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अमसाल 16:3
किताब-ए मुक़द्दस
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जो कुछ भी तू करना चाहे उसे रब के सुपुर्द कर। तब ही तेरे मनसूबे कामयाब होंगे।
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अमसाल 16:9
इनसान अपने दिल में मनसूबे बाँधता रहता है, लेकिन रब ही मुक़र्रर करता है कि वह आख़िरकार किस राह पर चल पड़े।
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अमसाल 16:24
मेहरबान अलफ़ाज़ ख़ालिस शहद हैं, वह जान के लिए शीरीं और पूरे जिस्म को तरो-ताज़ा कर देते हैं।
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अमसाल 16:1
इनसान दिल में मनसूबे बाँधता है, लेकिन ज़बान का जवाब रब की तरफ़ से आता है।
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अमसाल 16:32
तहम्मुल करनेवाला सूरमे से सबक़त लेता है, जो अपने आपको क़ाबू में रखे वह शहर को शिकस्त देनेवाले से बरतर है।
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अमसाल 16:18
तबाही से पहले ग़ुरूर और गिरने से पहले तकब्बुर आता है।
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अमसाल 16:2
इनसान की नज़र में उस की तमाम राहें पाक-साफ़ हैं, लेकिन रब ही रूहों की जाँच-पड़ताल करता है।
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अमसाल 16:20
जो कलाम पर ध्यान दे वह ख़ुशहाल होगा, मुबारक है वह जो रब पर भरोसा रखे।
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अमसाल 16:8
इनसाफ़ से थोड़ा-बहुत कमाना नाइनसाफ़ी से बहुत दौलत जमा करने से कहीं बेहतर है।
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अमसाल 16:25
ऐसी राह भी होती है जो देखने में तो ठीक लगती है गो उसका अंजाम मौत है।
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अमसाल 16:28
कजरौ आदमी झगड़े छेड़ता रहता, और तोहमत लगानेवाला दिली दोस्तों में भी रख़ना डालता है।
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