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1 यूहन्‍ना 3

3
1सोचू! पिता अपना सभ सँ कतेकटा प्रेम कयने छथि, जे अपना सभ परमेश्‍वरक सन्‍तान कहाबी! और वास्‍तव मे सैह छीहो। संसार अपना सभ केँ नहि चिन्‍हैत अछि, से एहि कारणेँ जे हुनको नहि चिन्‍हलकनि। 2प्रिय मित्र सभ, अपना सभ एखन परमेश्‍वरक सन्‍तान छी। और भविष्‍य मे की होयब, से एखन तक प्रगट नहि कयल गेल अछि। मुदा ई जनैत छी जे, मसीह जखन फेर औताह तखन अपना सभ हुनके जकाँ होयब, कारण हुनका ठीक ओहने देखबनि जेहन ओ छथि। 3जकरा हुनका सँ ई आशा छैक, से अपना केँ पवित्र रखैत अछि जेना ओ पवित्र छथि।
4जे केओ पाप करैत अछि से परमेश्‍वरक नियमक उल्‍लंघन करैत अछि, कारण पाप सैह अछि, अर्थात् परमेश्‍वरक नियमक उल्‍लंघन कयनाइ। 5मुदा अहाँ सभ जनैत छी जे मसीह पाप दूर करबाक लेल अयलाह, और हुनका मे कोनो पाप नहि छनि। 6जे हुनका मे वास करैत अछि, से पाप नहि करैत रहैत अछि। जे पाप करैत रहैत अछि, से ने हुनका देखने छनि आ ने हुनका चिन्‍हने छनि।
7यौ बौआ सभ! एहि विषय मे अहाँ सभ केँ केओ बहकाबओ नहि! जे केओ धार्मिकताक आचरण करैत रहैत अछि, सैह धार्मिक अछि जेना यीशु मसीह धार्मिक छथि। 8और जे केओ पापक आचरण करैत रहैत अछि, से शैतानक सन्‍तान अछि, कारण शैतान शुरुए सँ पाप करैत आयल अछि। परमेश्‍वरक पुत्र एहि लेल संसार मे अयलाह जे ओ शैतानक काज नष्‍ट करथि। 9जे केओ वास्‍तव मे परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि से पाप नहि करैत रहत, कारण परमेश्‍वरक स्‍वभाव ओकरा मे रहैत छैक। ओ पापक आचरण नहि कऽ सकैत अछि, कारण ओ परमेश्‍वरक सन्‍तान भऽ गेल अछि। 10एही प्रकारेँ अपना सभ चिन्‍हि सकब जे परमेश्‍वरक सन्‍तान के अछि और शैतानक सन्‍तान के अछि—जे धार्मिकताक आचरण नहि करैत अछि से परमेश्‍वरक सन्‍तान नहि अछि, आ ने ओ जे अपना भाय सँ प्रेम नहि करैत अछि।
एक-दोसर सँ प्रेम करी
11जे सम्‍बाद अहाँ सभ शुरू सँ सुनने छी, से यैह अछि—अपना सभ एक-दोसर सँ प्रेम करी। 12काइन जकाँ नहि बनू, जे शैतानक छल और अपन भायक हत्‍या कयलक। ओ भायक हत्‍या किएक कयलक? एहि लेल, जे ओकर अपन काज अधलाह छलैक और ओकर भायक नीक छलैक। 13यौ भाइ सभ, जँ संसार अहाँ सभ सँ घृणा करैत अछि तँ एहि सँ आश्‍चर्यित नहि होउ। 14अपना सभ जनैत छी जे मृत्‍यु मे सँ निकलि कऽ जीवन मे पहुँचि गेल छी, कारण अपना भाय सभ सँ प्रेम करैत छी। जे केओ प्रेम नहि करैत अछि, से मृत्‍यु मे रहैत अछि। 15जे अपना भाय सँ घृणा करैत अछि से हत्‍यारा अछि और अहाँ सभ जनैत छी जे कोनो हत्‍यारा मे अनन्‍त जीवन वास नहि करैत छैक।
16प्रेम की अछि, से अपना सभ एहि सँ जनैत छी, जे प्रभु यीशु मसीह अपना सभक लेल अपन प्राण देलनि। और अपना सभ केँ सेहो अपन भाय सभक लेल अपन प्राण देबाक चाही। 17जँ ककरो संसारक सम्‍पत्ति छैक, और ओ अपना भाय केँ आवश्‍यकता मे देखैत छैक, मुदा ओकरा प्रति अपन हृदय कठोर कऽ लैत अछि, तँ ओकरा मे परमेश्‍वरक प्रेम कोना रहि सकैत छैक? 18प्रिय बौआ सभ, अपना सभ खाली शब्‍द वा बात द्वारा प्रेम नहि करी, बल्‍कि शुद्ध मोन सँ और काज द्वारा करी। 19-20तँ एहि प्रकारेँ अपना सभ जानि जायब जे अपना सभ सत्‍यक सन्‍तान छी। और एहि प्रकारेँ जखन-जखन अपना सभक मोन अपना सभ केँ दोषी ठहराओत, तखन-तखन अपना सभ अपन मोन केँ हुनका सामने शान्‍त कऽ सकब। कारण परमेश्‍वर अपना सभक मोन सँ पैघ छथि, और ओ सभ किछु जनैत छथि।
21प्रिय मित्र सभ, जँ अपना सभक मोन अपना सभ केँ दोषी नहि ठहरबैत अछि, तँ अपना सभ परमेश्‍वरक सामने साहस सँ आबि सकैत छी, 22और जे किछु हुनका सँ मँगबनि से प्राप्‍त करब, किएक तँ हुनकर आज्ञाक पालन करैत छियनि और वैह करैत छी जे हुनका प्रिय छनि। 23हुनकर आज्ञा ई अछि जे अपना सभ हुनकर पुत्र यीशु मसीह पर विश्‍वास करी, और जहिना ओ अपना सभ केँ आदेश देलनि तहिना एक-दोसर सँ प्रेम करी। 24जे केओ हुनकर आज्ञा सभक पालन करैत अछि, से हुनका मे रहैत अछि और ओ तकरा मे। ओ अपना सभ मे वास करैत छथि, से अपना सभ ओहि आत्‍मा द्वारा जनैत छी जे ओ अपना सभ केँ देने छथि।

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