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अमसाल 20:22
किताब-ए मुक़द्दस
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मत कहना, “मैं ग़लत काम का इंतक़ाम लूँगा।” रब के इंतज़ार में रह तो वही तेरी मदद करेगा।
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अमसाल 20:24
रब हर एक के क़दम मुक़र्रर करता है। तो फिर इनसान किस तरह अपनी राह समझ सकता है?
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अमसाल 20:27
आदमज़ाद की रूह रब का चराग़ है जो इनसान के बातिन की तह तक सब कुछ की तहक़ीक़ करता है।
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अमसाल 20:5
इनसान के दिल का मनसूबा गहरे पानी की मानिंद है, लेकिन समझदार आदमी उसे निकालकर अमल में लाता है।
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अमसाल 20:19
अगर तू बुहतान लगानेवाले को हमराज़ बनाए तो वह इधर उधर फिरकर बात फैलाएगा। चुनाँचे बातूनी से गुरेज़ कर।
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अमसाल 20:3
लड़ाई-झगड़े से बाज़ रहना इज़्ज़त का तुर्राए-इम्तियाज़ है जबकि हर अहमक़ झगड़ने के लिए तैयार रहता है।
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अमसाल 20:7
जो रास्तबाज़ बेइलज़ाम ज़िंदगी गुज़ारे उस की औलाद मुबारक है।
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