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ज़बूर 11:7
किताब-ए मुक़द्दस
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क्योंकि रब रास्त है, और उसे इनसाफ़ प्यारा है। सिर्फ़ सीधी राह पर चलनेवाले उसका चेहरा देखेंगे।
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ज़बूर 11:4
लेकिन रब अपनी मुक़द्दस सुकूनतगाह में है, रब का तख़्त आसमान पर है। वहाँ से वह देखता है, वहाँ से उस की आँखें आदमज़ादों को परखती हैं।
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ज़बूर 11:5
रब रास्तबाज़ को परखता तो है, लेकिन बेदीन और ज़ालिम से नफ़रत ही करता है।
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ज़बूर 11:3
रास्तबाज़ क्या करे? उन्होंने तो बुनियाद को ही तबाह कर दिया है।
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ज़बूर 11:1
दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। मैंने रब में पनाह ली है। तो फिर तुम किस तरह मुझसे कहते हो, “चल, परिंदे की तरह फड़फड़ाकर पहाड़ों में भाग जा”?
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