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ज्ञैन 5

5
बिधाता लै मानत लणी पूरी करी
1ज़ेभै तम्हैं बिधाता सेटा तेऊए पबित्र ज़ैगा डेओए, तेभै डाहै बडअ धैन। तम्हैं करनी इहअ समझ़णें कोशिश कि बिधाता तम्हां लै किज़ै करना लै बोला, ऐडै ज़िहअ बल़ीदान निं करी ज़हा का थोघ ई निं हंदअ कि भलअ आसा कि बूरअ! 2बोल़णैं का आजी लणअ बच़ार करी, हेरा-हेरी निं बिधाता लै नथोघी मानत मंदै लागणअ। सह आसा स्वर्गै अर तम्हैं आसा पृथूई दी, तैही निं साबा का बाधू गल्‍ला बोल़णीं। 3किल्हैकि तम्हां ज़ेतरी खास्सी फिकर पल़े, तम्हां रहणैं तेतरै खास्सै सुपनै लागी, अर खास्सअ चिंजी करै जाआ किज़ै नां किज़ै ऐडी गल्‍ल छ़ुटी ई।
4ज़ेभै तम्हैं बिधाता लै मानत मने, तेता करै ज़ेतरअ छ़ेक्‍कै हई सका पूरी। सह निं ऐडै लै खुश हंदअ। तम्हैं ज़ेही मानत मनी, सह करनी तेही ई पूरी। 5मानत मनी पूरी नांईं करनै का भलअ आसा इहअ कि तै निं मानत मनणी ई आथी। 6आप्पू लै निं आपणैं ई बैणा करै आफ़त पाई, नां परमेशरे प्रोहता सेटा इहअ बोली, “मंऐं मनी अह मानत भूला-बिस्सरा।” थारै इहै बैण शूणीं सका बिधाता थारै सोभै काम बरैबाद करी, तैही निं इहै बैण बोल़णैं ज़ेता करै बिधाता रोश्शै एछा। 7किज़ू कामां करनैओ बाहिदअ करी सह काम नांईं करनअ हआ धैल़ी दपहरै सुपनै भाल़णैं ज़िहअ बृथा। एता का करनअ परमेशरो अदर अर ज़ुंण तम्हैं ज़बान किई सह करनी पूरी।
अह ज़िन्दगी ई आसा बृथा
8एता लै निं रहैन हई कि सरकारै लाऐ रैनै गरीब हंती अर नां तिन्‍नों नसाफ करदी अर तिन्‍नों हक बी लाअ छ़ड़ैऊई। साहबा प्रैंदै हआ तेऊओ साहब अर तिन्‍नां प्रैंदै हआ होर बी बडअ साहब।
9खेचे पज़ैआ हआ सोभी लै, राज़ै बी हआ तेता ई करै नफअ!
10ज़ुंण ढब्बै-धेल्‍लै लै खास्सअ झ़ूरा, सह निं तेता करै बी कधि रज़दअ, ज़ुंण इहअ सोठा कि सेठ हई हणीं तेऊए नंद, अह गल्‍ल बी आसा बृथा। 11तम्हैं ज़ेतरै खास्सै सेठ होए, लोगा हणीं तम्हां का आशा बी तेतरी ई खास्सी। सेठ हणैंओ नफअ आसा सिधअ एचल़ी कि तिंयां ढब्बै भाल़णैं तम्हां आपणीं आछी करै पठी खर्च़ हंदै! 12मैन्थ करनै आल़ै का खाणां लै थोल़अ ई होए, पर तिंयां सुत्ता राची राम्बल़ी निंजा। पर सेठ मणछा हआ इहअ फिकर पल़अ द कि तिन्‍नां निं राची नींज एछदी।
13मंऐं भाल़ी एऊ संसारै एक एही बेगरी गल्‍ल, लोग डाहा ढब्बै-धेल्‍लै बच़ाऊई कि आजू हणीं तेता करै तिन्‍नें गरज़ पूरी, 14खिरी हआ केभै नच़ानक तिन्‍नें ढब्बै-धेल्‍लै गलत बपारा दी बरैबाद अर तेखअ निं पिछ़ू तिन्‍नें लान्हैं-सुन्हैं लै बी किछ़ै बच़दअ! 15ज़िहै हाम्हैं आपणीं माए ओदरा का एऊ संसारै नांगै पैईदा हुऐ, तिहै ई डेऊणैं हाम्हैं एऊ संसारा छ़ाडी रित्तै। नां हाम्हैं आपणीं सारी ज़िन्दगीए मैन्था का आप्पू संघै किज़ै निंईं सकदै!#1 तिम. 6:7 16अह गल्‍ल आसा बेघै बूरी! ज़िहै आऐ तै हाम्हैं डेऊणैं तिहै ई रित्तै हाथै! तै हाम्हां किज़ै पुआज़अ भेटअ? सारी ज़िन्दगी मैन्थ करनी, बृथा हुई! 17सारी ज़िन्दगी काटी हाम्हैं न्हैरै, दाह-दुख अर रोश्शा-दोशा दी!
18मंऐं काढअ एतो नचोल़ इहअ कि हाम्हां लै आसा भलअ इहअ ई कि बिधाता दैनी दी ऐहा धख ज़ेही ज़िन्दगी रहणअ हाम्हां आपणैं कामां दी मगन अर खाई-पिई राज्ज़ी-मौज़ी किल्हैकि म्हारअ नसीब आसा अह ई। 19ज़ै बिधाता कहा लै धन अर ज़ैदात दैए, सह डाहा तेऊ तेता भोगणा लै ताज़ै-नरोगै बी। तै आसा भलअ इहअ कि मणछ मैन्थ करना लै मगन रहे। अह आसा हाम्हां लै बिधातो दान। 20बिधाता डाहणैं हाम्हैं तै कबल्‍लै खुश अर तेखअ निं हाम्हां कबल्‍ली इहअ फिकर करने ज़रुरत आथी कि ज़िन्दगी केही धख ज़ेही आसा।

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ज्ञैन 5: OSJ

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