी पर सह रही तज़ी बी कंज़रैई करदी लागी! सह लोभणूंई अश्शूरी मर्धा लै। 6सह लोभणूंई अश्शूरी सैनापति अर कार-करिंदै लै। तिंयां तै हेरनै बेघै बित्तै अर शूरबीर ज़ुंण निली बर्दी बान्हीं घोल़ै प्रैंदै शुंआर हआ तै। 7ओहोला सुत्ती तिन्नां सोभी कार-करिंदै संघै बारी-बारी। सह लोभणूंईं तिन्नां अश्शूरी शूर-बीरा लै एही कि सह कंझ़रूई तिन्नां संघै ज़िहअ तेसो दिल बोलअ तेही। तैहा लाई तिन्नें मुहुर्ती पूज़ी करै आप्पू लै छ़ोत। 8मिसर देशै ज़िहअ सह आपणीं देहीओ बपार करा ती, सह निं तैहा छ़ाडअ आथी। तैहा त होछ़ी उझै तेतो भैस्स पल़अ द। ज़ेतरी तैहा धख ज़ुआनी आई ती, तेतरी ती सह कई मर्धा संघै सुत्ती-बेशी भ्रष्ट मुक्की दी हई! 9तैही दैनी मंऐं सह तिन्नां अश्शूरी लोभी का सभाल़ी ज़हा लै सह लोभणूंई दी आसा ती। 10तिन्नैं किई सह पठ नांगी, तेसे शोहरू-शोहरी डाहै तिन्नैं कैद करी अर खिरी पाई सह तलबारा करै मारी। ज़ुंण बूरी दशा तेसे हुई, तिंयां गल्ला हुई होरी बेटल़ी जैंदरी सारै दी मशूर।
11“ओहोलीबै भाल़अ आपणीं आछी कि तेसे ज़ेठी बैहण केही हुई बरैबाद, पर तज़ी बी सुत्ती-बेठी सह तिन्नां ई संघै! सह निखल़ी कंज़रैई करना लै तैहा का बी च़ार गंईं आजू। 12सह लोभणूंई अश्शूरी सैनापति अर कार-करिंदै लै खास्सी। तिंयां तै हेरनै बेघै बित्तै अर शूरबीर ज़ुंण पटाघै झिकल़ै बान्हीं घोल़ै प्रैंदै शुंआर हआ तै। 13मंऐं भाल़अ कि सह हुई पठ छ़ोतली। सह कान्हीं निखल़ी ज़ेठी का बी खास्सी बूरी।
14“ओहोलीबा कंझ़रूई बेघै बूरी, सह निखल़ी आपणीं दाई का बी आजू। तैहा भाल़ी कसदी मर्धे मुहुर्ती। ज़ुंण भित्ती दी खेल़्तर काढी तै बणाऐं दै, तिंयां ती पटाघै लाला रांगा करै रांगी दी, 15तिन्नां मर्धे कुछी ती गाची बान्हीं दी अर तिन्नें मुंडै तै साफै बान्हैं दै अर साफैओ पुंझ़ हआ उंधै च़ुंढदअ लागअ द। तिंयां सोभ शुझिआ तै बाबेल देशे कार-करिंदै ज़ुंण तिन्नें ज़ल्म भूमी आसा। 16ज़िहै ई तैहा तिंयां भाल़ै, सह लोभणूंई तिन्नां लै पठी, तेखअ दैनअ तैहा दूत छ़ाडी बाबेल देशा लै समाद। 17बाबेल देशे मर्ध आऐ, संघा सुत्तै तैहा संघै। तिन्नैं किई सह छ़ोतली। ज़ांऊं सह पठी भ्रष्ट मुक्की हई, तेखअ रुंझ़ुई सह तिन्नां का अर तेखअ हटअ तेसो दिल तिन्नां का। 18सह कंझ़रूई खास्सै मर्धा संघै, तैहा निं तेते शरम ई लागदी ती। सोभी का थिअ थोघ कि सह आसा कंज़री हुई दी। हुंह हुअ तैहा का दुखी, संघा हुअ तैहा का दूर ज़िहअ तेसे दाई का दूर हुअ त। 19पर तेसे देहीए भुख निं तज़ी बी खतम हुई! सह च़ाहा ती होर बी खास्सै मर्धा संघै सुत्ती मौज़ करनी! सह लागी आपणीं ज़ुआनीए धैल़ै आद करदी ज़िना धैल़ै सह मिसर देशै कंज़रैई करा ती। 20सह लोभणूंई आपणैं तिन्नां इहै लोभी लै ज़सरै गुप्त आंग गाधै ज़िहै थिऐ अर ज़सरअ बीज घोल़ै ज़िहअ आसा। 21ओहोलीबा, तूह च़ाहा तिहअ पाप भिई करनअ, ज़ुंण तंऐं तेरी ज़ुआनीए धैल़ै मिसर देशै किअ! ज़िधी मर्ध तेरी च़ूई दी हाथ लाआ तै अर ज़िधी तूह भ्रष्ट हुई!
एरुशलेम नगरी लै परमेशरो नसाफ
22“ओहोलीबा, हुंह परमेशर बिधाता बोला ताल्है ऐबै इहअ, ‘तूह करा ऐबै तिन्नां तेरै लोभी का नफरत, पर मुंह पजैल़णैं तिंयां इधी। तिन्नां गोटणी तूह फेरा-फेर। 23मुंह पजैल़णैं बाबेल देशे लोग खासकर कसदी इधी। पकोद, शोआ अर कोआ नगरीए लोग बी पजैल़णैं मुंह इधी। अश्शूरी लोग बी आणनैं मुंह इधा लै। इहअ करै पजैल़णैं मुंह तिंयां सोभ बित्तै लोभणैं आल़ै ज़ुआन सैनापति, राज़पाल, जोधै अर सोभ कार-करिंदै घोल़े शुंआरी दी इधी। 24तिन्नां पल़णअ ताल्है उतर दिशा बाखा चुटी। तिन्नां आणनीं खास्सी बडी सैना, तिंयां एछणैं खास्सै लोग रथ अर घोल़ै प्रैंदै बेशी। तिन्नैं हणैं हाथै ढाल़ बर्छ़ै ढाकै दै, मुंडै हणैं टोप लाऐ दै। तिन्नां गोटणी तूह फेरा-फेर, मुंह बी दैणीं तूह तिन्नां का सभाल़ी अर तिन्नां करनअ तेखअ तिन्नें आपणैं बधाने साबै तेरअ नसाफ। 25तंऐं किअ मुल्है विश्वास घात, तैही आसा मुंह ताल्है रोश्शै आई दी। मुंह दैणअ हणैं कि ईंयां ताल्है रोश्शै नर्दैई हई सज़ा दैए। तिन्नां पाणै तेरै नाक-कान काटी। ज़ुंण मणछ बच़ै दै आसा, तिंयां पाणै तिन्नां तलबारा करै काटी मारी। तिन्नां छ़ड़ैऊंणैं ताखा तेरै शोहरू-शोहरी अर ज़ुंण बी बच़अ द होए तेथ चैल़णीं तिन्नां आग। 26तिन्नां पाणै तेरै झिकल़ै धेल़ी अर तेरै गैहणैं बी निंणै ताखा छ़ड़ैऊई। 27तेरअ बरेल़्हणअ अर कंज़रैई करनी मुंह खतम ज़ुंण तंऐं मिसर देशे लोगा का शिखल़ी ती। तेखअ निं ताह मिसर देशे लोगा बाखा भाल़णअ बी अर नां तिंयां ताह आद करनै।’
28“ओहोलीबा, हुंह परमेशर बिधाता बोला ऐबै ताल्है कि तूह दैणीं मुंह तिन्नां ई का सभाल़ी ज़हा लै तूह ऐबै नफरत करा। ज़हा का रुंझ़ुई तंऐं मुंह फरेऊअ, ऐबै हणैं तेरै मालक तिंयां ई। 29तिन्नां डाहणीं ताह संघै ज़ीद, ज़ुंण बी तेरी कमाई आसा, सह छ़ड़ैऊंणी तिन्नां ताखा पोर्ही। तिन्नां डाहणीं तूह तेरै झिकल़ै खोल्ही नांगी शोटी। ज़ांऊं तूह नांगी हणीं, तेखअ हणीं तिंयां गल्ला प्रगटी कि तूह कहा-कहा संघै आसा कंझ़रूई दी। 30तंऐं किअ मुल्है विश्वास घात, तैही दैनी मंऐं ताल्है एही सज़ा। तूह लोभणूंई होरी देशा लै। तिन्नें मुहुर्ती पूज़ी करै लाई तंऐं आप्पू लै छ़ोत। 31ज़िहअ तेरी ज़ेठी बैहणी किअ, तंऐं बी किअ तिहअ ई। ज़ेही मंऐं तैहा लै सज़ा दैनी, ताल्है बी दैणीं मुंह तेही ई सज़ा।
32“ऐबै शुण, हुंह परमेशर बिधाता बोला इहअ,
‘ताल्है दैणअ मुंह तेऊ ई पारू का झुटणा लै
ज़ेता का मंऐं तेरी ज़ेठी बैहणी का पणैऊंअं त।
अह आसा बडअ अर डुघअ पारू, तेथ अक्का बतेर्हअ।
सह सज़ा हणीं ताल्है एही कि लोग लागणै ताल्है हास्सदै अर सुहांगा करदै।
33तेता का झुटी हणीं तूह नशै दी बेगरी,
सह प्रिहअ आसा डअर अर बरैबादीओ।
ज़ेही तेरी ज़ेठी बैहण सामरी पठ बरैबाद हुई, तिहअ निं ताह दी बी किछ़ बच़णअ।
34तेऊ पारू का लागणअ ताह पठी झुटणअ! तेखअ पाणअ ताह सह फाल़ी।
तेते फुटै दै ठिक्करै करै ब्रूज़णी ताह बेगरै हई आपणीं च़ूई दी क्रिंज़ा!
अह गल्ल डाही मंऐं परमेशर बिधाता बोली।’”
35मेरअ मालक बिधाता बोला ऐबै इहअ, “तंऐं हेरअ हुंह बिस्सरी अर तंऐं आसा मुंह बाखा लै पिठ डाही दी फरेऊई! तूह कंझ़रूई खास्सै संघै अर लाई आप्पू लै छ़ोत। ऐबै पल़णीं ताह तेते सज़ा भुगतणी।”
दुही बैहणी लै परमेशरो नसाफ
36बिधाता बोलअ मुखा इहअ, “मणछा, ऐबै करै तूह ओहोले अर ओहोलीबो नसाफ। ज़ुंण तिन्नैं च़िल़्हखरै काम किऐ, तेतो दोश खोज़ तिन्नां का तूह। 37तिन्नैं किई कंज़रैई, तिन्नैं किई हत्या! मुंह छ़ाडी लागी तिंयां होरी देअआ पूज़दी! ज़ुंण मुंह मेरै तिन्नां का शोहरू-शोहरी हुऐ तै, तिंयां किऐ इनै दुही तिन्नां मुहुर्ती लै बल़ीदान करी आगी दी हूम। 38एतरअ, हुअ, तिन्नैं लाई मेरी पबित्र ज़ैगा बी छ़ोत अर तिंयां समझ़ा मेरी बशैघे धैल़ी बी नकदरी! 39तिन्नैं किऐ आपणैं शोहरू-शोहरी मुहुर्ती सेटा बल़ीदान अर तैहा ई धैल़ी आऐ तिंयां मेरै पबित्र भबना लै! इहअ करै लाई तिन्नैं मेरै भबनै छ़ोत।
40“इनै दुही बैहणी शादै दूरा-दूरा का समाद दैई दूत अर तिंयां बी पुजै। ईंयां दुहै बैहणी रही तिन्नां लै न्हैऊई-धोहुई, हार-शंगार करी अर आछी दी काज़ल़ लाई 41पलगा प्रैंदै बधिया च़ैन छ़ैई बेशी! तिन्नां सम्हनै त मेरअ पलग बी, तेथ त मेरअ धूप अर जैतूनो तेल बी ज़ुंण मंऐं तिन्नां लै थिअ दैनअ द। 42इना फेर हआ तै आल-मस्ती दी लोगे छ़ुंढ ठुल़्दै लागै दै, तिन्नां संघै तै शराबी मणछ बी ज़ुंण तिन्नैं दुही रेगीस्ताना बाखा तै शादै दै। तिन्नैं बन्हैऊंईं इना दुही का बांगा अर तिन्नें मुंडै लाऐ मुगट। 43हुंह लागअ सोठदअ, ‘ईंयां ता कंज़री आसा! कंज़रैई करदी हुई ईंयां प्रोढी तज़ी बी च़ाहा लोग इना संघै सुत्तणअ!’ 44किल्हैकि तिंयां डेओआ इना सेटा भिई-भिई! ज़िहै लोग कंज़री सेटा डेओआ तिहै ई डेऊऐ तिंयां ओहोला अर ओहोलीबा सेटा। 45धर्मीं मणछा खोज़णअ इना दुही बेटल़ीओ दोश। तिन्नां दैणीं तिन्नां लै सह सज़ा ज़ुंण इना भेटी लोल़ी। किल्हैकि ईंयां निं मुल्है शुची-पाक्की रही। इनै किई खास्सी हत्या।”
46“परमेशर बिधाता बोला इहअ, ‘खास्सै लोग आणा झाल़ी कि तिंयां इना दुही बैहणी हंते अर लुटे। 47तिन्नैं खास्सै लोगै लोल़ी इना लै पात्थरो ढो दैनअ अर ईंयां लोल़ी तलबारा करै काटी, इने शोहरू लोल़ी तिन्नैं मारी पाऐ अर इने घअर लोल़ी ढोल़ी पाऐ। 48इहअ करै करनी मुंह सारै देशा का अह कंज़रैई खतम। अह हणीं सोभी बेटल़ी लै चतैनगी। तै निं तिंयां इना दूई ज़ेही बरेल़्हदी लागणीं अर नां कंज़रैई करनी।’ 49तम्हां दूई बैहणी ज़ुंण बरेल़्हुई, तेऊ पापो फल लागणअ तम्हां भुगतणअ। मुंह लणी तम्हां लै थारी मुहुर्ती पूज़ा करने सज़ा दैई। तेखअ लागणअ तम्हां का थोघ कि हुंह आसा थारअ परमेशर बिधाता।”
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दूई कंज़री बैहणी
1बिधाता बोलअ मुल्है इहअ, 2“मणछा, एकी ज़मानै थिई दूई शोहरी, तिंयां ती सक्की बैहणी। 3ज़ेतरी तिन्नां धख ज़ुआनी आई, तिंयां मुक्की कई मर्धा संघै सुत्ती-बेशी भ्रष्ट हई! संघा लागी मिसर देशै कंज़रैई करदी। 4ज़ेठी नाअं त ओहोला सामरी नगरी, अर कान्हीं नाअं त ओहोलीबा मतलब एरुशलेम नगरी। मंऐं किअ तिन्नां दुही संघै बैह अर तिन्नां का हुऐ मेरै खास्सै-शोहरू-शोहरी। 5ओहोला ती मेरी पर सह रही तज़ी बी कंज़रैई करदी लागी! सह लोभणूंई अश्शूरी मर्धा लै। 6सह लोभणूंई अश्शूरी सैनापति अर कार-करिंदै लै। तिंयां तै हेरनै बेघै बित्तै अर शूरबीर ज़ुंण निली बर्दी बान्हीं घोल़ै प्रैंदै शुंआर हआ तै। 7ओहोला सुत्ती तिन्नां सोभी कार-करिंदै संघै बारी-बारी। सह लोभणूंईं तिन्नां अश्शूरी शूर-बीरा लै एही कि सह कंझ़रूई तिन्नां संघै ज़िहअ तेसो दिल बोलअ तेही। तैहा लाई तिन्नें मुहुर्ती पूज़ी करै आप्पू लै छ़ोत। 8मिसर देशै ज़िहअ सह आपणीं देहीओ बपार करा ती, सह निं तैहा छ़ाडअ आथी। तैहा त होछ़ी उझै तेतो भैस्स पल़अ द। ज़ेतरी तैहा धख ज़ुआनी आई ती, तेतरी ती सह कई मर्धा संघै सुत्ती-बेशी भ्रष्ट मुक्की दी हई! 9तैही दैनी मंऐं सह तिन्नां अश्शूरी लोभी का सभाल़ी ज़हा लै सह लोभणूंई दी आसा ती। 10तिन्नैं किई सह पठ नांगी, तेसे शोहरू-शोहरी डाहै तिन्नैं कैद करी अर खिरी पाई सह तलबारा करै मारी। ज़ुंण बूरी दशा तेसे हुई, तिंयां गल्ला हुई होरी बेटल़ी जैंदरी सारै दी मशूर।
11“ओहोलीबै भाल़अ आपणीं आछी कि तेसे ज़ेठी बैहण केही हुई बरैबाद, पर तज़ी बी सुत्ती-बेठी सह तिन्नां ई संघै! सह निखल़ी कंज़रैई करना लै तैहा का बी च़ार गंईं आजू। 12सह लोभणूंई अश्शूरी सैनापति अर कार-करिंदै लै खास्सी। तिंयां तै हेरनै बेघै बित्तै अर शूरबीर ज़ुंण पटाघै झिकल़ै बान्हीं घोल़ै प्रैंदै शुंआर हआ तै। 13मंऐं भाल़अ कि सह हुई पठ छ़ोतली। सह कान्हीं निखल़ी ज़ेठी का बी खास्सी बूरी।
14“ओहोलीबा कंझ़रूई बेघै बूरी, सह निखल़ी आपणीं दाई का बी आजू। तैहा भाल़ी कसदी मर्धे मुहुर्ती। ज़ुंण भित्ती दी खेल़्तर काढी तै बणाऐं दै, तिंयां ती पटाघै लाला रांगा करै रांगी दी, 15तिन्नां मर्धे कुछी ती गाची बान्हीं दी अर तिन्नें मुंडै तै साफै बान्हैं दै अर साफैओ पुंझ़ हआ उंधै च़ुंढदअ लागअ द। तिंयां सोभ शुझिआ तै बाबेल देशे कार-करिंदै ज़ुंण तिन्नें ज़ल्म भूमी आसा। 16ज़िहै ई तैहा तिंयां भाल़ै, सह लोभणूंई तिन्नां लै पठी, तेखअ दैनअ तैहा दूत छ़ाडी बाबेल देशा लै समाद। 17बाबेल देशे मर्ध आऐ, संघा सुत्तै तैहा संघै। तिन्नैं किई सह छ़ोतली। ज़ांऊं सह पठी भ्रष्ट मुक्की हई, तेखअ रुंझ़ुई सह तिन्नां का अर तेखअ हटअ तेसो दिल तिन्नां का। 18सह कंझ़रूई खास्सै मर्धा संघै, तैहा निं तेते शरम ई लागदी ती। सोभी का थिअ थोघ कि सह आसा कंज़री हुई दी। हुंह हुअ तैहा का दुखी, संघा हुअ तैहा का दूर ज़िहअ तेसे दाई का दूर हुअ त। 19पर तेसे देहीए भुख निं तज़ी बी खतम हुई! सह च़ाहा ती होर बी खास्सै मर्धा संघै सुत्ती मौज़ करनी! सह लागी आपणीं ज़ुआनीए धैल़ै आद करदी ज़िना धैल़ै सह मिसर देशै कंज़रैई करा ती। 20सह लोभणूंई आपणैं तिन्नां इहै लोभी लै ज़सरै गुप्त आंग गाधै ज़िहै थिऐ अर ज़सरअ बीज घोल़ै ज़िहअ आसा। 21ओहोलीबा, तूह च़ाहा तिहअ पाप भिई करनअ, ज़ुंण तंऐं तेरी ज़ुआनीए धैल़ै मिसर देशै किअ! ज़िधी मर्ध तेरी च़ूई दी हाथ लाआ तै अर ज़िधी तूह भ्रष्ट हुई!
एरुशलेम नगरी लै परमेशरो नसाफ
22“ओहोलीबा, हुंह परमेशर बिधाता बोला ताल्है ऐबै इहअ, ‘तूह करा ऐबै तिन्नां तेरै लोभी का नफरत, पर मुंह पजैल़णैं तिंयां इधी। तिन्नां गोटणी तूह फेरा-फेर। 23मुंह पजैल़णैं बाबेल देशे लोग खासकर कसदी इधी। पकोद, शोआ अर कोआ नगरीए लोग बी पजैल़णैं मुंह इधी। अश्शूरी लोग बी आणनैं मुंह इधा लै। इहअ करै पजैल़णैं मुंह तिंयां सोभ बित्तै लोभणैं आल़ै ज़ुआन सैनापति, राज़पाल, जोधै अर सोभ कार-करिंदै घोल़े शुंआरी दी इधी। 24तिन्नां पल़णअ ताल्है उतर दिशा बाखा चुटी। तिन्नां आणनीं खास्सी बडी सैना, तिंयां एछणैं खास्सै लोग रथ अर घोल़ै प्रैंदै बेशी। तिन्नैं हणैं हाथै ढाल़ बर्छ़ै ढाकै दै, मुंडै हणैं टोप लाऐ दै। तिन्नां गोटणी तूह फेरा-फेर, मुंह बी दैणीं तूह तिन्नां का सभाल़ी अर तिन्नां करनअ तेखअ तिन्नें आपणैं बधाने साबै तेरअ नसाफ। 25तंऐं किअ मुल्है विश्वास घात, तैही आसा मुंह ताल्है रोश्शै आई दी। मुंह दैणअ हणैं कि ईंयां ताल्है रोश्शै नर्दैई हई सज़ा दैए। तिन्नां पाणै तेरै नाक-कान काटी। ज़ुंण मणछ बच़ै दै आसा, तिंयां पाणै तिन्नां तलबारा करै काटी मारी। तिन्नां छ़ड़ैऊंणैं ताखा तेरै शोहरू-शोहरी अर ज़ुंण बी बच़अ द होए तेथ चैल़णीं तिन्नां आग। 26तिन्नां पाणै तेरै झिकल़ै धेल़ी अर तेरै गैहणैं बी निंणै ताखा छ़ड़ैऊई। 27तेरअ बरेल़्हणअ अर कंज़रैई करनी मुंह खतम ज़ुंण तंऐं मिसर देशे लोगा का शिखल़ी ती। तेखअ निं ताह मिसर देशे लोगा बाखा भाल़णअ बी अर नां तिंयां ताह आद करनै।’
28“ओहोलीबा, हुंह परमेशर बिधाता बोला ऐबै ताल्है कि तूह दैणीं मुंह तिन्नां ई का सभाल़ी ज़हा लै तूह ऐबै नफरत करा। ज़हा का रुंझ़ुई तंऐं मुंह फरेऊअ, ऐबै हणैं तेरै मालक तिंयां ई। 29तिन्नां डाहणीं ताह संघै ज़ीद, ज़ुंण बी तेरी कमाई आसा, सह छ़ड़ैऊंणी तिन्नां ताखा पोर्ही। तिन्नां डाहणीं तूह तेरै झिकल़ै खोल्ही नांगी शोटी। ज़ांऊं तूह नांगी हणीं, तेखअ हणीं तिंयां गल्ला प्रगटी कि तूह कहा-कहा संघै आसा कंझ़रूई दी। 30तंऐं किअ मुल्है विश्वास घात, तैही दैनी मंऐं ताल्है एही सज़ा। तूह लोभणूंई होरी देशा लै। तिन्नें मुहुर्ती पूज़ी करै लाई तंऐं आप्पू लै छ़ोत। 31ज़िहअ तेरी ज़ेठी बैहणी किअ, तंऐं बी किअ तिहअ ई। ज़ेही मंऐं तैहा लै सज़ा दैनी, ताल्है बी दैणीं मुंह तेही ई सज़ा।
32“ऐबै शुण, हुंह परमेशर बिधाता बोला इहअ,
‘ताल्है दैणअ मुंह तेऊ ई पारू का झुटणा लै
ज़ेता का मंऐं तेरी ज़ेठी बैहणी का पणैऊंअं त।
अह आसा बडअ अर डुघअ पारू, तेथ अक्का बतेर्हअ।
सह सज़ा हणीं ताल्है एही कि लोग लागणै ताल्है हास्सदै अर सुहांगा करदै।
33तेता का झुटी हणीं तूह नशै दी बेगरी,
सह प्रिहअ आसा डअर अर बरैबादीओ।
ज़ेही तेरी ज़ेठी बैहण सामरी पठ बरैबाद हुई, तिहअ निं ताह दी बी किछ़ बच़णअ।
34तेऊ पारू का लागणअ ताह पठी झुटणअ! तेखअ पाणअ ताह सह फाल़ी।
तेते फुटै दै ठिक्करै करै ब्रूज़णी ताह बेगरै हई आपणीं च़ूई दी क्रिंज़ा!
अह गल्ल डाही मंऐं परमेशर बिधाता बोली।’”
35मेरअ मालक बिधाता बोला ऐबै इहअ, “तंऐं हेरअ हुंह बिस्सरी अर तंऐं आसा मुंह बाखा लै पिठ डाही दी फरेऊई! तूह कंझ़रूई खास्सै संघै अर लाई आप्पू लै छ़ोत। ऐबै पल़णीं ताह तेते सज़ा भुगतणी।”
दुही बैहणी लै परमेशरो नसाफ
36बिधाता बोलअ मुखा इहअ, “मणछा, ऐबै करै तूह ओहोले अर ओहोलीबो नसाफ। ज़ुंण तिन्नैं च़िल़्हखरै काम किऐ, तेतो दोश खोज़ तिन्नां का तूह। 37तिन्नैं किई कंज़रैई, तिन्नैं किई हत्या! मुंह छ़ाडी लागी तिंयां होरी देअआ पूज़दी! ज़ुंण मुंह मेरै तिन्नां का शोहरू-शोहरी हुऐ तै, तिंयां किऐ इनै दुही तिन्नां मुहुर्ती लै बल़ीदान करी आगी दी हूम। 38एतरअ, हुअ, तिन्नैं लाई मेरी पबित्र ज़ैगा बी छ़ोत अर तिंयां समझ़ा मेरी बशैघे धैल़ी बी नकदरी! 39तिन्नैं किऐ आपणैं शोहरू-शोहरी मुहुर्ती सेटा बल़ीदान अर तैहा ई धैल़ी आऐ तिंयां मेरै पबित्र भबना लै! इहअ करै लाई तिन्नैं मेरै भबनै छ़ोत।
40“इनै दुही बैहणी शादै दूरा-दूरा का समाद दैई दूत अर तिंयां बी पुजै। ईंयां दुहै बैहणी रही तिन्नां लै न्हैऊई-धोहुई, हार-शंगार करी अर आछी दी काज़ल़ लाई 41पलगा प्रैंदै बधिया च़ैन छ़ैई बेशी! तिन्नां सम्हनै त मेरअ पलग बी, तेथ त मेरअ धूप अर जैतूनो तेल बी ज़ुंण मंऐं तिन्नां लै थिअ दैनअ द। 42इना फेर हआ तै आल-मस्ती दी लोगे छ़ुंढ ठुल़्दै लागै दै, तिन्नां संघै तै शराबी मणछ बी ज़ुंण तिन्नैं दुही रेगीस्ताना बाखा तै शादै दै। तिन्नैं बन्हैऊंईं इना दुही का बांगा अर तिन्नें मुंडै लाऐ मुगट। 43हुंह लागअ सोठदअ, ‘ईंयां ता कंज़री आसा! कंज़रैई करदी हुई ईंयां प्रोढी तज़ी बी च़ाहा लोग इना संघै सुत्तणअ!’ 44किल्हैकि तिंयां डेओआ इना सेटा भिई-भिई! ज़िहै लोग कंज़री सेटा डेओआ तिहै ई डेऊऐ तिंयां ओहोला अर ओहोलीबा सेटा। 45धर्मीं मणछा खोज़णअ इना दुही बेटल़ीओ दोश। तिन्नां दैणीं तिन्नां लै सह सज़ा ज़ुंण इना भेटी लोल़ी। किल्हैकि ईंयां निं मुल्है शुची-पाक्की रही। इनै किई खास्सी हत्या।”
46“परमेशर बिधाता बोला इहअ, ‘खास्सै लोग आणा झाल़ी कि तिंयां इना दुही बैहणी हंते अर लुटे। 47तिन्नैं खास्सै लोगै लोल़ी इना लै पात्थरो ढो दैनअ अर ईंयां लोल़ी तलबारा करै काटी, इने शोहरू लोल़ी तिन्नैं मारी पाऐ अर इने घअर लोल़ी ढोल़ी पाऐ। 48इहअ करै करनी मुंह सारै देशा का अह कंज़रैई खतम। अह हणीं सोभी बेटल़ी लै चतैनगी। तै निं तिंयां इना दूई ज़ेही बरेल़्हदी लागणीं अर नां कंज़रैई करनी।’ 49तम्हां दूई बैहणी ज़ुंण बरेल़्हुई, तेऊ पापो फल लागणअ तम्हां भुगतणअ। मुंह लणी तम्हां लै थारी मुहुर्ती पूज़ा करने सज़ा दैई। तेखअ लागणअ तम्हां का थोघ कि हुंह आसा थारअ परमेशर बिधाता।”
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