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अमसाल 29:25
किताब-ए मुक़द्दस
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जो इनसान से ख़ौफ़ खाए वह फंदे में फँस जाएगा, लेकिन जो रब का ख़ौफ़ माने वह महफ़ूज़ रहेगा।
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अमसाल 29:18
जहाँ रोया नहीं वहाँ क़ौम बेलगाम हो जाती है, लेकिन मुबारक है वह जो शरीअत के ताबे रहता है।
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अमसाल 29:11
अहमक़ अपना पूरा ग़ुस्सा उतारता, लेकिन दानिशमंद उसे रोककर क़ाबू में रखता है।
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अमसाल 29:15
छड़ी और नसीहत हिकमत पैदा करती हैं। जिसे बेलगाम छोड़ा जाए वह अपनी माँ के लिए शरमिंदगी का बाइस होगा।
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अमसाल 29:17
अपने बेटे की तरबियत कर तो वह तुझे सुकून और ख़ुशी दिलाएगा।
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अमसाल 29:23
तकब्बुर अपने मालिक को पस्त कर देगा जबकि फ़रोतन शख़्स इज़्ज़त पाएगा।
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अमसाल 29:22
ग़ज़बआलूद आदमी झगड़े छेड़ता रहता है, ग़ुसीले शख़्स से मुतअद्दिद गुनाह सरज़द होते हैं।
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अमसाल 29:20
क्या कोई दिखाई देता है जो बात करने में जल्दबाज़ है? उस की निसबत अहमक़ के सुधरने की ज़्यादा उम्मीद है।
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