कैसेकै ऐंसो दिन आगो जब लोग सई सिक्छा कै सुन्नोई ना चाँहंगे, पर बे अपनी इच्छा के हिसाब सै ऐंसे सिकानै बारे लोगौ कै लांगे, जो उनकै बेई बात बताऐ जो उनकै अच्छी लगै हैं। बे सच्चाई की बातौं कै सुन्नै के ताँई अपने कानौ कै बन्द करंगे और मौह सै बनाई भई झूँटी कस्ताऔ मै धियान दंगे।