ज्ञैन 7
7
ज़िन्दगी दी सोभी का राम्बल़अ
1भलअ बभार शोभली बास्से किम्मती तेला का अर मरनैओ धैल़अ हआ ज़ल्म धैल़ै का बधिया।
2धामा खाणैं का आसा गई धैल़ी कहा चिंजदै डेऊणअ बधिया, किल्हैकि ताकि ज़ुंण ज़िऊंदै मणछ आसा, तिंयां राम्बल़ै करै सोठे कि मौत आसा आजू तिन्नां न्हैल़ी लागी दी।
3खुशी का आसा शोग बधिया, किल्हैकि दुखा करै एछा होर बी खास्सी समझ़।
4ज़ुंण कबल्लअ खुश रहणें बारै सोठा, सह आसा ऐडअ, अक्ली आल़अ मणछ करा मौते बारै बच़ार।
5ऐडै मणछे गिहा शुणनै का भली हआ अक्ली आल़ै मणछे झ़ाहल़ शुणनी।
6ऐडै मणछे हास्सी हआ ज़ोल़्ठै दी शाची दी आगी ज़ेही। अह बी आसा बृथा।
7ज़ै कुंण अक्ल हई बी कहा ठगे, सह करा ऐडै ज़िहअ काम। रेशपता लै झ़ूरनै आल़अ करा आपणअ च़ाल-च़लण पठी बरैबाद।
8काम शुरू करनै का राम्बल़अ हआ काम पूरअ करनअ। घमंड करनै का राम्बल़अ हआ सबर करनअ।
9ऐडै मणछा एछा धखी का रोश्शै अर ज़ीद डाहणीं बी हआ ऐडी गल्ल।#याक. 1:19
10इहअ सुआल करनअ निं अक्ल आथी, “आझ़ा का पैहलै किल्है थिई सोभै गल्ला बधिया?”
11माया संघै लोल़ी खास्सी अक्ल हुई, ज़िन्दगी ज़िऊंणां लै दैआ ईंयां दुहै च़िज़ा नफअ। 12अक्ली अर ढब्बै करै जाआ सोभै गल्ला भेटी, पर ज़िन्दगी भेटा सिधी अक्ली करै।
13ऐहा गल्ला दी करनअ बच़ार कि बिधाता केऊ साबै करा काम, ज़ै बिधाता किज़ै च़ीज़ कुंगल़ी आसा बणाईं दी, तेता कै तम्हैं आज़री करी सका? निं कधि करी सकदै! 14सुबधीए पलका रहणअ खुश अर ज़ेभै खरी पल़ी, तेभै डाहणीं अह गल्ल आद कि बिधाता आसा खरी अर सुबधी दुहै गल्ला डाही दी, इहअ थोघ निं मणछा कधि लागदअ कि आजू किज़ै आसा हणैं आल़अ।
ज़िन्दगीए धख सुआल
15मंऐं भाल़ी आपणीं ऐहा बृथा ज़िन्दगी दी सोभै गल्ला। भलै मणछ जाआ खारकी अमरा मरी अर कदुष्ट मणछ भाल़ै मंऐं खास्सी अमरा ज़िऊंदै! 16तै बोला हुंह कि खास्सै धर्मीं अर छ़लैघ बणी करै किल्है हणअ आप्पू ई बरैबाद? 17दुजी बाखा बोलूं, खास्सै कदुष्ट अर ऐडै बी निं रहणअ! आपणीं अमर हणैं का आजी किल्है मरनअ? 18इना दुही गल्ला मांझ़ा-मांझ़ीए बात डाहणीं ढाकी। इहअ हई बी सका ज़ै तम्हैं असली दी बिधातो अदर करे।
19अक्ली आल़ै मणछा हआ नगरीए दस प्रधाना का खास्सअ ज़ोर।
20एऊ सारै संसारै निं इहअ कोहै मणछ आथी ज़ुंण सदा भलअ ई करा अर ज़सरै भलै कधू पाप निं हुअ होए।#रोम. 3:10
21लोग बोला कई गल्ला, तेते तेथ निं खास्सअ धैन दैणअ, इहअ निं हआ तम्हां का इहअ शुण्हिंए कि थारअ दास बी दैआ तम्हां लै फिटक, 22तम्हैं कै कहा होरी लै कधि फिटक निं दैनअ?
23मंऐं लाई इना गल्ला परखणां लै खास्सी अक्ल, हुंह च़ाहा त खास्सअ अक्ली आल़अ हणअ पर अह गल्ल हुई मेरै बशा का बागै। 24किहअ करै च़ाल्लअ कहा का एतो थोघ लागी कि ज़िन्दगीओ कै मतलब आसा? अह गल्ल आसा बेघै बडी अर समझ़णा लै बडी कठण। 25पर मंऐं डाहअ आपणअ धैन मन्न पहल़णा लै अर ज्ञैन झाल़णां लै लाई, हुंह च़ाहा त अक्ल लोल़णी अर मेरै सुआलो ज़बाब अर ऐहा गल्ला शिखल़णअ कि कदुष्ट, ऐडी गल्ल अर कबुध केही हआ।
26तेखअ लागअ मुखा थोघ कि ज़ुंण दाह मणछे शकारी बेटल़ी दैआ, सह दाह हआ मरनै का बी खास्सी। तेसे झ़ूरी करनी आसा शकारीओ ज़ज़ाल़ अर मल़्हैची दैणीं आसा शांघल़ी लोहै। एही बेटल़ी का सका सह ई मणछ बच़ी ज़हा का बिधाता खुश आसा, पर पापी मणछ निं तेसे शकार हणैं का बच़ी सकदै। 27गूरू बोला इहअ, “ऐहा गल्लो नचोल़ निखल़अ मेरै अह ई अर सोभी साबै ज़ाच़ी-भाल़ी भेटी मुंह अह ई गल्ल। 28हुंह थक्कअ होर लोल़ी-लोल़ी पर तेथ निं एता सुआई किछ़ भेटअ। हज़ार मर्धा मांझ़ै जाणअ एक मर्ध भेटी बी ज़ुंण इज़त करनै जोगी होए, पर बेटल़ी मांझ़ै निं एक बी! 29मंऐं शिखल़ी एही गल्ल कि ज़धू बिधाता मणछ बणाऐं, तेऊ बणाऐं तिंयां शुचै-पाक्कै, पर मणछै सोठी ऐबै कई उंबल़ी बिक्री।”
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1भलअ बभार शोभली बास्से किम्मती तेला का अर मरनैओ धैल़अ हआ ज़ल्म धैल़ै का बधिया।
2धामा खाणैं का आसा गई धैल़ी कहा चिंजदै डेऊणअ बधिया, किल्हैकि ताकि ज़ुंण ज़िऊंदै मणछ आसा, तिंयां राम्बल़ै करै सोठे कि मौत आसा आजू तिन्नां न्हैल़ी लागी दी।
3खुशी का आसा शोग बधिया, किल्हैकि दुखा करै एछा होर बी खास्सी समझ़।
4ज़ुंण कबल्लअ खुश रहणें बारै सोठा, सह आसा ऐडअ, अक्ली आल़अ मणछ करा मौते बारै बच़ार।
5ऐडै मणछे गिहा शुणनै का भली हआ अक्ली आल़ै मणछे झ़ाहल़ शुणनी।
6ऐडै मणछे हास्सी हआ ज़ोल़्ठै दी शाची दी आगी ज़ेही। अह बी आसा बृथा।
7ज़ै कुंण अक्ल हई बी कहा ठगे, सह करा ऐडै ज़िहअ काम। रेशपता लै झ़ूरनै आल़अ करा आपणअ च़ाल-च़लण पठी बरैबाद।
8काम शुरू करनै का राम्बल़अ हआ काम पूरअ करनअ। घमंड करनै का राम्बल़अ हआ सबर करनअ।
9ऐडै मणछा एछा धखी का रोश्शै अर ज़ीद डाहणीं बी हआ ऐडी गल्ल।#याक. 1:19
10इहअ सुआल करनअ निं अक्ल आथी, “आझ़ा का पैहलै किल्है थिई सोभै गल्ला बधिया?”
11माया संघै लोल़ी खास्सी अक्ल हुई, ज़िन्दगी ज़िऊंणां लै दैआ ईंयां दुहै च़िज़ा नफअ। 12अक्ली अर ढब्बै करै जाआ सोभै गल्ला भेटी, पर ज़िन्दगी भेटा सिधी अक्ली करै।
13ऐहा गल्ला दी करनअ बच़ार कि बिधाता केऊ साबै करा काम, ज़ै बिधाता किज़ै च़ीज़ कुंगल़ी आसा बणाईं दी, तेता कै तम्हैं आज़री करी सका? निं कधि करी सकदै! 14सुबधीए पलका रहणअ खुश अर ज़ेभै खरी पल़ी, तेभै डाहणीं अह गल्ल आद कि बिधाता आसा खरी अर सुबधी दुहै गल्ला डाही दी, इहअ थोघ निं मणछा कधि लागदअ कि आजू किज़ै आसा हणैं आल़अ।
ज़िन्दगीए धख सुआल
15मंऐं भाल़ी आपणीं ऐहा बृथा ज़िन्दगी दी सोभै गल्ला। भलै मणछ जाआ खारकी अमरा मरी अर कदुष्ट मणछ भाल़ै मंऐं खास्सी अमरा ज़िऊंदै! 16तै बोला हुंह कि खास्सै धर्मीं अर छ़लैघ बणी करै किल्है हणअ आप्पू ई बरैबाद? 17दुजी बाखा बोलूं, खास्सै कदुष्ट अर ऐडै बी निं रहणअ! आपणीं अमर हणैं का आजी किल्है मरनअ? 18इना दुही गल्ला मांझ़ा-मांझ़ीए बात डाहणीं ढाकी। इहअ हई बी सका ज़ै तम्हैं असली दी बिधातो अदर करे।
19अक्ली आल़ै मणछा हआ नगरीए दस प्रधाना का खास्सअ ज़ोर।
20एऊ सारै संसारै निं इहअ कोहै मणछ आथी ज़ुंण सदा भलअ ई करा अर ज़सरै भलै कधू पाप निं हुअ होए।#रोम. 3:10
21लोग बोला कई गल्ला, तेते तेथ निं खास्सअ धैन दैणअ, इहअ निं हआ तम्हां का इहअ शुण्हिंए कि थारअ दास बी दैआ तम्हां लै फिटक, 22तम्हैं कै कहा होरी लै कधि फिटक निं दैनअ?
23मंऐं लाई इना गल्ला परखणां लै खास्सी अक्ल, हुंह च़ाहा त खास्सअ अक्ली आल़अ हणअ पर अह गल्ल हुई मेरै बशा का बागै। 24किहअ करै च़ाल्लअ कहा का एतो थोघ लागी कि ज़िन्दगीओ कै मतलब आसा? अह गल्ल आसा बेघै बडी अर समझ़णा लै बडी कठण। 25पर मंऐं डाहअ आपणअ धैन मन्न पहल़णा लै अर ज्ञैन झाल़णां लै लाई, हुंह च़ाहा त अक्ल लोल़णी अर मेरै सुआलो ज़बाब अर ऐहा गल्ला शिखल़णअ कि कदुष्ट, ऐडी गल्ल अर कबुध केही हआ।
26तेखअ लागअ मुखा थोघ कि ज़ुंण दाह मणछे शकारी बेटल़ी दैआ, सह दाह हआ मरनै का बी खास्सी। तेसे झ़ूरी करनी आसा शकारीओ ज़ज़ाल़ अर मल़्हैची दैणीं आसा शांघल़ी लोहै। एही बेटल़ी का सका सह ई मणछ बच़ी ज़हा का बिधाता खुश आसा, पर पापी मणछ निं तेसे शकार हणैं का बच़ी सकदै। 27गूरू बोला इहअ, “ऐहा गल्लो नचोल़ निखल़अ मेरै अह ई अर सोभी साबै ज़ाच़ी-भाल़ी भेटी मुंह अह ई गल्ल। 28हुंह थक्कअ होर लोल़ी-लोल़ी पर तेथ निं एता सुआई किछ़ भेटअ। हज़ार मर्धा मांझ़ै जाणअ एक मर्ध भेटी बी ज़ुंण इज़त करनै जोगी होए, पर बेटल़ी मांझ़ै निं एक बी! 29मंऐं शिखल़ी एही गल्ल कि ज़धू बिधाता मणछ बणाऐं, तेऊ बणाऐं तिंयां शुचै-पाक्कै, पर मणछै सोठी ऐबै कई उंबल़ी बिक्री।”
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