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रोमी 2:5

रोमी 2:5 MAI

मुदा अपन जिद्दीपन आ अपरिवर्तित हृदयक कारणेँ अहाँ अपना लेल परमेश्‍वरक प्रकोप केँ ओहि दिनक लेल संचित कऽ रहल छी जहिया परमेश्‍वरक प्रकोप आ उचित न्‍याय प्रगट होयत।

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