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ज़बूर 62:8
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
ऐ उम्मत, हर वक़्त उस पर भरोसा रख! उसके हुज़ूर अपने दिल का रंजो-अलम पानी की तरह उंडेल दे। अल्लाह ही हमारी पनाहगाह है। (सिलाह)
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ज़बूर 62:5
लेकिन तू ऐ मेरी जान, ख़ामोशी से अल्लाह ही के इंतज़ार में रह। क्योंकि उसी से मुझे उम्मीद है।
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ज़बूर 62:6
सिर्फ़ वही मेरी जान की चटान, मेरी नजात और मेरा क़िला है, इसलिए मैं नहीं डगमगाऊँगा।
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ज़बूर 62:1
दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। यदूतून के लिए। मेरी जान ख़ामोशी से अल्लाह ही के इंतज़ार में है। उसी से मुझे मदद मिलती है।
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ज़बूर 62:2
वही मेरी चटान, मेरी नजात और मेरा क़िला है, इसलिए मैं ज़्यादा नहीं डगमगाऊँगा।
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ज़बूर 62:7
मेरी नजात और इज़्ज़त अल्लाह पर मबनी है, वही मेरी महफ़ूज़ चटान है। अल्लाह में मैं पनाह लेता हूँ।
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