अगर मैं घमण्ड करने चाहवे वी तां मूर्ख नी बणी, कांकि सच्च ब़ोली, तां वी रुकती जाये, इसड़े ना हो कि, जिसड़े कुई मनु ङेखे, जा ते बल्ति माये कनु सुणे, मनु ओचे कनु बढ़ती कर समझे।
ते ऐवास्ते कि मैं प्रकाशना ची वजह कनु घणा घमण्ड ना करे, माये शरीरा मां हेक कांटा चुभाला गेला यानिकि शैताना चा हेक दूत मनु घूसे मारो ताकि मैं घमण्ड ना करे।