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ज़बूर 27:14
किताब-ए मुक़द्दस
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रब के इंतज़ार में रह! मज़बूत और दिलेर हो, और रब के इंतज़ार में रह!
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ज़बूर 27:4
रब से मेरी एक गुज़ारिश है, मैं एक ही बात चाहता हूँ। यह कि जीते-जी रब के घर में रहकर उस की शफ़क़त से लुत्फ़अंदोज़ हो सकूँ, कि उस की सुकूनतगाह में ठहरकर महवे-ख़याल रह सकूँ।
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ज़बूर 27:1
दाऊद का ज़बूर। रब मेरी रौशनी और मेरी नजात है, मैं किससे डरूँ? रब मेरी जान की पनाहगाह है, मैं किससे दहशत खाऊँ?
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ज़बूर 27:13
लेकिन मेरा पूरा ईमान यह है कि मैं ज़िंदों के मुल्क में रहकर रब की भलाई देखूँगा।
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ज़बूर 27:5
क्योंकि मुसीबत के दिन वह मुझे अपनी सुकूनतगाह में पनाह देगा, मुझे अपने ख़ैमे में छुपा लेगा, मुझे उठाकर ऊँची चटान पर रखेगा।
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