स्तोत्र 91:5-6
स्तोत्र 91:5-6 HCV
तू न तो रात्रि के आतंक से भयभीत होगा, न ही दिन में छोड़े गए बाण से, वैसे ही न उस महामारी से, जो अंधकार में छिपी रहती है, अथवा उस विनाश से, जो दिन-दोपहरी में प्रहार करता है.
तू न तो रात्रि के आतंक से भयभीत होगा, न ही दिन में छोड़े गए बाण से, वैसे ही न उस महामारी से, जो अंधकार में छिपी रहती है, अथवा उस विनाश से, जो दिन-दोपहरी में प्रहार करता है.