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मरक़ुस 3:35
किताब-ए मुक़द्दस
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जो भी अल्लाह की मरज़ी पूरी करता है वह मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी माँ है।”
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मरक़ुस 3:28-29
मैं तुमसे सच कहता हूँ कि लोगों के तमाम गुनाह और कुफ़र की बातें मुआफ़ की जा सकेंगी, ख़ाह वह कितना ही कुफ़र क्यों न बकें। लेकिन जो रूहुल-क़ुद्स के ख़िलाफ़ कुफ़र बके उसे अबद तक मुआफ़ी नहीं मिलेगी। वह एक अबदी गुनाह का क़ुसूरवार ठहरेगा।”
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मरक़ुस 3:24-25
जिस बादशाही में फूट पड़ जाए वह क़ायम नहीं रह सकती। और जिस घराने की ऐसी हालत हो वह भी क़ायम नहीं रह सकता।
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मरक़ुस 3:11
और जब भी नापाक रूहों ने ईसा को देखा तो वह उसके सामने गिरकर चीख़ें मारने लगीं, “आप अल्लाह के फ़रज़ंद हैं।”
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