इना पोर योहोवा सुखदायक गंदायन्य लीन वीचार कोर्यु, “मानुसक कारण हांव ओळी कोदी कोळी क शाप नी आपो, बाखुन मानुसक मन मा बचपन सी जो काय पोयदा हुये चोत भुण्डोत रोवे; तेवी जोसु मे आखा जीवोक हिमी मारलु छे, तोसु तेनुक ओळतेन कोदी नी मारो। हिमी सी जोत्यार लोगुन कोळ बोनली रोहसे, तोत्यार लोगुन वेरने आरु काटने क टेम, सेळा आरु तोपोन, धूपकाल आरु शीतकाल, दाहड़ा आरु रात लोगातार होयतो रोहसे।”