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ग़ज़लुल-ग़ज़लात 1:2
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
वह मुझे अपने मुँह से बोसे दे, क्योंकि तेरी मुहब्बत मै से कहीं ज़्यादा राहतबख़्श है।
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ग़ज़लुल-ग़ज़लात 1:4
आ, मुझे खींचकर अपने साथ ले जा! आ, हम दौड़कर चले जाएँ! बादशाह मुझे अपने कमरों में ले जाए, और हम बाग़ बाग़ होकर तेरी ख़ुशी मनाएँ। हम मै की निसबत तेरे प्यार की ज़्यादा तारीफ़ करें। मुनासिब है कि लोग तुझसे मुहब्बत करें।
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