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स्तोत्र 30:5

स्तोत्र 30:5 HCV

क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है कि रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.

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स्तोत्र 30:5 - क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है कि रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.स्तोत्र 30:5 - क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है कि रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.स्तोत्र 30:5 - क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है कि रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.स्तोत्र 30:5 - क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है कि रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.स्तोत्र 30:5 - क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है कि रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.

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