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इफ़िसियों 6:12
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
क्योंकि हमारी जंग इनसान के साथ नहीं है बल्कि हुक्मरानों और इख़्तियारवालों के साथ, इस तारीक दुनिया के हाकिमों के साथ और आसमानी दुनिया की शैतानी कुव्वतों के साथ है।
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इफ़िसियों 6:18
और हर मौक़े पर रूह में हर तरह की दुआ और मिन्नत करते रहें। जागते और साबितक़दमी से तमाम मुक़द्दसीन के लिए दुआ करते रहें।
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इफ़िसियों 6:11
अल्लाह का पूरा ज़िरा-बकतर पहन लें ताकि इबलीस की चालों का सामना कर सकें।
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इफ़िसियों 6:13
चुनाँचे अल्लाह का पूरा ज़िरा-बकतर पहन लें ताकि आप मुसीबत के दिन इबलीस के हमलों का सामना कर सकें बल्कि सब कुछ सरंजाम देने के बाद क़ायम रह सकें।
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इफ़िसियों 6:16-17
इसके अलावा ईमान की ढाल भी उठाए रखें, क्योंकि इससे आप इबलीस के जलते हुए तीर बुझा सकते हैं। अपने सर पर नजात का ख़ोद पहनकर हाथ में रूह की तलवार जो अल्लाह का कलाम है थामे रखें।
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इफ़िसियों 6:14-15
अब यों खड़े हो जाएँ कि आपकी कमर में सच्चाई का पटका बँधा हुआ हो, आपके सीने पर रास्तबाज़ी का सीनाबंद लगा हो और आपके पाँवों में ऐसे जूते हों जो सुलह-सलामती की ख़ुशख़बरी सुनाने के लिए तैयार रहें।
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इफ़िसियों 6:10
एक आख़िरी बात, ख़ुदावंद और उस की ज़बरदस्त क़ुव्वत में ताक़तवर बन जाएँ।
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इफ़िसियों 6:2-3
कलामे-मुक़द्दस में लिखा है, “अपने बाप और अपनी माँ की इज़्ज़त करना।” यह पहला हुक्म है जिसके साथ एक वादा भी किया गया है, “फिर तू ख़ुशहाल और ज़मीन पर देर तक जीता रहेगा।”
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इफ़िसियों 6:1
बच्चो, ख़ुदावंद में अपने माँ-बाप के ताबे रहें, क्योंकि यही रास्तबाज़ी का तक़ाज़ा है।
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