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ज़बूर 130:5
किताब-ए मुक़द्दस
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मैं रब के इंतज़ार में हूँ, मेरी जान शिद्दत से इंतज़ार करती है। मैं उसके कलाम से उम्मीद रखता हूँ।
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ज़बूर 130:4
लेकिन तुझसे मुआफ़ी हासिल होती है ताकि तेरा ख़ौफ़ माना जाए।
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ज़बूर 130:6
पहरेदार जिस शिद्दत से पौ फटने के इंतज़ार में रहते हैं, मेरी जान उससे भी ज़्यादा शिद्दत के साथ, हाँ ज़्यादा शिद्दत के साथ रब की मुंतज़िर रहती है।
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ज़बूर 130:2
ऐ रब, मेरी आवाज़ सुन! कान लगाकर मेरी इल्तिजाओं पर ध्यान दे!
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ज़बूर 130:1
ज़ियारत का गीत। ऐ रब, मैं तुझे गहराइयों से पुकारता हूँ।
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