‘घेई कइ एन्हि मेह्णु जे बोल,
“तुस शुणी त बिश्ते पर समझ ना बटते।
तुस हेरी त बिश्ते, पर पिछाण ना बटते।”
किस कि एन्हि मेह्णु के मन पक्की गो असे।
एन्के कन उचा शुणता।
एन्हि अपु टीर बन्न रखो असे कि कुछ ना काएल,
ना त से अपु टीरे बइ हेरियेल
होर कन बइ शुणियेल
होर अपु मन अन्तर समझ कइ मोउं केईं वापस एईयेल,
त अउं परमेश्वर तेन्हि ठीक कइ छउं।’”