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ज़बूर 8:4
किताब-ए मुक़द्दस
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तो इनसान कौन है कि तू उसे याद करे या आदमज़ाद कि तू उसका ख़याल रखे?
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ज़बूर 8:3
जब मैं तेरे आसमान का मुलाहज़ा करता हूँ जो तेरी उँगलियों का काम है, चाँद और सितारों पर ग़ौर करता हूँ जिनको तूने अपनी अपनी जगह पर क़ायम किया
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ज़बूर 8:5-6
तूने उसे फ़रिश्तों से कुछ ही कम बनाया, तूने उसे जलाल और इज़्ज़त का ताज पहनाया। तूने उसे अपने हाथों के कामों पर मुक़र्रर किया, सब कुछ उसके पाँवों के नीचे कर दिया
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ज़बूर 8:9
ऐ रब हमारे आक़ा, पूरी दुनिया में तेरा नाम कितना शानदार है!
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ज़बूर 8:1
दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : गित्तीत। ऐ रब हमारे आक़ा, तेरा नाम पूरी दुनिया में कितना शानदार है! तूने आसमान पर ही अपना जलाल ज़ाहिर कर दिया है।
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