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ज़बूर 137:1
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
जब सिय्यून की याद आई तो हम बाबल की नहरों के किनारे ही बैठकर रो पड़े।
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ज़बूर 137:3-4
क्योंकि जिन्होंने हमें गिरिफ़्तार किया था उन्होंने हमें वहाँ गीत गाने को कहा, और जो हमारा मज़ाक़ उड़ाते हैं उन्होंने ख़ुशी का मुतालबा किया, “हमें सिय्यून का कोई गीत सुनाओ!” लेकिन हम अजनबी मुल्क में किस तरह रब का गीत गाएँ?
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