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ज़बूर 71:5
किताब-ए मुक़द्दस
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क्योंकि तू ही मेरी उम्मीद है। ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू मेरी जवानी ही से मेरा भरोसा रहा है।
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ज़बूर 71:3
मेरे लिए चटान पर महफ़ूज़ घर हो जिसमें मैं हर वक़्त पनाह ले सकूँ। तूने फ़रमाया है कि मुझे नजात देगा, क्योंकि तू ही मेरी चटान और मेरा क़िला है।
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ज़बूर 71:14
लेकिन मैं हमेशा तेरे इंतज़ार में रहूँगा, हमेशा तेरी सताइश करता रहूँगा।
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ज़बूर 71:1
ऐ रब, मैंने तुझमें पनाह ली है। मुझे कभी शरमिंदा न होने दे।
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ज़बूर 71:8
दिन-भर मेरा मुँह तेरी तमजीद और ताज़ीम से लबरेज़ रहता है।
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ज़बूर 71:15
मेरा मुँह तेरी रास्ती सुनाता रहेगा, सारा दिन तेरे नजातबख़्श कामों का ज़िक्र करता रहेगा, गो मैं उनकी पूरी तादाद गिन भी नहीं सकता।
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