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ज़बूर 82:6
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
बेशक मैंने कहा, “तुम ख़ुदा हो, सब अल्लाह तआला के फ़रज़ंद हो।
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ज़बूर 82:3
पस्तहालों और यतीमों का इनसाफ़ करो, मुसीबतज़दों और ज़रूरतमंदों के हुक़ूक़ क़ायम रखो।
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ज़बूर 82:4
पस्तहालों और ग़रीबों को बचाकर बेदीनों के हाथ से छुड़ाओ।”
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ज़बूर 82:8
ऐ अल्लाह, उठकर ज़मीन की अदालत कर! क्योंकि तमाम अक़वाम तेरी ही मौरूसी मिलकियत हैं।
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