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2 सलातीन 6:17
किताब-ए मुक़द्दस
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फिर उसने दुआ की, “ऐ रब, नौकर की आँखें खोल ताकि वह देख सके।” रब ने इलीशा के नौकर की आँखें खोल दीं तो उसने देखा कि पहाड़ पर इलीशा के इर्दगिर्द आतिशीं घोड़े और रथ फैले हुए हैं।
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2 सलातीन 6:16
लेकिन इलीशा ने उसे तसल्ली दी, “डरो मत! जो हमारे साथ हैं वह उनकी निसबत कहीं ज़्यादा हैं जो दुश्मन के साथ हैं।”
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2 सलातीन 6:15
जब इलीशा का नौकर सुबह-सवेरे जाग उठा और घर से निकला तो क्या देखता है कि पूरा शहर एक बड़ी फ़ौज से घिरा हुआ है जिसमें रथ और घोड़े भी शामिल हैं। उसने इलीशा से कहा, “हाय मेरे आक़ा, हम क्या करें?”
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2 सलातीन 6:18
जब दुश्मन इलीशा की तरफ़ बढ़ने लगा तो उसने दुआ की, “ऐ रब, इनको अंधा कर दे!” रब ने इलीशा की सुनी और उन्हें अंधा कर दिया।
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2 सलातीन 6:6
इलीशा ने सवाल किया, “लोहा कहाँ पानी में गिरा?” आदमी ने उसे जगह दिखाई तो नबी ने किसी दरख़्त से शाख़ काटकर पानी में फेंक दी। अचानक लोहा पानी की सतह पर आकर तैरने लगा।
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2 सलातीन 6:5
काटते काटते अचानक किसी की कुल्हाड़ी का लोहा पानी में गिर गया। वह चिल्ला उठा, “हाय मेरे आक़ा! यह मेरा नहीं था, मैंने तो उसे किसी से उधार लिया था।”
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2 सलातीन 6:7
इलीशा बोला, “इसे पानी से निकाल लो!” आदमी ने अपना हाथ बढ़ाकर लोहे को पकड़ लिया।
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