समय चे अनुसार तां तम्हानु गुरु हुती जाणे चाही हुते, तां वी ईं जरुरी छै कि कुई तम्हानु दुबारा नरीकारा चे वचना ची शुरु ची शिक्षा बल्ति कनु सिखाओ। तम्ही तां इसड़े हुती गेले कि तम्हानु अन्न चे बदले हमा तक ङूध ही चाही छै। कांकि ङूध पीणे आले नु तां धार्मिकता चे वचना ची पिछाण ना हुवी, कांकि ऊं ब़ाल छै।