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वाइज़ 5:2
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
बोलने में जल्दबाज़ी न कर, तेरा दिल अल्लाह के हुज़ूर कुछ बयान करने में जल्दी न करे। अल्लाह आसमान पर है जबकि तू ज़मीन पर ही है। लिहाज़ा बेहतर है कि तू कम बातें करे।
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वाइज़ 5:19
क्योंकि जब अल्लाह किसी शख़्स को मालो-मता अता करके उसे इस क़ाबिल बनाए कि उसका मज़ा ले सके, अपना नसीब क़बूल कर सके और मेहनत-मशक़्क़त के साथ साथ ख़ुश भी हो सके तो यह अल्लाह की बख़्शिश है।
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वाइज़ 5:10
जिसे पैसे प्यारे हों वह कभी मुतमइन नहीं होगा, ख़ाह उसके पास कितने ही पैसे क्यों न हों। जो ज़रदोस्त हो वह कभी आसूदा नहीं होगा, ख़ाह उसके पास कितनी ही दौलत क्यों न हो। यह भी बातिल ही है।
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वाइज़ 5:1
अल्लाह के घर में जाते वक़्त अपने क़दमों का ख़याल रख और सुनने के लिए तैयार रह। यह अहमक़ों की क़ुरबानियों से कहीं बेहतर है, क्योंकि वह जानते ही नहीं कि ग़लत काम कर रहे हैं।
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वाइज़ 5:4
अगर तू अल्लाह के हुज़ूर मन्नत माने तो उसे पूरा करने में देर मत कर। वह अहमक़ों से ख़ुश नहीं होता, चुनाँचे अपनी मन्नत पूरी कर।
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वाइज़ 5:5
मन्नत न मानना मन्नत मानकर उसे पूरा न करने से बेहतर है।
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वाइज़ 5:12
काम-काज करनेवाले की नींद मीठी होती है, ख़ाह उसने कम या ज़्यादा खाना खाया हो, लेकिन अमीर की दौलत उसे सोने नहीं देती।
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वाइज़ 5:15
माँ के पेट से निकलते वक़्त वह नंगा था, और इसी तरह कूच करके चला भी जाएगा। उस की मेहनत का कोई फल नहीं होगा जिसे वह अपने साथ ले जा सके।
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