प्रिय हो, तुम जा संसारमे बिदेशी और प्रवासी कता बैठे हओ। मए तुमके बिन्ती करत हओं, कि बे सबए दुष्ट शारीरिक इच्छनसे अलग रहाओ, काहेकी अइसे चाहना आत्माके बिरोधमे रोज लडत हएं। कभीकभा उइसे आदमी होत हएं जौन परमेश्वरके नाए चिने होत हएं और तुमके तुमर काम अच्छो नाए हए कहिके झुटो आरोप लगान सिकत हएं। जहेमारे तुमके अपनो ब्यबहार प्रति साबधान होन पणैगो, ताकी बे तुमर अच्छो ब्यबहार देख पामएं। अन्तमे बे स्वीकार करंगे, कि तुमर ब्यबहार अच्छो हए और अन्तमे जब बा लौटके आबैगो तओ परमेश्वरको प्रसंसा करंगे।