स्तोत्र 50:10-11
स्तोत्र 50:10-11 HCV
क्योंकि हर एक वन्य पशु मेरा है, वैसे ही हज़ारों पहाड़ियों पर चर रहे पशु भी मेरे ही हैं. पर्वतों में बसे समस्त पक्षियों को मैं जानता हूं, मैदान में चलते फिरते सब प्राणी भी मेरे ही हैं.
क्योंकि हर एक वन्य पशु मेरा है, वैसे ही हज़ारों पहाड़ियों पर चर रहे पशु भी मेरे ही हैं. पर्वतों में बसे समस्त पक्षियों को मैं जानता हूं, मैदान में चलते फिरते सब प्राणी भी मेरे ही हैं.