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ज़बूर 17:8
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
आँख की पुतली की तरह मेरी हिफ़ाज़त कर, अपने परों के साय में मुझे छुपा ले।
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ज़बूर 17:15
लेकिन मैं ख़ुद रास्तबाज़ साबित होकर तेरे चेहरे का मुशाहदा करूँगा, मैं जागकर तेरी सूरत से सेर हो जाऊँगा।
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ज़बूर 17:6-7
ऐ अल्लाह, मैं तुझे पुकारता हूँ, क्योंकि तू मेरी सुनेगा। कान लगाकर मेरी दुआ को सुन। तू जो अपने दहने हाथ से उन्हें रिहाई देता है जो अपने मुख़ालिफ़ों से तुझमें पनाह लेते हैं, मोजिज़ाना तौर पर अपनी शफ़क़त का इज़हार कर।
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