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ज़बूर 5:12
किताब-ए मुक़द्दस
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क्योंकि तू ऐ रब, रास्तबाज़ को बरकत देता है, तू अपनी मेहरबानी की ढाल से उस की चारों तरफ़ हिफ़ाज़त करता है।
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ज़बूर 5:3
ऐ रब, सुबह को तू मेरी आवाज़ सुनता है, सुबह को मैं तुझे सब कुछ तरतीब से पेश करके जवाब का इंतज़ार करने लगता हूँ।
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ज़बूर 5:11
लेकिन जो तुझमें पनाह लेते हैं वह सब ख़ुश हों, वह अबद तक शादियाना बजाएँ, क्योंकि तू उन्हें महफ़ूज़ रखता है। तेरे नाम को प्यार करनेवाले तेरा जशन मनाएँ।
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ज़बूर 5:8
ऐ रब, अपनी रास्त राह पर मेरी राहनुमाई कर ताकि मेरे दुश्मन मुझ पर ग़ालिब न आएँ। अपनी राह को मेरे आगे हमवार कर।
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ज़बूर 5:2
ऐ मेरे बादशाह, मेरे ख़ुदा, मदद के लिए मेरी चीख़ें सुन, क्योंकि मैं तुझी से दुआ करता हूँ।
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