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मुकाशफ़ा 8:1
किताब-ए मुक़द्दस
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जब लेले ने सातवीं मुहर खोली तो आसमान पर ख़ामोशी छा गई। यह ख़ामोशी तक़रीबन आधे घंटे तक रही।
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मुकाशफ़ा 8:7
पहले फ़रिश्ते ने अपने तुरम को बजा दिया। इस पर ओले और ख़ून के साथ मिलाई गई आग पैदा होकर ज़मीन पर बरसाई गई। इससे ज़मीन का तीसरा हिस्सा, दरख़्तों का तीसरा हिस्सा और तमाम हरी घास भस्म हो गई।
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मुकाशफ़ा 8:13
फिर देखते देखते मैंने एक उक़ाब को सुना जिसने मेरे सर के ऊपर ही बुलंदियों पर उड़ते हुए ऊँची आवाज़ से पुकारा, “अफ़सोस! अफ़सोस! ज़मीन के बाशिंदों पर अफ़सोस! क्योंकि तीन फ़रिश्तों के तुरमों की आवाज़ें अभी बाक़ी हैं।”
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मुकाशफ़ा 8:8
फिर दूसरे फ़रिश्ते ने अपने तुरम में फूँक मारी। इस पर जलती हुई एक बड़ी पहाड़नुमा चीज़ को समुंदर में फेंका गया। समुंदर का तीसरा हिस्सा ख़ून में बदल गया
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मुकाशफ़ा 8:10-11
फिर तीसरे फ़रिश्ते ने अपने तुरम में फूँक मारी। इस पर मशाल की तरह भड़कता हुआ एक बड़ा सितारा आसमान से दरियाओं के तीसरे हिस्से और पानी के चश्मों पर गिर गया। इस सितारे का नाम अफ़संतीन था और इससे पानी का तीसरा हिस्सा अफ़संतीन जैसा कड़वा हो गया। बहुत-से लोग यह कड़वा पानी पीने से मर गए।
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मुकाशफ़ा 8:12
फिर चौथे फ़रिश्ते ने अपने तुरम में फूँक मारी। इस पर सूरज का तीसरा हिस्सा, चाँद का तीसरा हिस्सा और सितारों का तीसरा हिस्सा रौशनी से महरूम हो गया। दिन का तीसरा हिस्सा रौशनी से महरूम हुआ और इसी तरह रात का तीसरा हिस्सा भी।
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