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हिज़क़ियेल 37:4-5
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
तब उसने फ़रमाया, “नबुव्वत करके हड्डियों को बता, ‘ऐ सूखी हुई हड्डियो, रब का कलाम सुनो! रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि मैं तुममें दम डालूँगा तो तुम दुबारा ज़िंदा हो जाओगी।
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हिज़क़ियेल 37:6
मैं तुम पर नसें और गोश्त चढ़ाकर सब कुछ जिल्द से ढाँप दूँगा। मैं तुममें दम डाल दूँगा, और तुम ज़िंदा हो जाओगी। तब तुम जान लोगी कि मैं ही रब हूँ’।”
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हिज़क़ियेल 37:3
रब ने मुझसे पूछा, “ऐ आदमज़ाद, क्या यह हड्डियाँ दुबारा ज़िंदा हो सकती हैं?” मैंने जवाब दिया, “ऐ रब क़ादिरे-मुतलक़, तू ही जानता है।”
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हिज़क़ियेल 37:1-2
एक दिन रब का हाथ मुझ पर आ ठहरा। रब ने मुझे अपने रूह से बाहर ले जाकर एक खुली वादी के बीच में खड़ा किया। वादी हड्डियों से भरी थी। उसने मुझे उनमें से गुज़रने दिया तो मैंने देखा कि वादी की ज़मीन पर बेशुमार हड्डियाँ बिखरी पड़ी हैं। यह हड्डियाँ सरासर सूखी हुई थीं।
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हिज़क़ियेल 37:7-8
मैंने ऐसा ही किया। और ज्योंही मैं नबुव्वत करने लगा तो शोर मच गया। हड्डियाँ खड़खड़ाते हुए एक दूसरी के साथ जुड़ गईं, और होते होते पूरे ढाँचे बन गए। मेरे देखते देखते नसें और गोश्त ढाँचों पर चढ़ गया और सब कुछ जिल्द से ढाँपा गया। लेकिन अब तक जिस्मों में दम नहीं था।
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